बबीता पांडे के लापता होने के मामले में ट्रेकिंग और कैंपिंग एजेंसी की भारी लापरवाही सामने आई है। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से सख्त कदम उठाए हैं। उत्तरकाशी के जिला पर्यटन अधिकारी ने मामले की जांच के बाद संबंधित एजेंसी का लाइसेंस पूरी तरह से सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही पर्यटन विभाग इस मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई भी तेजी से कर रहा है। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भविष्य में किसी अन्य पर्यटक के साथ ऐसी घटना दोबारा न घटे।
पुलिस कर रही है गहन जांच इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कोतवाली मनेरी में गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया है। जांच एजेंसियां छात्रा के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स और उसकी पुरानी लोकेशन हिस्ट्री की बहुत बारीकी से पड़ताल कर रही हैं। इसके साथ ही उन सभी लोगों से लगातार पूछताछ की जा रही है जो उस दौरान उसके संपर्क में थे। बबीता के उन दो दोस्तों से भी जानकारी जुटाई जा रही है जो उसके साथ इस ट्रेकिंग पर गए थे। पुलिस हर उस छोटे सुराग को खंगाल रही है जो बबीता के अचानक गायब होने की गुत्थी को सुलझा सके।
परिवार की सबसे बड़ी संतान है छात्रा तेईस साल की बबीता का इस तरह से अचानक लापता होना पूरे परिवार के लिए एक बहुत बड़ा सदमा है। वह अपने घर में सबसे बड़ी संतान है और उसके लापता होने से घर का माहौल बेहद गमगीन है। बबीता अपने दो भाइयों के बीच इकलौती बहन है, जिस कारण पूरे परिवार को उसकी बहुत ज्यादा चिंता सता रही है। परिवार के सदस्य हर दिन एक नई उम्मीद के साथ उसकी सुरक्षित वापसी की दुआ कर रहे हैं। इतने दिन बीत जाने के बाद भी कोई खबर न मिलने से उनका धैर्य अब जवाब दे रहा है।
खोज अभियान में शामिल हुए परिजन अपनी बेटी को ढूंढने के लिए परिवार के कुछ सदस्य खुद ही घटना स्थल के करीब पहुंच गए हैं। बबीता का बड़ा भाई हर्षित पांडे और उसकी मां उत्तरकाशी जिले में बचाव टीमों के साथ मौजूद हैं। वे दोनों वहां रहकर हर दिन चलाए जा रहे विभिन्न सर्च ऑपरेशनों की पल-पल की जानकारी ले रहे हैं। मां का रो-रोकर बुरा हाल है, लेकिन फिर भी वह अपनी बेटी को सही सलामत घर ले जाने की आस बांधे हुए है। प्रशासन और स्थानीय लोग भी इस मुश्किल घड़ी में इस दुखी परिवार को हर संभव सांत्वना दे रहे हैं।
रामनगर में घर वालों का बुरा हाल उत्तरकाशी के अलावा परिवार के बाकी सदस्यों का रामनगर स्थित उनके घर में रो-रोकर बुरा हाल हो गया है। घर पर बबीता का छोटा भाई तनुज पांडे अपनी बहन के सकुशल वापस लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। इसके साथ ही घर में मौजूद उसकी बुजुर्ग दादी भी अपनी पोती की याद में लगातार आंसू बहा रही हैं। बबीता के दिव्यांग पिता भी अपनी बेटी की राह ताक रहे हैं और उन्हें उसके सुरक्षित होने की पूरी उम्मीद है। पूरा परिवार प्रशासन से जल्द से जल्द उनकी बेटी को ढूंढ निकालने की भावुक अपील कर रहा है।
प्रसिद्ध है यह घास का मैदान जिस जगह से यह घटना सामने आई है, वह दयारा बुग्याल उत्तराखंड के सबसे मशहूर अल्पाइन घास के मैदानों में गिना जाता है। सर्दियों में यहां बर्फ की सफेद चादर बिछी रहती है और गर्मियों में दूर-दूर तक हरे घास के मैदान नजर आते हैं। इस जगह से बंदरपूंछ, श्रीकंठ, द्रौपदी का डांडा और गंगोत्री पर्वतमाला के शानदार दृश्य बड़ी आसानी से दिखाई देते हैं। इन्हीं खूबियों के कारण हर साल हजारों की संख्या में ट्रेकर देश-विदेश से इस क्षेत्र का रुख करते हैं। बबीता भी इन्हीं सैलानियों में शामिल थी, जो ट्रैकिंग के जरिए इस प्राकृतिक खूबसूरती को करीब से निहारना चाहती थी।





































