सनातन धर्म में पंचांग का अत्यधिक महत्व है। पंचांग के पांचों अंगों (नक्षत्र, तिथि, योग, करण और वार) के आधार पर ही किसी भी शुभ-अशुभ कार्य, नए काम की शुरुआत और दिनचर्या का विचार किया जाता है। 3 जून 2026 (बुधवार) को ज्येष्ठ मास, कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। आज के दिन भद्रा की छाया होने के बावजूद, अभिजीत मुहूर्त के साथ-साथ शुभ विजय मुहूर्त भी उपलब्ध रहेगा। आइए जानते हैं आज का विस्तृत पंचांग:
पुरुषोत्तम मास का धार्मिक महत्व
वर्तमान में भगवान श्री नारायण को अत्यंत प्रिय पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) चल रहा है, जिसका 18वां दिन बुधवार को है। इस पवित्र मास में भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा, जप, तप और दान-पुण्य का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान किए गए शुभ कर्मों का फल सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक प्राप्त होता है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा का गोचर काल
दिन की शुरुआत और संध्या वंदन के लिए सूर्य और चंद्रमा की स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण होती है:
- सूर्योदय: सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर
- सूर्यास्त: शाम 7 बजकर 15 मिनट पर
- चंद्रोदय: रात 10 बजकर 4 मिनट पर
- चंद्रास्त: अगले दिन (4 जून) सुबह 7 बजकर 21 मिनट पर
तिथि, नक्षत्र, योग और करण की सटीक जानकारी
- तिथि: तृतीया तिथि रात 9 बजकर 21 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी। (उदयातिथि की मान्यता के अनुसार पूरे दिन तृतीया तिथि का ही मान रहेगा)।
- नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र दोपहर 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, उसके उपरांत उत्तराषाढ़ा नक्षत्र लग जाएगा।
- योग: शुभ योग सुबह 8 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।
- करण: वणिज करण सुबह 8 बजकर 12 मिनट तक और उसके बाद विष्टि करण रात 9 बजकर 21 मिनट तक रहेगा।
पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ समय (शुभ मुहूर्त)
बुधवार के दिन मांगलिक और महत्वपूर्ण कार्यों को करने के लिए ये शुभ मुहूर्त सर्वोत्तम हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 2 मिनट से 4 बजकर 43 मिनट तक
- प्रातः सन्ध्या: सुबह 4 बजकर 22 मिनट से 5 बजकर 23 मिनट तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2 बजकर 38 मिनट से 3 बजकर 34 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 7 बजकर 14 मिनट से 7 बजकर 34 मिनट तक
- अमृत काल: शाम 7 बजकर 37 मिनट से रात 9 बजकर 24 मिनट तक
- निशिता मुहूर्त: रात 11 बजकर 59 मिनट से देर रात 12 बजकर 40 मिनट (4 जून) तक
इन अशुभ समय का रखें विशेष ध्यान (वर्जित समय)
शास्त्रों के अनुसार इन अशुभ समय में कोई भी नया या शुभ कार्य शुरू करने से बचना चाहिए:
- राहुकाल: दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से 2 बजकर 3 मिनट तक
- यमगण्ड: सुबह 7 बजकर 7 मिनट से 8 बजकर 51 मिनट तक
- गुलिक काल: सुबह 10 बजकर 35 मिनट से 12 बजकर 19 मिनट तक
- दुर्मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक
- भद्रा काल: सुबह 8 बजकर 12 मिनट से रात 9 बजकर 21 मिनट तक
बुधवार का विशेष महत्व और अचूक उपाय बुधवार का पावन दिन विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश को समर्पित है। इस दिन ज्येष्ठ मास की तृतीया तिथि का होना आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति के लिए विशेष रूप से शुभ माना गया है।
आज के दिन अपनी बुद्धि, वाणी और व्यापार में अपार सफलता पाने के लिए भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें और उन्हें हरी दूर्वा (दूब) अवश्य अर्पित करें। इसके साथ ही पुरुषोत्तम मास होने के कारण भगवान श्री हरि विष्णु के निमित्त कुछ दान-पुण्य जरूर करें; इससे घर की सभी नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है और सुख-समृद्धि का वास होता है। विशेष सलाह दी जाती है कि राहुकाल और भद्रा जैसे अशुभ समय के दौरान किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत न करें।





































