चीन पर कूटनीतिक उपकार लादने की ट्रंप की कोशिश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी बीजिंग की प्रस्तावित यात्रा से पहले एक विशेष रणनीति के तहत चीन को यह जताने का प्रयास किया है कि अमेरिका के निर्णय उसके पक्ष में रहे हैं। ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि चीनी प्रशासन उनके द्वारा लिए गए फैसलों से काफी खुश है। इसका मुख्य कारण उनके द्वारा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को स्थायी रूप से खोलने का निर्णय है। ट्रंप का तर्क है कि इस रणनीतिक जलमार्ग को खोलना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी के समान है और चीन जैसा व्यापारिक राष्ट्र इसका मुख्य लाभार्थी है।
बीजिंग की चुप्पी और ईरान पर हथियारों का प्रतिबंध डोनाल्ड ट्रंप ने एक साहसी दावा करते हुए कहा कि उनकी कूटनीति के चलते चीन अब ईरान को हथियार निर्यात न करने के लिए सहमत हो गया है। ट्रंप के मुताबिक, उन्हें चीन से यह आश्वासन मिल चुका है कि ईरान को दी जाने वाली सैन्य मदद तत्काल प्रभाव से रोक दी जाएगी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा है कि चीन ने अभी तक इस दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। ट्रंप का यह रुख मई में होने वाली शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठकों से पहले माहौल बनाने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
ह्वाइट हाउस द्वारा ट्रंप के पोस्ट का समर्थन ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ अकाउंट पर चीन और होर्मुज जलमार्ग के विषय में जो विचार साझा किए, उसे व्हाइट हाउस ने भी आधिकारिक रूप से समर्थन देते हुए साझा किया है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि वे वैश्विक शांति और सुचारू व्यापार के लिए इस मार्ग को खुला रख रहे हैं और भविष्य में किसी भी प्रकार की नाकेबंदी को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि चीन के साथ उनके संबंध अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं जहाँ सहयोग को संघर्ष पर प्राथमिकता दी जा रही है।
मैत्रीपूर्ण संबंधों और भविष्य के सहयोग पर जोर ट्रंप ने अपने संदेश में चीनी राष्ट्रपति के साथ अपनी आगामी भेंट को लेकर काफी उत्साह दिखाया है। उन्होंने लिखा कि वे और शी जिनपिंग एक-दूसरे के साथ बेहतरीन तालमेल के साथ कार्य कर रहे हैं। ट्रंप को पूरी उम्मीद है कि बीजिंग दौरे पर उनका स्वागत अत्यंत आत्मीय होगा। उन्होंने वैश्विक समुदाय को यह संदेश देने की कोशिश की है कि दो बड़ी शक्तियों के बीच की लड़ाई के मुकाबले समझदारी से किया गया समझौता पूरी मानवता के लिए अधिक फलदायी होता है।
अमेरिकी सैन्य शक्ति का स्पष्ट प्रदर्शन शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की वकालत करने के बावजूद, ट्रंप ने अमेरिका की रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं का उल्लेख करना नहीं भुलाया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यदि परिस्थितियाँ विपरीत होती हैं और युद्ध की स्थिति बनती है, तो अमेरिका किसी भी दुश्मन को धूल चटाने में सक्षम है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि सैन्य कौशल और युद्ध कौशल में अमेरिका का कोई सानी नहीं है। यह बयान उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति और उनकी सख्त छवि को पुन: स्थापित करने वाला है।
शिखर सम्मेलन का महत्व और यात्रा का इतिहास 14-15 मई को होने वाली यह दो दिवसीय यात्रा पिछले आठ सालों में ट्रंप का पहला बीजिंग दौरा होने जा रही है। इससे पूर्व पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी संबंधों को सामान्य करने के उद्देश्य से चीन की यात्रा की थी। ट्रंप की इस यात्रा को पहले ईरान युद्ध के कारण स्थगित कर दिया गया था, लेकिन अब इसे पुनर्जीवित किया गया है। 14 मई से शुरू होने वाली यह वार्ता न केवल अमेरिका और चीन के संबंधों की दिशा तय करेगी, बल्कि वैश्विक राजनीति और मध्य पूर्व की स्थिति पर भी गहरा प्रभाव डालेगी।



































