दगे हुए कारतूस: सुभासपा नेता ओम प्रकाश राजभर ने विपक्षी गठबंधन के दलों की तुलना दगे कारतूसों से की है। उन्होंने कहा कि बिहार की आरजेडी और बंगाल की टीएमसी अब पूरी तरह दगे हुए कारतूस हैं। महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के विपक्षी दल भी अब अपनी राजनीतिक धार खो चुके हैं। इन सभी राज्यों के चुनाव परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि जनता इनके साथ नहीं है। राजभर के अनुसार इन दलों का एक साथ आना केवल अपनी डूबती नैया बचाने का प्रयास है।
आई-पैक और घोटाला: चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पैक को लेकर राजभर ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि आई-पैक के पास जो पैसा था, वह असल में कोयला घोटाले का धन था। अब पश्चिम बंगाल में उनकी सरकार नहीं रही तो उनका पुराना कॉन्ट्रैक्ट भी अब खत्म हो गया है। भ्रष्टाचार के पैसों से चुनाव जीतने की कोशिश करने वालों का अब पर्दाफाश हो चुका है। राजभर ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विपक्षी दलों को घेरते हुए उनकी नैतिक हार की बात कही है।
राज्यों में विफलता: अखिलेश यादव द्वारा विभिन्न राज्यों में गठबंधन के दावों पर राजभर ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि अखिलेश ने महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा के नतीजे देख लिए हैं। दिल्ली और पश्चिम बंगाल के परिणामों ने भी समाजवादी पार्टी के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। इन सभी जगहों पर विपक्ष को करारी हार मिली है जिससे उनकी रणनीतियां पूरी तरह विफल रहीं। विपक्षी एकता का गुब्बारा अब लगभग हर राज्य में फूट चुका है और नेता परेशान हैं।
फंड की बड़ी कमी: समाजवादी पार्टी के भीतर चल रही आर्थिक तंगी का जिक्र भी राजभर ने अपने बयान में किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव खुद स्वीकार कर रहे हैं कि उनके पास फंड की भारी कमी है। राजभर के अनुसार जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, सपा के पास फंड की यह कमी बढ़ती ही जाएगी। बिना संसाधनों और जनता के समर्थन के चुनाव जीतना अब समाजवादी पार्टी के बस में नहीं है। आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर अखिलेश यादव की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं।
संविधान की अवहेलना: राजभर ने अखिलेश यादव और ममता बनर्जी पर संविधान का पालन न करने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रेस के सामने स्पष्ट किया कि ममता और अखिलेश दोनों ही भारतीय संविधान को नहीं मानते। यही कारण है कि वे बार-बार बैठकें करने के लिए कोलकाता जैसे शहरों का रुख कर रहे हैं। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा न करना इन नेताओं की पुरानी आदत बन चुकी है अब। संविधान का नाम लेकर राजनीति करने वाले ये लोग असल में उसका अनादर कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश पर नजर: राजभर ने कहा कि पश्चिम बंगाल के नतीजों के बाद अब देश की नजरें उत्तर प्रदेश पर हैं। पूरा देश देख रहा है कि उत्तर प्रदेश की जनता परिवारवाद और भ्रष्टाचार को कैसे नकारती है। अखिलेश यादव अब ज्योतिषियों के सहारे अपनी राजनीतिक नैया पार लगाने की कोशिश में जुटे हैं। लेकिन जनता का मूड और जमीनी हकीकत अब विपक्षी दलों के पूरी तरह से खिलाफ हो चुकी है। उत्तर प्रदेश में अब केवल विकास की राजनीति होगी और विपक्षी भ्रम का अंत निश्चित है।



































