ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi की Russia यात्रा के दौरान एक नया शांति प्रस्ताव सामने आया है। रूस लंबे समय से ईरान का प्रमुख समर्थक रहा है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस मौजूदा संकट में Moscow ईरान की क्या और कितनी सहायता करेगा। इसी यात्रा के दौरान युद्ध खत्म करने के प्रस्ताव पर वैश्विक चर्चा तेज हुई है।
हताहतों की भारी संख्या युद्ध की शुरुआत से अब तक भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, Iran में अब तक कम से कम 3,375 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। यह संख्या युद्ध की विभीषिका को दर्शाती है, जिसने क्षेत्र में मानवीय संकट पैदा कर दिया है। इसके बावजूद कूटनीतिक स्तर पर अभी भी खींचतान जारी है।
लेबनान और इजरायल में संघर्ष Lebanon में Israel और ईरान समर्थित Hezbollah के बीच फिर से शुरू हुई लड़ाई ने तबाही मचाई है, जिसमें 2,521 लोग मारे गए हैं। वहीं इजरायल में 23 और खाड़ी के अरब देशों में एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव लगातार बना हुआ है और सैन्य कार्रवाई रुकने का नाम नहीं ले रही है।
सैन्य बलों को हुआ नुकसान इस संघर्ष में केवल नागरिक ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय सैनिक भी मारे गए हैं। लेबनान में 16 Israeli सैनिक और क्षेत्र में 13 American सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, दक्षिणी लेबनान में तैनात 6 UN Peacekeepers भी इस भीषण युद्ध की चपेट में आकर शहीद हो गए हैं।
परमाणु हथियार और सुरक्षा चिंताएं अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने साफ किया है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना ही “मुख्य मुद्दा” है। उन्होंने चिंता जताई कि अगर ईरान में कट्टरपंथी धार्मिक शासन सत्ता में बना रहता है, तो वे परमाणु शक्ति बनने का प्रयास जारी रखेंगे। यही कारण है कि अमेरिका ईरान के वार्ता टालने वाले प्रस्ताव पर सहमत नहीं है।
वार्ता टालने पर गतिरोध ईरान ने युद्ध विराम के बदले परमाणु वार्ता को स्थगित करने की जो शर्त रखी है, उसे अमेरिका ने सुरक्षा के लिए खतरा माना है। White House और सुरक्षा टीम इस बात पर अडिग है कि परमाणु कार्यक्रम पर बिना किसी देरी के ठोस चर्चा होनी चाहिए। इसी पेच के कारण शांति प्रस्ताव पर फिलहाल सहमति बनती नहीं दिख रही है।

































