अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध: इस गोपनीय रिपोर्ट में चढ़ावे की गिनती करने वाली व्यवस्था और चढ़ावा निगरानी कमेटी की भारी लापरवाही का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। इस पूरे मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कई बड़े पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका प्रथम दृष्टया पूरी तरह संदिग्ध पाई गई है। इसके साथ ही मंदिर परिसर में अलग-अलग पदों पर कर्मचारियों की नियुक्तियों में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और नियमों की अनदेखी मिली है। एसआईटी की इस जांच रिपोर्ट में भविष्य में ट्रस्ट के काम को पारदर्शी और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्षों के भीतर ही मंदिर के कई कर्मचारियों की निजी संपत्ति और आमदनी में कई गुना की तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
गोपनीय जांच रिपोर्ट: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश शासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने अपनी पहली रिपोर्ट सौंप दी है। इस हाई प्रोफाइल मामले की जांच कर रही विशेष टीम ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंप दी है। इस रिपोर्ट के सौंपे जाने के बाद यह माना जा रहा है कि जल्द ही इस पूरे मामले में कोई बहुत बड़ा खुलासा हो सकता है। हालांकि इस बेहद गोपनीय रिपोर्ट के अंदर वास्तविक रूप से क्या लिखा है, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी बाहर नहीं आ सकी है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शासन स्तर पर इस पूरी रिपोर्ट को पूरी तरह से गुप्त रखा जा रहा है।
सदस्य का आधिकारिक बयान: इस पूरे मामले पर महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए एसआईटी टीम के वरिष्ठ सदस्य विजय विश्वास पंत ने मीडिया के सामने संक्षिप्त बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आज हमने अयोध्या मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव को पूरी तरह से सौंप दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक प्रारंभिक प्रतिवेदन है और उसी तय प्रक्रिया के क्रम में आज यह रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई है। विजय विश्वास पंत ने आगे कहा कि चूंकि यह एक पूरी तरह से गोपनीय जांच है, इसलिए अभी हम इस पर कुछ भी बोलने के लिए अधिकृत नहीं हैं। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान जो भी हमारी मुख्य फाइंडिंग्स और विसंगतियां थीं, वह हमने उच्चाधिकारियों को उपलब्ध करा दी हैं।
मुख्यमंत्री का सख्त निर्देश: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का यह गंभीर प्रकरण सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तुरंत एक्शन में आ गए थे। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष एसआईटी का गठन करने का आदेश दिया था। इस जांच टीम में राज्य के तीन बड़े और बेहद अनुभवी आईपीएस अधिकारियों को शामिल कर पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सीएम योगी ने इस टीम को हर हाल में एक हफ्ते के अंदर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के सख्त निर्देश जारी किए थे। इसके साथ ही एसआईटी को 15 दिन के भीतर अपनी फाइनल और विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपनी है।
संदेह के घेरे में कर्मचारी: इसी कड़े निर्देश के क्रम में आज एसआईटी की टीम ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपने का काम पूरा कर लिया है। यह पूरी तरह से माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर आने वाले समय में कुछ बहुत बड़े एक्शन देखने को मिल सकते हैं। इस पूरे चोरी के मामले में मंदिर का चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों और ट्रस्ट के कुछ लोगों की भूमिका संदेह के घेरे में है। इनके साथ ही भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर उंगलियां उठाई जा रही हैं। हालांकि इस अंतरिम रिपोर्ट में किन-किन विशेष लोगों को मुख्य रूप से जिम्मेदार बताया गया है, उसके नाम अभी सामने नहीं आए हैं।
चोरी का अनोखा तरीका: आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी के इस सनसनीखेज मामले में कुछ सीसीटीवी फुटेज भी सोशल मीडिया और जांच टीम के सामने आए हैं। इन पुख्ता सीसीटीवी फुटेज के सामने आने के बाद ही मंदिर के भीतर बड़े पैमाने पर हो रही चोरी की बात खुलकर दुनिया के सामने आई है। फुटेज के आधार पर यह गंभीर दावा किया जा रहा है कि नोट गिनते वक्त कुछ चालाक कर्मचारियों ने चढ़ावे से भारी रकम गायब की थी। यही नहीं, इन चोरी किए गए पैसों को सुरक्षित रूप से बाहर ले जाने के लिए कर्मचारियों द्वारा बाथरूम के रास्ते का इस्तेमाल किया जाता था। पैसों की गिनती करने के लिए बने सुरक्षा प्रोटोकॉल में भी जांच के दौरान कई गंभीर खामियां और कमियां पाई गई हैं।
सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही: जांच में यह भी सामने आया है कि पैसों की गिनती करने की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्मचारी अक्सर अपनी निर्धारित आधिकारिक ड्रेस में नहीं आते थे। इसके अलावा काम खत्म करके जब ये कर्मचारी परिसर से बाहर जाते थे, तब उनकी सुरक्षा चेकिंग में भी भारी लापरवाही बरतने की बातें कही जा रही हैं। एसआईटी को अपनी जांच के दौरान यह भी पता चला है कि कुल चढ़ावा कितना आया और वह किस स्रोत से आया, इसका कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए तकनीकी रूप से चढ़ावा चोरी हुआ और वह कितना चोरी हुआ, यह पुख्ता सबूतों के साथ बता पाना अभी संभव नहीं है। क्योंकि मंदिर प्रशासन के पास प्रत्येक श्रद्धालु द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे का कोई निश्चित लिखित हिसाब मौजूद नहीं मिला है।





































