पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoJK) में इन दिनों पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लोगों का भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोग असीम मुनीर की सेना द्वारा किए जा रहे कथित अत्याचारों को लेकर लगातार विरोध कर रहे हैं। रावलकोट, मीरपुर, कोटली, मुजफ्फराबाद और नीलम वैली जैसे अहम इलाकों में रोजाना बड़े-बड़े प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि सेना उनके मौलिक अधिकारों का हनन कर रही है और उन पर जुल्म ढा रही है। इस पूरे क्षेत्र में सेना की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा तनाव और असंतोष व्याप्त है।
कैंडल मार्च के जरिए विरोध प्रदर्शन अपने विरोध को दर्ज कराने के लिए बीती रात PoK के निवासियों ने एक बड़ा कैंडल मार्च निकाला। यह मार्च रावलकोट से शुरू होकर मुजफ्फराबाद तक गया, जिसमें हजारों की तादाद में लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का यह कैंडल मार्च मुख्य रूप से पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर और देश के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के खिलाफ था। हाथों में मोमबत्तियां लिए हुए लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से लेकिन कड़े शब्दों में अपना विरोध जताया। इस मार्च ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोगों का ध्यान इस क्षेत्र की स्थिति की ओर खींचा है।
लाउडस्पीकर से लोगों को इकट्ठा करने की अपील इन सभी प्रदर्शनों को मुख्य रूप से ‘जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी’ द्वारा संचालित किया जा रहा है। बीती रात इस कमेटी ने लोगों को बड़ी संख्या में जुटाने के लिए स्थानीय मस्जिदों का सहारा लिया। मस्जिदों के लाउडस्पीकरों से लगातार अनाउंसमेंट की गई, जिसमें लोगों से अपील की गई कि वे अधिक से अधिक संख्या में ईदगाह पहुंचें। कमेटी की इस अपील का बड़ा असर हुआ और लोग भारी संख्या में प्रदर्शन स्थल पर जमा हो गए। यह घटना दिखाती है कि कमेटी का स्थानीय लोगों के बीच कितना गहरा प्रभाव है।
निर्दोष लोगों पर गोलीबारी और सड़क खोदने के आरोप प्रदर्शनकारियों और जॉइंट एक्शन कमेटी ने पाक रेंजर्स पर कई संगीन आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बुधवार के दिन भी पाक रेंजर्स ने पूरी तरह से बेकसूर लोगों पर अकारण गोलियां चलाईं। इसके अलावा, कमेटी ने यह भी दावा किया है कि सेना उनके शांतिपूर्ण मार्च को हर हाल में रोकना चाहती है। इसी कड़ी में, पाक रेंजर्स ने सुधान एजुकेशन कॉन्फ्रेंस के दफ्तर के बाहर मौजूद सड़क को पूरी तरह से खोद डाला है। इन बाधाओं के बावजूद लोग अपने अधिकारों के लिए लगातार सड़कों पर डटे हुए हैं।
सरकार का कड़ा रुख और इंटरनेट पर पाबंदी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में तेजी से बिगड़ते हालातों को काबू करने के लिए शहबाज शरीफ सरकार ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। सरकार ने एहतियातन कदम उठाते हुए पूरे PoK क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं को अनिश्चित काल के लिए ठप कर दिया है। इंटरनेट बंद होने से वहां की वास्तविक स्थिति की जानकारी बाहर आना काफी मुश्किल हो गया है। इसके अलावा, सरकार ने प्रदर्शनों की मुख्य कर्ताधर्ता ‘जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी’ पर भी तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार की इन पाबंदियों से लोगों में और अधिक नाराजगी फैलने की आशंका है।
आतंकी संगठनों का कमेटी के खिलाफ अभियान इस पूरे घटनाक्रम में एक और गंभीर पहलू सामने आया है, जो बेहद चिंताजनक है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कुछ सहयोगी संगठन भी इस विवाद में कूद पड़े हैं। बताया जा रहा है कि ये संगठन जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी के खिलाफ काम कर रहे हैं और उनके विरोध में ऑनलाइन पोस्ट कर रहे हैं। इस बात से यह अंदेशा लगाया जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना और सरकार के साथ-साथ आतंकी संगठन भी प्रदर्शनकारियों को दबाने का प्रयास कर रहे हैं।





































