देश भर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर देश के सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त रवैया अपनाते हुए कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा है कि सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों के काटने की बढ़ती समस्या पूरे समाज को गहरी चिंता में डालने वाली है। राज्य सरकारों द्वारा एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों को सही तरीके से लागू न कर पाना इस भयंकर समस्या का सबसे प्रमुख कारण है। शीर्ष अदालत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संस्थागत क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाने का फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि इस गंभीर और जानलेवा स्थिति को किसी भी हाल में नजरअंदाज या बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।
विदेशी पर्यटकों पर हुए हमले देश में आवारा कुत्तों के आतंक का प्रभाव अब विदेशी पर्यटकों पर भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है, जो बेहद शर्मनाक है। अदालत ने एक घटना का विशेष रूप से जिक्र करते हुए बताया कि सूरत शहर में एक जर्मन यात्री को आवारा कुत्ते ने काट लिया। इसके अलावा दिल्ली के आईजीआई हवाई अड्डे पर भी दर्जनों लोगों को आवारा कुत्तों ने अपना निशाना बनाकर घायल किया है। शीर्ष अदालत का मानना है कि इस तरह की गंभीर घटनाएं शहरी प्रशासन में जनता और पर्यटकों के विश्वास को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। प्रशासन की इस नाकामी के कारण पूरे विश्व स्तर पर भी देश की छवि और पर्यटन उद्योग पर बहुत बुरा असर पड़ता है।
अवमानना की सख्त चेतावनी सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को अपने आदेशों का तत्काल और सख्ती से पालन करने की कड़ी चेतावनी दी है। अदालत ने बहुत ही स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि इन सख्त निर्देशों का सही ढंग से पालन नहीं किया गया, तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। निर्देशों की अवहेलना करने वाले सभी राज्यों और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सीधे तौर पर अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी। इसके साथ ही अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि इन आदेशों का पालन कराने वाले अधिकारियों को उनका काम बिना किसी बाधा के करने दिया जाए। किसी भी अपरिहार्य स्थिति के अलावा अदालतों को इन अधिकारियों के खिलाफ कोई भी मामला या सुनवाई जल्दी स्वीकार नहीं करनी चाहिए।
वैक्सीन और ट्रेनिंग के निर्देश कुत्तों के हमलों और रैबीज जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए सुप्रीम कोर्ट ने चिकित्सा और प्रशासन से जुड़े कई अहम निर्देश भी दिए हैं। शीर्ष अदालत ने कहा है कि इस संवेदनशील मुद्दे से निपटने के लिए सभी संबंधित सरकारी कर्मचारियों को उचित और विशेष ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। इसके साथ ही सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में आम जनता के लिए एंटी रैबीज वैक्सीन हर समय पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करवाई जाए। देशभर में रैबीज से हो रही मौतों को रोकने के लिए अदालत ने चिकित्सा सुविधाओं को तुरंत और ज्यादा मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। इस समस्या पर काबू पाने के लिए ज्यादा प्रभावित इलाकों में विशेषज्ञों की एक विशेष टीम की मदद लेने का भी निर्देश दिया गया है।
राजमार्गों से मवेशी हटाने के आदेश आवारा कुत्तों की समस्या के साथ-साथ शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर घूमने वाले आवारा मवेशियों की बड़ी समस्या पर भी कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को कड़े निर्देश देते हुए कहा है कि वह सभी राजमार्गों से आवारा मवेशियों को तुरंत हटाने के लिए कदम उठाए। इन आवारा मवेशियों को सड़कों से सुरक्षित तरीके से हटाकर रखने के लिए पर्याप्त संख्या में नई और सुरक्षित गौशालाओं का निर्माण किया जाना चाहिए। राजमार्गों से हटाए गए इन सभी बेसहारा पशुओं को उन नव निर्मित गौशालाओं में सुरक्षित रूप से भेजा जाना सुनिश्चित किया जाए। यह कदम सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और राजमार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों की सुरक्षा को पूरी तरह से सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
हाई कोर्ट को निगरानी की जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी उच्च न्यायालयों को भी इस मामले में अपनी जिम्मेदारी निभाने और कड़ी निगरानी रखने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि देश के सभी हाई कोर्ट इन आदेशों का अपने-अपने राज्यों में पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित करवाएं। जो भी प्रशासनिक अधिकारी इन आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ अवमानना समेत हर जरूरी और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, जिन खतरनाक कुत्तों का इलाज संभव नहीं है और जो समाज के लिए खतरा हैं, उन्हें यूथेनेशिया देने की भी अनुमति दी गई है। शीर्ष अदालत का यह कड़ा फैसला जनता के जीवन को सुरक्षित बनाने और प्रशासन को उसकी जवाबदेही का एहसास कराने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।





































