देवगुरु बृहस्पति आगामी दो जून को मिथुन राशि की अपनी यात्रा पूर्ण करके चंद्रमा के आधिपत्य वाली कर्क राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। यद्यपि देवगुरु बृहस्पति का यह गोचर उनकी अपनी उच्च राशि में संपन्न होने जा रहा है, जो कि ज्योतिषीय दृष्टि से एक अत्यंत शुभ संकेत माना जाता है, तथापि कुछ विशिष्ट राशियों के लिए ग्रहों की यह चाल एक गंभीर चिंता का विषय बन सकती है। इस अवधि में इन राशियों के जीवन में अनेक प्रकार के संघर्ष उत्पन्न होने की संभावना है। कार्यक्षेत्र और करियर को लेकर इन्हें अत्यंत सावधानियां बरतने की आवश्यकता होगी, साथ ही साथ अपने आर्थिक पक्ष को लेकर भी विशेष सतर्कता अपनानी पड़ेगी। आइए विस्तार से जानते हैं उन राशियों के बारे में जिन पर इस गोचर का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
सिंह राशि देवगुरु बृहस्पति का यह गोचर आपकी राशि से द्वादश भाव में होने जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र में यह भाव व्यय अर्थात हानि का मुख्य कारक माना जाता है। अत्यंत शुभ ग्रह होने के बावजूद गुरु का इस स्थान में विराजमान होना आपके लिए अनुकूल नहीं कहा जा सकता। इस गोचर के प्रभाव स्वरूप आपके जीवन में अप्रत्याशित खर्चों की वृद्धि हो सकती है और ऐसी परिस्थितियां भी उत्पन्न हो सकती हैं जहां आपको अपनी जमा पूंजी भी खर्च करनी पड़े। अतः आपको एक सटीक और संतुलित बजट बनाकर ही आगे बढ़ना चाहिए। इस समयावधि में बिना गहन सोच-विचार के किसी भी प्रकार के निवेश से आपको पूर्णतः बचना चाहिए। कार्यक्षेत्र में अपने सहकर्मियों के साथ किसी भी प्रकार के वाद-विवाद से बचें अन्यथा आपकी पेशेवर छवि धूमिल हो सकती है। हालांकि, इस राशि के उन जातकों को विशेष लाभ प्राप्त होने की संभावना है जो विदेशों से संबंधित कारोबार में संलग्न हैं। इस गोचर के दुष्प्रभावों को कम करने हेतु उपाय के तौर पर आपको भगवान श्री विष्णु की नियमित पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
कुंभ राशि आपकी राशि के लिए गुरु ग्रह का गोचर आपके शत्रु भाव में होने जा रहा है। इस भाव में देवगुरु के उपस्थित होने से आपके गुप्त शत्रु अधिक सक्रिय हो सकते हैं और आपका बनता हुआ काम बिगाड़ने का प्रयास कर सकते हैं। अपने कार्यक्षेत्र में किसी भी व्यक्ति पर आंख मूंदकर बिल्कुल भी भरोसा न करें। इस समय जितना अधिक आप अपने काम से काम रखेंगे, आपके लिए उतना ही अधिक हितकारी और सुरक्षित रहेगा। कोर्ट-कचहरी और कानूनी मामलों के कारण कुछ लोगों को भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है और इसमें अत्यधिक धन खर्च होने की भी प्रबल आशंका बनी हुई है। किसी भी प्रकार का कारोबारी लेन-देन करते समय अत्यंत सावधानी बरतें। मातृ पक्ष के रिश्तेदारों के साथ बातचीत के दौरान अपने शब्दों का चयन पूरी समझदारी के साथ करें अन्यथा व्यर्थ की अनबन हो सकती है। बचाव के उपाय के तौर पर कुंभ राशि वाले जातकों को भगवान विष्णु के पावन मंत्रों का निरंतर जप करना चाहिए।
धनु राशि देवगुरु बृहस्पति आपकी ही राशि के स्वामी ग्रह हैं और इस बार आपके अष्टम भाव में इनका गोचर होने जा रहा है। ज्योतिष में यह भाव जीवन के संघर्षों और अचानक आने वाली अनिश्चितताओं का मुख्य कारक माना जाता है। धनु राशि वालों को अपने स्वामी ग्रह के इस गोचर के चलते जीवन में अच्छे और बुरे दोनों ही तरह के मिले-जुले अनुभव प्राप्त हो सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपके ऊपर काम का अत्यधिक दबाव बढ़ सकता है, किंतु इसके साथ ही आपकी छिपी हुई योग्यता भी निखरकर सबके सामने आएगी। किसी अत्यंत करीबी व्यक्ति से धोखा मिलने के कारण आपकी भावनाएं आहत हो सकती हैं। पैतृक संपत्ति से जुड़ा हुआ कोई पुराना विवाद कोर्ट-कचहरी की दहलीज तक पहुंच सकता है, इसलिए पूरी तरह सतर्क रहें। सट्टेबाजी, जुआ और किसी भी प्रकार के जोखिम भरे पैसों के निवेश से आपको सख्त तौर पर बचना होगा अन्यथा भारी धन हानि का सामना करना पड़ सकता है। शांति के उपाय के तौर पर आपको पीली वस्तुओं का दान नियमित रूप से करना चाहिए।
केतु का मघा नक्षत्र में महापरिवर्तन और राशियों पर प्रभाव
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में केतु को एक अत्यंत रहस्यमयी और मायावी ग्रह माना जाता है, जो जातक के जीवन में अचानक बदलाव और पूर्णतः अप्रत्याशित परिस्थितियां उत्पन्न करने के लिए जाना जाता है। आगामी तीस मई को यह छाया ग्रह केतु मघा नक्षत्र में अपना प्रवेश करने जा रहा है और दो अगस्त तक इसी नक्षत्र में विराजमान रहेगा। यूं तो ग्रहों के इस परिवर्तन का सीधा असर सभी बारह राशियों के जातकों पर देखने को मिलेगा, परंतु कुछ विशेष राशि वालों के लिए यह समय अत्यधिक चुनौतीपूर्ण और संघर्षपूर्ण साबित हो सकता है। इस समयावधि के दौरान जातकों को अपने करियर, आर्थिक मामलों और निजी रिश्तों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। केतु का यह नकारात्मक प्रभाव कई बार व्यक्ति का मानसिक तनाव, व्यर्थ का भ्रम और फैसले लेने में अस्थिरता की स्थिति को काफी बढ़ा देता है। ऐसे में कुछ राशियों को विशेष रूप से संभलकर रहने की सलाह दी जाती है।
कन्या राशि केतु के इस नक्षत्र परिवर्तन के परिणामस्वरूप कन्या राशि वालों की दैनिक परेशानियों में भारी इजाफा देखने को मिल सकता है। आपके कार्यक्षेत्र में अचानक नई रुकावटें आने की प्रबल संभावना है और लगातार काम का दबाव आपका मानसिक तनाव काफी हद तक बढ़ा सकता है। इस दौरान छोटी-छोटी बातों पर बहुत ज्यादा सोचने या चिंता करने की आपकी आदत आपको मानसिक रूप से परेशान कर सकती है। कई बार अपनी पूरी मेहनत करने के बावजूद मनचाहे और सार्थक परिणाम प्राप्त न होने से आपके भीतर भारी निराशा का भाव बढ़ सकता है। पैसों और आर्थिक मामलों में पूरी तरह सतर्क रहना आपके लिए नितांत आवश्यक होगा, इसलिए धन के मामले में किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा बिल्कुल न करें।
मिथुन राशि इस गोचर की अवधि में मिथुन राशि के जातकों को अपनी दैनिक बातचीत और लोगों के साथ अपने व्यवहार में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। लोगों के साथ छोटी-छोटी बातों को लेकर बड़ा विवाद या गहरी गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं। नौकरीपेशा और व्यापार करने वाले जातकों को अपनी मेहनत का पूरा फल मिलने में अप्रत्याशित देरी का सामना करना पड़ सकता है। आगामी दो अगस्त तक किसी भी प्रकार के महत्वपूर्ण फैसले लेते समय आपको अपना धैर्य बनाए रखने की बहुत आवश्यकता होगी। इसके साथ ही, आय से अधिक खर्चों में हो रही बढ़ोतरी भी आपके लिए एक बड़ी चिंता का कारण बन सकती है।
मीन राशि मीन राशि के जातकों के लिए केतु का यह गोचर मानसिक रूप से थोड़ा अधिक तनावपूर्ण और कष्टकारी रह सकता है। इस दौरान किसी से भी बातचीत करते समय अपनी वाणी में संयम रखने की सबसे ज्यादा जरूरत होगी। आपके करीबी लोगों के साथ छोटी-छोटी बातों पर विवाद बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। आपके मन में कई तरह की अनजानी चिंताएं और असमंजस की स्थिति लगातार बनी रह सकती है। कार्यक्षेत्र में ध्यान कम लगने के कारण आपका पेशेवर प्रदर्शन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, अपने ही बेहद करीबी लोगों और मित्रों के साथ गहरे मतभेद होने की संभावना भी निरंतर बनी रहेगी, जिसके परिणामस्वरूप आपका मानसिक दबाव काफी बढ़ सकता है।





































