वर्तमान में मध्य पूर्व की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। एक तरफ Strait of Hormuz में तनाव है, तो दूसरी तरफ लेबनान और गाजा में सैन्य कार्रवाई जारी है। ऐसे में पाकिस्तान की भूमिका एक “शांतिदूत” के रूप में उभर रही थी, लेकिन आंतरिक राजनीति और कट्टरपंथी बयानों ने इसकी राह मुश्किल कर दी है।
इज़राइली विदेश मंत्री का प्रहार (Israeli Foreign Minister’s Stance)
इजराइल के विदेश मंत्री Gideon Sa’ar (गिदोन सार) ने पाकिस्तान सरकार की मंशा पर सीधे प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वाहवाही लूटने के लिए शांति वार्ता की मेजबानी कर रहा है, और दूसरी तरफ उसके मंत्री “रक्तपात के आरोप” (Blood Libel) लगाकर माहौल बिगाड़ रहे हैं। इजराइल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे पाकिस्तान की इस “दोहरी नीति” को पहचानें।
पाकिस्तान की दलील और लेबनान का मुद्दा (Lebanon Genocide Allegations)
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने बचाव में तर्क दिया कि जब इस्लामाबाद में शांति की मेज सज रही है, उसी समय लेबनान में निर्दोष नागरिकों का खून बहाया जा रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि वह ईरान का मित्र देश होने के नाते और अमेरिका के साथ पुराने संबंधों के आधार पर इस युद्ध को रोकने की क्षमता रखता है। लेकिन, इजराइल के खिलाफ दिए गए “विनाश के आह्वान” ने पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका के भीतर पाकिस्तान समर्थकों को बैकफुट पर धकेल दिया है।
आगामी वार्ता की चुनौतियां (Challenges for Saturday Talks):
- Credibility Crisis: क्या अमेरिका इजराइल के विरोध के बावजूद पाकिस्तान को निष्पक्ष मानेगा?
- Internal Pressure: पाकिस्तान के भीतर इजराइल विरोधी भावनाएं सरकार को समझौते से रोक सकती हैं।
- Regional Response: ईरान इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
निष्कर्ष
शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को होने वाली वार्ता से पहले इस विवाद ने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है। जहाँ पाकिस्तान ‘रेड कारपेट’ बिछाकर मेहमानों का इंतजार कर रहा है, वहीं उसके अपने ही मंत्री के बोल इस आयोजन की सफलता पर ग्रहण लगा सकते हैं। दुनिया अब यह देख रही है कि क्या US-Iran Neutral Mediation का यह प्रयास केवल एक दिखावा बनकर रह जाएगा या वास्तव में कोई ठोस परिणाम निकलेगा।



































