असम राज्य से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और बेहद सनसनीखेज प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। असम में सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक विभाग की टीम ने गुरुवार को गुवाहाटी शहर में एक बड़ी और औचक कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत असम सिविल सेवा के एक बहुत ही वरिष्ठ अधिकारी को कानून का उल्लंघन करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए अधिकारी पर अपने पद का गलत इस्तेमाल कर अवैध रूप से पैसे वसूलने का अत्यंत गंभीर आरोप लगा है। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद से असम के पूरे सिविल सेवा गलियारे में भारी हड़कंप और तनाव का माहौल देखा जा रहा है।
एडिशनल डायरेक्टर लाचित कुमार दास
सतर्कता विभाग द्वारा गिरफ्तार किए गए इस हाई-प्रोफाइल सरकारी अधिकारी का नाम लाचित कुमार दास बताया गया है। वह राज्य सरकार के अंतर्गत आने वाले भूमि अभिलेख विभाग में एडिशनल डायरेक्टर के अत्यंत प्रभावशाली पद पर तैनात थे। लाचित कुमार दास के पास विभाग के कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों और जमीन से जुड़े मामलों को मंजूरी देने का अधिकार था। लेकिन उन्होंने अपनी इस सरकारी शक्ति का इस्तेमाल निजी स्वार्थ और अवैध कमाई के लिए करना शुरू कर दिया था। विजिलेंस विभाग की इस कार्रवाई ने सरकारी महकमे में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों को एक बहुत ही कड़ा संदेश दिया है।
जमीन की एनओसी के लिए सौदा
भ्रष्टाचार का यह पूरा मामला जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़ी एक आवश्यक अनुमति से पूरी तरह संबंधित है। विजिलेंस अधिकारियों के मुताबिक विभाग को कुछ दिनों पहले एक पीड़ित नागरिक द्वारा एक बेहद गंभीर लिखित शिकायत प्राप्त हुई थी। इस शिकायत में पीड़ित ने आरोप लगाया था कि भूमि अभिलेख विभाग के एडिशनल डायरेक्टर उसका एक जायज काम रोक रहे थे। अधिकारी ने जमीन की बिक्री अनुमति यानी कि एनओसी जारी करने के बदले में अवैध रूप से पैसों की मांग की थी। आरोपी लाचित कुमार दास ने इस फाइल को आगे बढ़ाने के लिए कुल 1 लाख रुपये की घूस मांगी थी।
रूपनगर निदेशालय में ट्रैप ऑपरेशन
शिकायतकर्ता एक ईमानदार नागरिक था जिसने भ्रष्ट अधिकारी को घूस की रकम देने से साफ तौर पर मना कर दिया था। उसने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का फैसला किया और सीधे सतर्कता व भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के दफ्तर जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। सतर्कता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने तुरंत मामले को संज्ञान में लेते हुए प्राथमिक जांच की और आरोपों को सही पाया। इसके बाद अधिकारियों ने 21 मई यानी कि गुरुवार के दिन को इस भ्रष्ट अधिकारी को पकड़ने के लिए चुना। विजिलेंस की टीम ने गुवाहाटी के रूपनगर इलाके में स्थित भूमि अभिलेख निदेशालय के भीतर अपना विशेष जाल बिछा दिया।
कार्यालय के भीतर हुई गिरफ्तारी
चयनित रणनीति के तहत सतर्कता विभाग की टीम ने निदेशालय के भीतर इस पूरे ट्रैप ऑपरेशन को बेहद सफतापूर्वक अंजाम दिया। विजिलेंस के जांबाज अधिकारियों ने आरोपी अधिकारी लाचित कुमार दास को उसके खुद के शासकीय कार्यालय के कमरे में ही दबोच लिया। जब टीम ने धावा बोला तब आरोपी अधिकारी शिकायतकर्ता से घूस के रूप में 45000 रुपये की नकद राशि स्वीकार कर रहा था। अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि यह बरामद रकम शिकायतकर्ता से मांगी गई कुल 1 लाख रुपये की रिश्वत की पहली किस्त थी। रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद आरोपी अधिकारी के पास बचने या अपनी बेगुनाही साबित करने का कोई रास्ता नहीं बचा था।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस
सफल छापेमारी के तुरंत बाद रिश्वत की पूरी नकद राशि को स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में पंचनामा बनाकर कानूनी रूप से जब्त कर लिया गया। इस पूरे घूसखोरी के मामले में कार्रवाई करते हुए 21 मई को एसीबी पुलिस स्टेशन में एक आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया है। यह केस मुख्य रूप से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 संशोधित) की सख्त धारा 7(a) के तहत दर्ज किया गया है। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के खिलाफ मौके पर ही पर्याप्त और अचूक सबूत मिल गए थे, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया। सतर्कता विभाग ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की गहन कानूनी जांच जारी रहेगी और भ्रष्टाचार पर सख्त रुख बरकरार रहेगा।





































