सूत्रों की मानें तो राम मंदिर चढ़ावा चोरी के इस बड़े मामले में एसआईटी के रडार पर कई नए नाम शामिल हैं। इनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का नाम संदिग्धों की सूची में सबसे ऊपर और प्रमुखता से चल रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि टिन्नू यादव के पास ही राम मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन की पूरी और मुख्य जिम्मेदारी थी। उसी की देखरेख में दान का सारा पैसा एकत्रित किया जाता था और बैंक भेजने की आगे की प्रक्रिया होती थी। जांच एजेंसी इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि उसकी जिम्मेदारी के दौरान यह गड़बड़ी कैसे हुई।
फूलकांत मिश्रा की भूमिका: टिन्नू के अलावा इस बीच मंदिर के प्रबंधन से जुड़े एक और अहम शख्स का नाम सामने आया है और ये नाम फूलकांत मिश्रा है। मिली जानकारी के अनुसार फूलकांत मिश्रा के पास राम मंदिर के बेशकीमती आभूषणों की देखभाल और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी थी। वह भी टिन्नू यादव की तरह ही ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का काफी करीबी व्यक्ति बताया जाता है। मंदिर परिसर में जहां पर बिना ट्रस्ट की खास परमिशन के कोई बाहरी व्यक्ति नहीं जा सकता है, वहां पर फूलकांत की सीधी पहुंच थी। उसकी इस विशेष पहुंच और जिम्मेदारी के कारण ही एसआईटी उसे प्रमुख संदिग्ध मानकर अपनी जांच आगे बढ़ा रही है।
संदिग्ध की संपत्ति पर सवाल: फूलकांत मिश्रा कुछ साल पहले तक अयोध्या में एक छोटी सी दुकान में सामान्य रूप से रत्न और नग बेचा करता था। उस दौरान वह एक साधारण व्यक्ति की तरह लोगों का भविष्य बताता था और अपना सामान्य जीवन यापन करता था। लेकिन आज की तारीख में उसके पास चार-चार बड़ी गाड़ियां मौजूद हैं और उसका रहन-सहन पूरी तरह बदल चुका है। वर्तमान में अयोध्या के सबसे पॉश इलाके में उसका अपना एक बहुत बड़ा और आलीशान बंगला भी बन चुका है। इस अचानक और अप्रत्याशित रूप से बढ़ी हुई अकूत संपत्ति ने भी जांच एजेंसियों के कान पूरी तरह से खड़े कर दिए हैं।
परिवार के विरोधाभासी दावे: बताया जा रहा है कि फूलकांत मिश्रा के भाई साकेत मिश्रा रेलवे स्टेशन के पास साकेत रत्न के नाम से अपनी दुकान चलाते हैं। परिवार का दावा है कि वे अपनी इस दुकान से हर साल करोड़ों रुपयों का टर्नओवर बहुत आसानी से करते हैं। भाई साकेत ने दावा किया कि फूलकांत राम मंदिर के अंदर नहीं जाता है, जबकि उसकी मंदिर के अंदर की तस्वीरें पहले से ही मौजूद हैं। भाई ने यह भी कहा कि उनकी गाड़ियों का राम मंदिर से कोई संबंध नहीं है, लेकिन भतीजे का दावा है कि गाड़ियां मंदिर में ही चलती हैं। परिवार कहता है कि मंदिर प्रबंधन में उसका कोई दखल नहीं है, लेकिन खुलासों के मुताबिक वह दान दक्षिणा मैनेजमेंट में पूरी तरह शामिल है।
सोमेश आनंद पर भी शक: फूलकांत मिश्रा और टिन्नू यादव के अलावा एसआईटी की रडार पर मंदिर का एक और कर्मचारी सोमेश आनंद भी आ गया है। सोमेश आनंद इस वक्त राम मंदिर परिसर में स्थित यात्री सेवा केंद्र में अपनी नियमित ड्यूटी पर तैनात है। सोमेश पर यह अत्यंत गंभीर आरोप लगा है कि वह मंदिर के चंदे के पैसे लेकर वहां से फरार हो गया है। हालांकि मीडिया चैनल से बात करते हुए सोमेश आनंद ने दावा किया कि वो फरार नहीं है बल्कि अयोध्या में ही मौजूद है। उसने यह भी स्पष्ट किया है कि गोपाल राव जी से उसकी कोई भी रिश्तेदारी या पारिवारिक संबंध बिल्कुल नहीं है।
आगे की जांच और बयान: सोमेश आनंद ने मीडिया को यह भी बताया है कि वह अभी इस मामले पर कुछ भी विशेष नहीं कहना चाहता है। उसने कहा है कि वो एसआईटी की जांच पूरी होने के बाद ही विस्तार से इस गंभीर मुद्दे पर बोलेगा। सोमेश ने दावा किया है कि एसआईटी की जांच पूरी तरह से खत्म होने के बाद वह खुद सबके सामने आकर अपनी बात रखेगा। इस बीच एसआईटी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर पच्चीस अन्य संदिग्धों की कुंडली खंगालने में पूरी तरह से जुटी हुई है। पंद्रह दिन बाद आने वाली अंतिम रिपोर्ट के बाद ही इन सभी संदिग्धों के खिलाफ ठोस और सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।





































