अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण जंग को छह महीने का लंबा समय पूरा हो चुका है। दोनों देशों के बीच लगातार हो रही कूटनीतिक बातचीत किसी भी तार्किक नतीजे पर नहीं पहुंच पा रही है। इसी के चलते ट्रम्प प्रशासन ने ईरान को आर्थिक रूप से पंगु बनाने के लिए अपनी कोशिशें अत्यधिक तेज कर दी हैं। अमेरिकी सरकार ने ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे इस अभियान को इकोनॉमिक D-Day नाम दिया है। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान की वित्तीय घेराबंदी करके उस पर अधिकतम दबाव बनाना है।
Banque Misr और UAE शाखाएं: अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने तेहरान संग बिजनेस करने के आरोप में मिस्र के प्रमुख बैंक मिस्र पर सख्त प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। इसके अतिरिक्त अमेरिकी अधिकारियों ने एक ऐसा कठोर नियम भी प्रस्तावित किया है जिसके लागू होने से संयुक्त अरब अमीरात में स्थित इस बैंक की शाखाएं अब अमेरिकी डॉलर में किसी भी तरह का लेन-देन नहीं कर सकेंगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मिस्र के सेंट्रल बैंक ने कहा है कि वह और मिस्र का विदेश मंत्रालय इस मामले को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के साथ सीधे संपर्क बनाए हुए हैं।
Bank Melli पर नई कार्रवाई: अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित एक नोटिस के मुताबिक अधिकारियों ने अलग से एक और बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। अमेरिका ने हांगकांग की एक व्यावसायिक कंपनी और ईरान के प्रसिद्ध बैंक मेली से संबंध रखने वाले एक व्यक्ति पर नए प्रतिबंध जड़ दिए हैं। अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे प्रतिबंधों का यह नया दौर ईरान की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर युद्ध के घातक प्रभावों को और अधिक बढ़ा रहा है। लगातार बढ़ते प्रतिबंधों के कारण पिछले महीने ईरान में वार्षिक आधार पर महंगाई दर 66% के आंकड़े तक पहुंच गई।
Mujtaba Khamenei का सख्त निर्देश: देश की आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई ने सरकार को इन गंभीर मुश्किलों को जल्द दूर करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। सुप्रीम लीडर खामेनेई के नाम से जारी लिखित बयान में कहा गया कि महंगाई, बेरोजगारी, वस्तुओं की कीमतों के उचित प्रबंधन तथा सामान व सेवाओं के बाजार जैसी आर्थिक चुनौतियों से सरकार को पूरी गंभीरता के साथ निपटना होगा। देश की आवाम की रोजी-रोटी से जुड़े इन ज्वलंत मुद्दों का समाधान करना ईरान सरकार के लिए अत्यंत आवश्यक हो गया है।
Masoud Pezeshkian का बयान: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने देश के सरकारी मीडिया को बताया कि कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी के कारण देश के कुल आयात और निर्यात में लगभग 35% की भारी गिरावट आई है। राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने यह भी बताया कि जून महीने में अमेरिका और ईरान के बीच बने एक अल्पकालिक समझौते के तहत ईरान करीब 90 मिलियन बैरल कच्चा तेल बेचने में कामयाब रहा था। वॉशिंगटन ने उस सीमित समय अवधि वाले समझौते के दौरान ईरान को तेल बेचने की इजाजत दी थी।
Tehran में कतरी PM की बैठक: अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलचलों के बीच कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने गुरुवार को तेहरान का महत्वपूर्ण दौरा किया। तेहरान में उन्होंने ईरान के शीर्ष राजनीतिक नेताओं के साथ कई अहम मुद्दों पर उच्चस्तरीय मुलाकात की। कतरी पीएम ने बातचीत के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते जहाजों की निर्बाध और सुरक्षित आवाजाही को युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापस लाने की आवश्यकता पर बल दिया। कतर इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग को सुचारू बनाने के लिए प्रयासरत है।















































