सनातन धर्म में ‘अधिकमास’ (जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है) का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह पूरा महीना जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित होता है। इस पवित्र अवधि में श्रद्धालु व्रत, स्नान, दान और पूजा-पाठ कर ईश्वरीय कृपा प्राप्त करते हैं। लेकिन, भागदौड़ भरी जिंदगी या स्वास्थ्य कारणों से यदि आप पूरे महीने व्रत या विशेष पूजा नहीं कर पाए हैं, तो आपको निराश होने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है।
शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, अधिकमास के अंतिम 5 दिन अत्यंत चमत्कारी और फलदायी माने जाते हैं। इन बचे हुए दिनों में यदि सच्ची श्रद्धा और नियमों के साथ भगवान विष्णु की आराधना की जाए, तो जीवन के सभी कष्टों का स्वतः ही अंत हो जाता है। घर में सकारात्मक ऊर्जा, धन और सुख-समृद्धि का स्थायी वास होता है।
आइए विस्तार से जानते हैं उन 5 विशेष और सरल उपायों के बारे में, जिन्हें अधिकमास के अंतिम पांच दिनों में करने से आपको अनंत पुण्यों की प्राप्ति हो सकती है:
अधिकमास के अंतिम 5 दिनों के लिए चमत्कारी उपाय
1. दीपदान से करें नकारात्मकता का नाश हिंदू धर्म में दीपदान का बहुत बड़ा महत्व माना गया है। इन अंतिम 5 दिनों में सूर्यास्त के बाद अपने घर के मुख्य द्वार पर गाय के शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक अवश्य प्रज्वलित करें। इसके साथ ही, एक दीपक घर के आंगन में स्थित तुलसी के पौधे के समक्ष भी लगाएं।
- लाभ: मान्यता है कि यह उपाय घर से हर प्रकार की दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है तथा माता लक्ष्मी के शुभ आगमन का मार्ग प्रशस्त करता है।
2. श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त उपासना इन शेष दिनों में प्रतिदिन प्रातः काल स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी की एक साथ विधि-विधान से पूजा करें। उन्हें पीले पुष्प, अक्षत, केसर और तुलसी दल अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ महामंत्र का कम से कम एक माला (108 बार) स्पष्ट उच्चारण के साथ जाप करें।
- लाभ: श्री हरि और मां लक्ष्मी की संयुक्त पूजा से जीवन में कभी भी धन-धान्य और भौतिक सुखों की कमी नहीं होती है तथा व्यापार व नौकरी में उन्नति होती है।
3. पीले रंग की वस्तुओं का महादान शास्त्रों में अधिकमास के दौरान किए गए दान का विशेष और कई गुना पुण्य बताया गया है। इन 5 दिनों में किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को पीले रंग की वस्तुओं का दान करें। आप अपनी सामर्थ्य अनुसार पीले वस्त्र, चने की दाल, केले, सत्तू या पीले मिष्ठान का दान कर सकते हैं।
- लाभ: पीली वस्तुओं का दान करने से जाने-अनजाने में हुए पापों का नाश होता है। साथ ही, यह उपाय कुंडली में मौजूद ‘पितृ दोष’ और गुरु ग्रह के अशुभ प्रभावों से भी मुक्ति दिलाता है।
4. तुलसी युक्त पंचामृत का भोग भगवान विष्णु को पंचामृत अत्यंत प्रिय है। इन पांच दिनों में नियमित रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का पवित्र मिश्रण) का भोग लगाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि नारायण के भोग में ‘तुलसी दल’ (तुलसी के पत्ते) का होना अनिवार्य है, क्योंकि बिना तुलसी के वे भोग स्वीकार नहीं करते।
- लाभ: इस पवित्र भोग को प्रसाद स्वरूप परिवार के सभी सदस्यों में बांटने से घर के कलह-क्लेश दूर होते हैं, मानसिक शांति मिलती है और पारिवारिक प्रेम में वृद्धि होती है।
5. श्री विष्णु सहस्रनाम का चमत्कारी पाठ अधिकमास के अंतिम दिनों में ‘विष्णु सहस्रनाम’ (भगवान विष्णु के 1000 नामों) का पाठ करना अमृत के समान फलदायी माना गया है। यदि समयाभाव के कारण आपके लिए प्रतिदिन यह पाठ करना संभव न हो, तो इन 5 दिनों में से कम से कम किसी 1 दिन इसका पूर्ण श्रद्धा से पाठ अवश्य करें या श्रवण करें।
- लाभ: इस दिव्य पाठ के प्रभाव से भगवान नारायण की असीम कृपा प्राप्त होती है, मन को असीम शांति मिलती है और जीवन के बड़े से बड़े संकट व व्याधियां टल जाती हैं।
निष्कर्ष: अधिकमास का यह अंतिम चरण ईश्वर के करीब जाने और अपने जीवन की बाधाओं को दूर करने का एक स्वर्णिम अवसर है। सच्ची निष्ठा और पवित्र मन से किए गए ये 5 सरल उपाय न केवल आपके लौकिक जीवन को सुखमय और समृद्ध बनाएंगे, बल्कि आपकी आध्यात्मिक उन्नति का भी मार्ग प्रशस्त करेंगे।





































