रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध लगातार अधिक विनाशकारी होता जा रहा है। इसी क्रम में रूस ने यूक्रेन के खिलाफ बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया, जिसे एक दिन पहले यूक्रेन की ओर से रूस पर किए गए हमले की जवाबी कार्रवाई माना जा रहा है। मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव सहित करीब एक दर्जन क्षेत्रों को निशाना बनाया। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक इस हमले में चार बच्चों समेत कम से कम 24 नागरिक मारे गए, जबकि करीब 60 लोग घायल हुए हैं। हमले की चपेट में औद्योगिक प्रतिष्ठानों के साथ रिहायशी क्षेत्र भी आए और कई जगहों पर विस्फोट के बाद आग लग गई। भारी हमले के कारण कई इलाकों में तबाही का दृश्य देखने को मिला और स्थानीय प्रशासन के सामने राहत तथा बचाव की चुनौती पैदा हो गई।
650 ड्रोन के हमले का लिया बदला: रूस की ओर से किए गए हमले से ठीक एक दिन पहले यूक्रेन ने मॉस्को और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया था। यूक्रेनी सेना ने करीब 650 विस्फोटक ड्रोन दागे थे। इस हमले से मॉस्को के आसपास के क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ और राजधानी से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित मॉस्को क्षेत्र के एक बड़े तेल भंडार केंद्र के तबाह होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद रूस की ओर से जवाबी कार्रवाई शुरू हुई और यूक्रेन के विभिन्न इलाकों पर बड़ी संख्या में मिसाइल और ड्रोन दागे गए। रूसी हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई शहरों में औद्योगिक इकाइयों, इमारतों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचे को नुकसान पहुंचा। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच जारी हमलों और जवाबी हमलों के और तेज होने का संकेत दिया है।
निप्रो से कीव तक सुनाई दिए धमाके: रूस के हमले में यूक्रेन के औद्योगिक शहर निप्रो को भी निशाना बनाया गया। शहर में मिसाइलें गिरने के बाद जोरदार धमाके हुए और कई इलाकों में आग लग गई। हमले के कारण एक प्रमुख औद्योगिक इकाई क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि आसपास मौजूद कई इमारतों को भी भारी नुकसान पहुंचा। राजधानी कीव में भी बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। इसके अलावा पोल्टावा, निप्रॉपेट्रोस, खार्किव और चेर्निहाइव समेत कई क्षेत्रों में विस्फोटों की सूचना सामने आई। अनेक स्थानों पर हमले के बाद आग फैल गई और बड़ी इमारतों को नुकसान पहुंचा। लगातार कई क्षेत्रों को निशाना बनाए जाने से यूक्रेन के नागरिक इलाकों और औद्योगिक ढांचे पर युद्ध का दबाव और बढ़ गया है।
भारी संख्या में मिसाइल और ड्रोन दागे: यूक्रेनी वायुसेना के अनुसार रूस ने हमले के दौरान 130 ड्रोन और 48 क्रूज तथा बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया। यूक्रेन का दावा है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने कुल 161 हवाई लक्ष्यों को मार गिराया। इसके बावजूद कई मिसाइल और ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंच गए और अलग-अलग शहरों में नुकसान हुआ। यूक्रेन को रूस के संभावित बड़े हमले की जानकारी पहले ही मिल गई थी। खुफिया जानकारी के आधार पर राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने एक दिन पहले ही नागरिकों को रूस की ओर से होने वाले बड़े हमले को लेकर चेतावनी दी थी। हालांकि चेतावनी मिलने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में हवाई लक्ष्यों के कारण यूक्रेन की वायु रक्षा के लिए सभी हमलों को रोकना संभव नहीं हो सका।
गेरान-5 से वायु रक्षा के सामने नई मुश्किल: रूस के नए जेट चालित गेरान ड्रोन यूक्रेन के लिए एक नई चुनौती बनकर सामने आए हैं। गेरान-5 को जेट इंजन से चलने वाला आत्मघाती ड्रोन बताया गया है, जिसे कम लागत वाली क्रूज मिसाइल की तरह इस्तेमाल करने के लिए विकसित किया गया है। इसमें टर्बोजेट इंजन लगा है और यह करीब 450 से 600 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ सकता है। पुराने पिस्टन इंजन वाले शाहेद प्रकार के ड्रोन की तुलना में इसकी गति करीब तीन गुना बताई गई है। इसकी मारक सीमा लगभग 950 से 1,000 किलोमीटर तक है और यह करीब 90 किलोग्राम विस्फोटक ले जाने में सक्षम है। यह 5,000 से 6,000 मीटर की अधिकतम ऊंचाई तक उड़ सकता है। रूस द्वारा हर महीने बड़ी संख्या में नए जेट चालित ड्रोन इस्तेमाल किए जाने से यूक्रेन की वायु रक्षा पर लगातार दबाव बढ़ रहा है और इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी भी गंभीर चुनौती बन गई है।
ऊर्जा ढांचे पर हमले से बढ़ी चिंता: यूक्रेन की राजधानी कीव में हुए हमले को लेकर राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने मुख्य रूप से देश के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया। राजधानी में जेट चालित गेरान ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों के हमलों से रिहायशी इमारतों के साथ कई औद्योगिक इकाइयां भी प्रभावित हुईं। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक चार बच्चों समेत कम से कम 24 आम नागरिकों की मौत और करीब 60 लोगों के घायल होने से हमले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। रूस और यूक्रेन के बीच लगातार बढ़ते हमलों में अब औद्योगिक ढांचे, ऊर्जा प्रतिष्ठान और आबादी वाले क्षेत्र एक साथ निशाने पर आ रहे हैं। ऐसे में यह संघर्ष दोनों देशों के लिए मानवीय नुकसान के साथ-साथ महत्वपूर्ण ढांचे पर बढ़ते खतरे का रूप लेता जा रहा है।
















































