कूटनीतिक गलियारों में नई सुगबुगाहट और ट्रम्प की भविष्यवाणियाँ अमेरिकी समाचार तंत्र के माध्यम से एक बड़ी खबर वैश्विक पटल पर उभरी है, जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को यह संभावना जताई है कि तेहरान के साथ तनाव कम करने हेतु दूसरे चरण की मंत्रणा अगले दो दिनों के भीतर इस्लामाबाद में शुरू हो सकती है। यह कूटनीतिक पहल अत्यंत नाजुक मोड़ पर है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा मौजूदा अस्थाई संघर्ष विराम आगामी 22 अप्रैल को अपनी पूर्णता प्राप्त कर लेगा। यदि इस सीमित समय के भीतर किसी सर्वसम्मत समझौते पर मुहर नहीं लगती है, तो दोनों पक्षों के बीच शत्रुता और सैन्य गतिविधियाँ पुनः प्रारंभ होने का गंभीर अंदेशा है, जिससे मध्य पूर्व का संकट और गहरा सकता है।
शांति प्रयासों को लगा प्रथम झटका और तेहरान की अड़चनें हाल ही में इस्लामाबाद में ही संपन्न हुई 21 घंटे लंबी शांति चर्चा किसी भी सुखद परिणाम तक पहुँचने में नाकाम रही थी। उस समय दोनों देशों के बीच कोई लिखित संधि नहीं हो सकी, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अनिश्चितता का माहौल बन गया था। वाशिंगटन के आधिकारिक सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि वार्ता की असफलता का जड़ ईरान का वह निर्णय था जिसमें उसने अपने न्यूक्लियर एनरिचमेंट यानी परमाणु संवर्धन के कार्यक्रम को रोकने से इनकार कर दिया था। ईरान का तर्क है कि यह उसका संप्रभु अधिकार है, जबकि अमेरिका इसे वैश्विक सुरक्षा मानकों का उल्लंघन मानता है, और इसी वैचारिक मतभेद ने शांति के मार्ग में बड़ी दीवार खड़ी कर दी है।
जेडी वैंस का स्पष्ट संदेश और सुरक्षा गारंटी की मांग अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने पिछले रविवार को इस्लामाबाद में मीडिया को ब्रीफ करते हुए इस बात पर गहरा असंतोष जताया था कि वार्ता सफल नहीं हो पाई। उन्होंने ईरान को आगाह करते हुए कहा कि अमेरिका का “अंतिम और सर्वोत्तम” प्रस्ताव पहले ही मेज पर रखा जा चुका है, और अब गेंद ईरान के पाले में है। अमेरिका की प्रमुख मांग यह है कि ईरान को न केवल परमाणु हथियार बनाने की योजना छोड़नी होगी, बल्कि उन सभी तकनीकी उपकरणों और बुनियादी ढांचों को भी नष्ट करना होगा जो उसे परमाणु शक्ति बनने में सहायता कर सकते हैं। उपराष्ट्रपति के अनुसार, अमेरिका किसी भी ऐसी ढील के पक्ष में नहीं है जो भविष्य में उसके हितों को नुकसान पहुँचाए।
राजनयिक वार्ता की पुनः बहाली और ट्रंप का नया दृष्टिकोण न्यूयॉर्क पोस्ट के साथ हुई अपनी हालिया बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात की पुष्टि की है कि पिछले सप्ताह के झटकों के बावजूद राजनयिक द्वार अभी बंद नहीं हुए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि “आने वाले दो दिनों में कुछ विशेष घटित हो सकता है” और उन्होंने पाकिस्तान को फिर से एक तटस्थ मेजबान के रूप में चुना है। ट्रंप के इस रुख से पता चलता है कि वे सैन्य विकल्प के बजाय अभी भी आर्थिक और कूटनीतिक दबाव के माध्यम से ईरान को बातचीत की मेज पर लाने को प्राथमिकता दे रहे हैं, ताकि आसन्न युद्ध को टाला जा सके।
आसिम मुनीर की मध्यस्थता और वार्ता का रणनीतिक ढांचा राष्ट्रपति ट्रंप ने इस जटिल कूटनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की जमकर प्रशंसा की है। उन्होंने मुनीर के नेतृत्व और उनकी सक्रियता को इस संभावित वार्ता के दूसरे दौर का मुख्य आधार बताया। ट्रंप ने अपनी टिप्पणी में मुनीर को एक प्रभावी मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत किया है जो दोनों पक्षों के बीच की खाई को पाटने की कोशिश कर रहे हैं। यद्यपि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के नए स्वरूप पर अभी सस्पेंस बरकरार है, लेकिन ट्रंप ने यह साफ़ कर दिया है कि वे खुद इस वार्ता का हिस्सा नहीं होंगे, बल्कि अपनी उच्च स्तरीय टीम के माध्यम से रणनीतिक दिशा-निर्देश जारी करेंगे।
क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आशंकाएं पूरी दुनिया अब इस्लामाबाद की ओर देख रही है, जहाँ अगले 48 घंटों में वैश्विक राजनीति की नई पटकथा लिखी जा सकती है। 22 अप्रैल की अंतिम तिथि सिर पर खड़ी है और यह वार्ता केवल दो देशों के बीच का मसला नहीं रह गई है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का प्रश्न बन चुकी है। यदि ईरान अमेरिका के “अंतिम प्रस्ताव” को स्वीकार नहीं करता है, तो प्रतिबंधों का एक नया और कठोर दौर शुरू हो सकता है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गहरा आघात लगेगा। आने वाले दो दिनों की यह कूटनीतिक रस्साकशी ही तय करेगी कि दुनिया एक और भीषण युद्ध की ओर बढ़ेगी या शांति का कोई नया सवेरा होगा।



































