उत्तर प्रदेश सरकार में हुए हालिया विभागीय फेरबदल ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह से गरमा दिया है। कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी से यूपीडा विभाग वापस लिए जाने के इस बड़े फैसले पर अब विपक्ष हमलावर हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष पर अपना सीधा और तीखा निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए अपनी सख्त प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अखिलेश यादव के इस बयान के बाद दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग काफी ज्यादा तेज हो गई है।
भ्रष्टाचार का लगाया गंभीर आरोप: समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस विभागीय बदलाव को सीधे तौर पर एक बड़े भ्रष्टाचार से जोड़ दिया है। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट करते हुए भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। अखिलेश यादव ने लिखा है कि जब भ्रष्टाचार और आपसी लेनदेन का निर्धारित टारगेट पूरा हो गया, तब जाकर मंत्री को हटाया गया है। उनका यह साफ इशारा राज्य में एक्सप्रेसवे निर्माण में हुए कथित घोटालों और सरकारी धन के भारी दुरुपयोग की ओर है। सपा अध्यक्ष का यह स्पष्ट मानना है कि इस विभाग में अब लूट का कोई काम नहीं बचा था, इसलिए इसे उनसे वापस ले लिया गया।
टिकट को लेकर कसा तंज: अखिलेश यादव ने अपने इस राजनीतिक हमले में केवल सरकार को ही नहीं, बल्कि मंत्री नंदी को भी सीधे घेरा है। उन्होंने मंत्री नंदी के राजनीतिक भविष्य को लेकर एक बहुत ही चुटीला और कड़वा व्यंग्यात्मक तंज कसा है। सपा मुखिया ने अपनी पोस्ट में साफ शब्दों में लिखा है कि अभी तो ये मंत्री जी राजनीति में सिर्फ हाफ ही हुए हैं। उन्होंने आगे भविष्यवाणी करते हुए कहा कि जब आगामी विधानसभा चुनाव में इन्हें टिकट नहीं मिलेगा तो ये पूरी तरह से साफ हो जाएंगे। इस तंज के जरिए अखिलेश ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि सत्ताधारी दल में नंदी का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है।
एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर सवाल: अपनी आलोचना को आगे बढ़ाते हुए अखिलेश यादव ने प्रदेश में बने कई एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर भी बड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने अपनी तीखी सोशल मीडिया पोस्ट में राज्य के इन बड़े निर्माण कार्यों को ‘घटिया एक्सप्रेसवे’ करार दिया है। सपा नेता ने व्यंग्य करते हुए पूछा है कि जब सारे घटिया एक्सप्रेसवे पूरी तरह से बन चुके हैं, तब मंत्री को हटाने का क्या ही फायदा है। उनका यह पक्का दावा है कि निर्माण के दौरान ही इन भारी परियोजनाओं में तय मानकों की बहुत बड़ी अनदेखी की गई है। अखिलेश के अनुसार गुणवत्ता में आई यह भारी कमी सीधे तौर पर सत्ताधारी पार्टी के एक बड़े भ्रष्टाचार को उजागर करती है।
मुख्यमंत्री के पास गया विभाग: यह पूरा राजनीतिक विवाद उस अहम फैसले के बाद शुरू हुआ है जिसमें मुख्यमंत्री ने विभाग की कमान सीधे अपने हाथों में ली है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने नंदी से यूपीडा छीनकर इसे सीधे अपने अवस्थापना विकास अनुभाग में शामिल कर लिया है। सरकार का इसके पीछे तर्क है कि इससे गंगा और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के कामकाज में भारी तेजी आएगी। हालांकि, विपक्ष सरकार के इस प्रशासनिक तर्क को मानने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं दिखाई दे रहा है। अखिलेश यादव के इन आक्रामक बयानों से स्पष्ट है कि विपक्ष इसे केवल एक प्रशासनिक सुधार न मानकर आपसी गुटबाजी का परिणाम बता रहा है।
नंदी का घटा राजनीतिक कद: विपक्ष के इन लगातार हमलों के बीच कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी का राजनीतिक कद घटता हुआ साफ प्रतीत हो रहा है। कभी उनके पास औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई और यूपीडा जैसे चार सबसे महत्वपूर्ण और बड़े विभाग हुआ करते थे। अब मुख्यमंत्री के इस बड़े प्रशासनिक आदेश के बाद उनके पास कार्यभार के रूप में सिर्फ तीन ही विभाग शेष रह गए हैं। यूपीडा जैसा सबसे प्रभावशाली विभाग छिनने से उन्हें सरकार और पार्टी के भीतर एक बहुत बड़ा प्रशासनिक झटका लगा है। विपक्ष अब इसी झटके को मुख्य मुद्दा बनाकर आगामी चुनावों के लिए सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ अपना एक मजबूत माहौल तैयार कर रहा है।





































