ईरान की कड़ी शर्तें और कलीबाफ़ का रुख जबकि अमेरिका बातचीत के लिए तैयार है, ईरान ने अपनी मेज सजाने से पहले ही शर्तें रख दी हैं। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर क़लीबाफ़ ने स्पष्ट किया है कि लेबनान में जारी युद्धविराम और अमेरिका द्वारा फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों (Frozen Assets) की रिहाई वार्ता की अनिवार्य पूर्व शर्त होनी चाहिए। ईरान का यह रुख संकेत देता है कि वह किसी भी दबाव में झुकने के बजाय अपनी आर्थिक और क्षेत्रीय स्थिति को मजबूत करना चाहता है।
वार्ता के प्रमुख बिंदु और ‘Unsolvable’ चुनौतियां विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान की मांगों के बीच की खाई को पाटना लगभग असंभव सा लगता है। मुख्य विवादित मुद्दे निम्नलिखित हैं:
- Nuclear & Ballistic Program: अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को पूरी तरह नियंत्रित करे।
- Armed Proxy Groups: हिज़्बुल्लाह और अन्य प्रॉक्सी समूहों को ईरान का समर्थन अमेरिका और इज़राइल के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती है।
- Political Pressure in US: जेडी वैंस पर घरेलू राजनीतिक दबाव भी है, क्योंकि आने वाले समय में उन्हें राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पेश करनी है, जहाँ मतदाता एक निर्णायक और लाभप्रद शांति समझौता चाहते हैं।
प्रतिनिधिमंडल की संरचना और कूटनीति का भार ईरानी प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री अब्बास अराघची और केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती की मौजूदगी यह बताती है कि ईरान का मुख्य ध्यान सुरक्षा के साथ-साथ अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था को बचाने पर भी है। दूसरी ओर, जेरेड कुशनर का अमेरिकी दल में शामिल होना यह संकेत देता है कि बैक-चैनल डिप्लोमेसी (Back-channel diplomacy) पहले से ही सक्रिय है।
निष्कर्ष यदि यह वार्ता विफल होती है, तो यह न केवल एक अस्थायी युद्धविराम का अंत होगा, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के सच होने की शुरुआत भी हो सकती है, जो उन्होंने ईरान के वजूद को लेकर दी थी। इस्लामाबाद अगले 48 घंटों तक दुनिया की सबसे संवेदनशील कूटनीति का गवाह बनेगा।



































