दूरदर्शन का स्वर्ण युग और ‘श्री कृष्णा’ की कालजयी सफलता
90 के दशक में भारतीय टेलीविजन के इतिहास में दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले रामानंद सागर के पौराणिक धारावाहिक ‘श्री कृष्णा’ ने सफलता के ऐसे नए और अभूतपूर्व आयाम छुए थे, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है। ‘रामायण’ की अपार और ऐतिहासिक लोकप्रियता के बाद जब सागर साहब ने भगवान विष्णु के पूर्ण अवतार श्रीकृष्ण की लीलाओं को पर्दे पर उतारने का फैसला किया, तो देश का हर एक नागरिक टेलीविजन स्क्रीन के सामने मंत्रमुग्ध होकर बैठ गया। इस धारावाहिक की सबसे बड़ी और अनूठी खासियत यह थी कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर उनके जीवन के अलग-अलग पड़ावों को पूरी प्रामाणिकता के साथ दर्शाने के लिए छह अलग-अलग कुशल अभिनेताओं को चुना गया था। इनमें युवा कृष्ण के रूप में स्वप्निल जोशी और व्यस्क कृष्ण के रूप में सर्वदमन डी. बनर्जी के दिव्य चेहरे आज भी करोड़ों लोगों के जेहन में पूरी तरह ताजा हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यमुना नदी में भयंकर कालिया नाग का घमंड चूर करने वाले तेजस्वी ‘बाल कृष्ण’ का किरदार निभाने वाले नन्हे कलाकार आज साउथ फिल्म इंडस्ट्री के एक बेहद जाने-माने और स्थापित अभिनेता हैं? जी हां, हम यहाँ बात कर रहे हैं बहुमुखी प्रतिभा के धनी अभिनेता अशोक कुमार बालकृष्णन की, जिनकी मासूमियत ने पूरे देश का दिल जीत लिया था।
महज 13 साल की उम्र में निभाया ऐतिहासिक किरदार और घर-घर में हुए लोकप्रिय
अशोक कुमार बालकृष्णन ने जब इस ऐतिहासिक और धार्मिक धारावाहिक के सेट पर कदम रखा, तब वे अपनी किशोरावस्था की दहलीज पर खड़े थे। केवल 13 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने भगवान कृष्ण के बाल और युवा रूप के इस अत्यंत कठिन व संवेदनशील किरदार को पर्दे पर इतनी खूबसूरती और संजीदगी से जिया कि वे रातों-रात भारत के हर घर-घर में बेहद लोकप्रिय हो गए। उनके चेहरे के दिव्य तेज, बड़ी-बड़ी मासूम आँखों और मधुर मुस्कान ने दर्शकों को इस कदर सम्मोहित कर दिया था कि लोग सचमुच उन्हें ही साक्षात बाल कृष्ण मानने लगे थे। अपने उन पुराने सुनहरे दिनों को याद करते हुए अशोक ने हाल ही में दिए गए एक भावुक साक्षात्कार में कहा था कि वे आज अपने जीवन में जिस भी मुकाम पर हैं, वह सब ईश्वर की ही असीम कृपा और आशीर्वाद का परिणाम है। उन्हें साक्षात भगवान कृष्ण का रूप धरने और उनकी लीलाओं को पर्दे पर जीने का जो अलौकिक सौभाग्य मिला, वह उनके पूरे जीवन का सबसे बड़ा वरदान और पूंजी है।
इस्कॉन मंदिर की नृत्य प्रस्तुति और किस्मत का अनोखा कनेक्शन
अशोक कुमार बालकृष्णन को इस धारावाहिक में ‘बाल कृष्ण’ का मुख्य रोल मिलने की कहानी किसी दिलचस्प फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जहाँ किस्मत ने रातों-रात उनका जीवन बदल दिया था। दरअसल, अशोक बचपन से ही शास्त्रीय नृत्य में अत्यधिक रुचि रखते थे और वे भरतनाट्यम नृत्य विधा में पूरी तरह पारंगत थे। एक बार मुंबई के जुहू इलाके में स्थित प्रसिद्ध हरे-कृष्णा इस्कॉन मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर उनकी भरतनाट्यम की एक बेहद भव्य और शानदार प्रस्तुति चल रही थी। उन्हीं दिनों महान निर्देशक रामानंद सागर श्रीकृष्ण के बाल्यकाल और उनकी किशोर अवस्था के रोल के लिए एक ऐसे नए चेहरे की सरगर्मी से तलाश कर रहे थे, जिसके नैन-नक्श अत्यधिक आकर्षक हों और जिसे भारतीय शास्त्रीय नृत्य व मुद्राओं की भी गहरी समझ हो। इस्कॉन मंदिर के उस नृत्य कार्यक्रम के दौरान दर्शकों के बीच रामानंद सागर के एक बेहद करीबी सहयोगी भी मौजूद थे, जो अशोक के अद्भुत नृत्य और हाव-भाव से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कार्यक्रम खत्म होते ही तुरंत अशोक की मां से संपर्क किया और उन्हें ऑडिशन के लिए सागर स्टूडियो भेजने का विशेष आग्रह किया।
800 बच्चों को पछाड़कर हासिल किया मुकाम: जब ऑडिशन देखकर सहम गए थे अशोक
जब 13 साल के अशोक अपनी मां के साथ रामानंद सागर के स्टूडियो ऑडिशन देने पहुँचे, तो वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई और वे पूरी तरह दंग रह गए। उस एक बाल कृष्ण के रोल के लिए देश के कोने-कोने से लगभग 700 से 800 प्रतिभावान और खूबसूरत बच्चे चमकीली पोशाक पहने कतार में अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। इतने बड़े स्तर पर कड़ा मुकाबला और प्रतियोगिता देखकर 13 साल के मासूम अशोक एक पल के लिए बहुत ज्यादा सहम गए थे और उनका हौसला डगमगाने लगा था। खासकर जब उन्होंने भारतीय सिनेमा के महान निर्देशक रामानंद सागर को साक्षात अपने सामने कुर्सी पर बैठे देखा, तो उनके बाल मन में थोड़ा डर और हिचकिचाहट बैठ गई थी कि इस भीड़ में उनका चयन होना लगभग असंभव है।
रामानंद सागर की पारखी नजर: बिना किसी कड़े एक्टिंग टेस्ट के हुआ चयन
हालांकि, ऑडिशन रूम के भीतर कदम रखते ही महान निर्देशक रामानंद सागर के बेहद सरल, मिलनसार और स्नेही स्वभाव ने नन्हे अशोक को जल्द ही पूरी तरह से सहज और शांत कर दिया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि सागर साहब ने अशोक का कोई कड़ा एक्टिंग टेस्ट, डायलॉग डिलीवरी का ऑडिशन या स्क्रीन टेस्ट नहीं लिया, जैसा कि आमतौर पर बड़े प्रोजेक्ट्स में किया जाता है। इसके बजाय, उन्होंने अशोक को अपने पास बिठाया और बहुत ही प्यार से उनकी पढ़ाई-लिखाई, स्कूल के दोस्तों, उनके शौक और भरतनाट्यम के प्रति उनके लगाव के बारे में बेहद सामान्य बातचीत की। इस अनौपचारिक बातचीत के दौरान अशोक के सरल, निश्छल जवाबों और उनके चेहरे पर झलकने वाली सौम्यता व सादगी को देखकर पारखी नजरों वाले निर्देशक रामानंद सागर ने पल भर में यह पहचान लिया कि यही बच्चा उनके धारावाहिक का ‘कृष्ण’ है; और उन्होंने तुरंत बिना किसी संकोच के अशोक को इस ऐतिहासिक रोल के लिए फाइनल कर लिया।
आज साउथ सिनेमा के बड़े स्टार हैं अशोक बालकृष्णन: अभिनय यात्रा का नया आयाम
रामानंद सागर के इस धारावाहिक से मिली अपार सफलता ने अशोक कुमार बालकृष्णन के लिए अभिनय की दुनिया के बड़े दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिए। ‘श्री कृष्णा’ धारावाहिक के समाप्त होने के बाद, उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और थियेटर व कला के क्षेत्र से लगातार जुड़े रहे। अपनी बेहतरीन अभिनय क्षमता और कड़े परिश्रम के बल पर आज वे साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री (विशेषकर तमिल और मलयालम सिनेमा) के एक बेहद सम्मानित, जाने-माने और व्यस्त अभिनेताओं में शुमार किए जाते हैं। उन्होंने कई गंभीर फिल्मों और वेब सीरीज में मुख्य व चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं निभाकर आलोचकों से लेकर दर्शकों तक की खूब वाहवाही बटोरी है। आज भी जब कभी भारतीय टेलीविजन के इतिहास और भगवान कृष्ण के किरदारों की चर्चा होती है, तो अशोक कुमार बालकृष्णन का नाम श्रद्धा और सम्मान के साथ शीर्ष पर लिया जाता है, क्योंकि उन्होंने केवल अभिनय नहीं किया था, बल्कि पर्दे पर भक्ति रस की गंगा बहाई थी।





































