न्याय की मांग: पोस्टमार्टम हाउस पर हंगामा राजीव सिंह उर्फ रिंकू की हत्या की खबर जैसे ही कचहरी और बार एसोसिएशन तक पहुँची, अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में वकील और मृतक के परिजन पोस्टमार्टम हाउस के बाहर जमा हो गए। पुलिस प्रशासन की ढिलाई और बढ़ते अपराधों के विरोध में वकीलों ने पुलिस लाइन मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया। वकीलों का साफ कहना है कि जब समाज को न्याय दिलाने वाला अधिवक्ता ही सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी का क्या होगा?
विरोध और प्रदर्शन की गूँज प्रदर्शनकारी वकीलों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मांग की कि आरोपियों की गिरफ्तारी तत्काल की जाए। घंटों तक चले इस जाम के कारण यातायात पूरी तरह बाधित रहा और स्थिति को संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि राजीव सिंह की किसी से कोई पुरानी रंजिश नहीं थी, ऐसे में यह सुनियोजित हत्या (Planned Murder) की ओर इशारा करती है।
पुलिस के सामने बड़ी चुनौती कटरा कोतवाली पुलिस के लिए यह मामला ‘प्रतिष्ठा’ का प्रश्न बन गया है। सरेराह हुई इस हत्या ने पुलिस की गश्त और इंटेलिजेंस पर सवालिया निशान लगा दिया है। हालांकि, पुलिस अधीक्षक ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा, लेकिन वकीलों का आक्रोश तब तक शांत होने वाला नहीं है जब तक कि ठोस कार्रवाई धरातल पर न दिखे।
निष्कर्ष मिर्जापुर की यह घटना उत्तर प्रदेश में ‘क्राइम कंट्रोल’ के दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। एक अधिवक्ता और जनप्रतिनिधि की दिनदहाड़े हत्या यह बताती है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं। अब देखना यह होगा कि सीसीटीवी में साफ दिख रहे इन कातिलों तक पुलिस के हाथ कब पहुँचते हैं और क्या पीड़ित परिवार को उचित न्याय मिल पाता है।



































