1. यकृत (लिवर) का महत्व और वर्तमान जीवनशैली का प्रभाव यकृत मानव शरीर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है, जो एक साथ कई जटिल कार्यों को संपन्न करता है। परंतु, आधुनिक समय में बिगड़ी हुई जीवनशैली और केवल स्वाद को प्राथमिकता देने वाले अस्वास्थ्यकर आहार के कारण यकृत पर कार्य का बोझ अत्यधिक बढ़ जाता है। इस अनुचित दिनचर्या के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में लोग ‘फैटी लिवर’ (यकृत में वसा का जमाव) जैसी गंभीर समस्या की चपेट में बहुत तेजी से आ रहे हैं। ऐसे में, यकृत को किसी भी प्रकार के गंभीर नुकसान से बचाने और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने (विषहरण या डिटॉक्स) के लिए कुछ सरल और स्वास्थ्यवर्धक आदतों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
2. प्रातःकालीन दिनचर्या: विषहरण (डिटॉक्स) की प्रक्रिया यदि आप फैटी लिवर की समस्या से ग्रसित हैं, तो अपनी प्रातःकालीन दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव लाएं। सुबह की शुरुआत चाय या कॉफी के स्थान पर हल्के गुनगुने पानी से करनी चाहिए। प्रतिदिन कम से कम एक से दो गिलास गुनगुना पानी पीने की आदत डालें। इसके लाभ को बढ़ाने के लिए आप इसमें आधा या एक चम्मच नींबू का रस भी मिला सकते हैं, जिससे शरीर के विषाक्त पदार्थ सरलता से बाहर निकल जाते हैं। इसके अतिरिक्त, आप अपनी सुविधा के अनुसार गुनगुने पानी के विकल्प के रूप में आंवले का रस, हल्दी का पानी या अजवायन के पानी का भी सेवन कर सकते हैं। यदि प्रतिदिन एक ही प्रकार का पेय उबाऊ लगे, तो सप्ताह के सातों दिन अलग-अलग प्रकार के विषहरण पेय का उपयोग किया जा सकता है।
3. आहार में फाइबर (रेशेदार भोजन) की आवश्यकता यकृत को स्वस्थ और रोगमुक्त बनाने के लिए आहार में फाइबर (रेशेदार तत्वों) का प्रचुर मात्रा में होना नितांत आवश्यक है। फैटी लिवर के रोगियों को अपने दैनिक खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अपने दोपहर और रात्रि के भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियों को प्रमुखता से शामिल करें। इसके साथ ही, चुकंदर, गाजर और फाइबर से भरपूर अन्य ताजे सलाद का नियमित रूप से सेवन अनिवार्य रूप से करें। यह रेशेदार आहार पाचन तंत्र को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ यकृत पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करने में भी अत्यधिक सहायक सिद्ध होता है।
4. अस्वास्थ्यकर (जंक) भोजन और परिष्कृत शर्करा का त्याग यकृत में जमा अतिरिक्त वसा को नियंत्रित करने के लिए यह अनिवार्य है कि आप बाहरी और अस्वास्थ्यकर खानपान (जंक फूड) का पूर्ण रूप से त्याग करें। अपने दैनिक आहार में परिष्कृत शर्करा (रिफाइंड शुगर) और ट्रांस फैट (हानिकारक वसा) वाले पदार्थों को बिल्कुल भी स्थान न दें। पैकेटबंद खाद्य पदार्थों और अत्यधिक तले-भुने व्यंजनों से दूरी बनाना यकृत के स्वास्थ्य के लिए परम आवश्यक है। इन हानिकारक तत्वों को आहार से हटा देने पर यकृत की सूजन और उसमें जमा वसा बहुत तेजी से कम होने लगती है, जिससे अंग की कार्यक्षमता में सुधार होता है।
5. पर्याप्त जल का सेवन (हाइड्रेशन) और शारीरिक शुद्धि शरीर में जल का पर्याप्त स्तर बनाए रखना यकृत की सफाई के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। आप दिन भर में जितना अधिक शुद्ध जल ग्रहण करेंगे, आपका शरीर उतना ही अधिक जलयुक्त (हाइड्रेटेड) रहेगा और अवांछित तत्व सरलता से बाहर निकल सकेंगे। इसलिए, यह सुनिश्चित करें कि आप प्रतिदिन कम से कम आठ से नौ गिलास पानी अवश्य पिएं। पर्याप्त मात्रा में जल का सेवन करने से यकृत को शरीर के सभी अपशिष्ट पदार्थों को छानकर बाहर निकालने में अत्यधिक सहायता मिलती है।
6. व्यसनों से दूरी और चिकित्सकीय परामर्श (अस्वीकरण) यकृत के उत्तम स्वास्थ्य के लिए धूम्रपान और मद्यपान से पूर्णतः दूरी बनाना अनिवार्य है। सिगरेट का धुआं यकृत की कार्यक्षमता को अत्यंत धीमा कर देता है, जिसके कारण शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने लगते हैं। इसी प्रकार, शराब का सेवन यकृत की कोशिकाओं को सीधे तौर पर और बुरी तरह से क्षतिग्रस्त करता है; अतः इन व्यसनों का तत्काल त्याग करें। (अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी और सुझाए गए उपाय केवल सामान्य जागरूकता के लिए हैं। किसी भी स्वास्थ्य कार्यक्रम को आरंभ करने, अपने आहार में बदलाव करने या किसी भी बीमारी का उपचार शुरू करने से पूर्व अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।)





































