खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्यवाही और बरामदगी उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने मिलावटखोरों के विरुद्ध एक निर्णायक अभियान चलाते हुए भारी मात्रा में नकली शहद को जब्त करने में सफलता प्राप्त की है। इस साल की शुरुआत में 6 जनवरी को नवीन मंडी के पास स्थित एक विशाल गोदाम पर छापा मारा गया था, जहाँ से संदिग्ध शहद की एक बड़ी खेप बरामद हुई थी। कुल 15 टन वजन वाले 500 कैन जब्त किए गए, जिनकी बाजार मूल्य करीब 22 लाख रुपये से ज्यादा आंकी गई थी। इस कार्यवाही ने मिलावटी खाद्य पदार्थों के सिंडिकेट को हिलाकर रख दिया है। विभाग ने उस समय बरामद शहद के सैंपल लेकर जांच के लिए सरकारी लैब भेजे थे, जिसकी रिपोर्ट ने अब चौंकाने वाले तथ्यों को उजागर किया है।
राइस सिरप की मिलावट और लैब का फैसला हाल ही में आई प्रयोगशाला की विस्तृत जांच रिपोर्ट में यह सिद्ध हो गया है कि हापुड़ में बरामद शहद पूरी तरह से बनावटी था। खाद्य सुरक्षा सहायक आयुक्त सुनील कुमार ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि परीक्षण के दौरान शहद में ‘राइस सिरप’ के अंश प्रचुर मात्रा में पाए गए हैं, जो इसे अखाद्य और असुरक्षित बनाते हैं। यह साबित हो चुका है कि शहद के नाम पर उपभोक्ताओं को केवल चीनी और चावल के अर्क का घोल बेचा जा रहा था। लैब रिपोर्ट में यह भी अंकित किया गया है कि इसमें प्राकृतिक शहद के गुण शून्य के बराबर हैं और यह किसी भी रूप में मानव उपभोग के लिए योग्य नहीं है।
हरियाणा से आंध्र प्रदेश तक फैला व्यापारिक जाल अधिकारियों ने जांच के दौरान पाया कि इस अवैध व्यापार के तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं। बताया जा रहा है कि शहद की यह खेप पड़ोसी राज्य हरियाणा से परिवहन कर उत्तर प्रदेश लाई गई थी और इसे आगे आंध्र प्रदेश की विभिन्न मंडियों और फैक्ट्रियों में भेजने की तैयारी थी। मिलावटखोरी का यह संगठित स्वरूप अत्यंत चिंता का विषय है, क्योंकि इसमें कई राज्यों के बिचौलिए और व्यापारी संलिप्त हो सकते हैं। प्रशासन अब उन कड़ियों को जोड़ने में लगा है जो हरियाणा के उत्पादन केंद्रों से लेकर आंध्र प्रदेश के वितरण केंद्रों तक इस जहरीले खेल को अंजाम दे रही थीं।
आयुर्वेदिक औषधियों की शुद्धता पर मंडराता संकट इस छापेमारी में सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि यह नकली शहद सीधे बाजार में बेचने के साथ-साथ फार्मास्युटिकल कंपनियों को भी सप्लाई किया जाना था। सहायक आयुक्त सुनील कुमार के अनुसार, इस अशुद्ध शहद का प्रयोग आयुर्वेदिक औषधियों, टॉनिक और खांसी के उपचार में काम आने वाली दवाओं के निर्माण में होना तय था। शहद को अक्सर दवाओं के साथ ‘अनुपान’ के रूप में लिया जाता है, लेकिन जब मुख्य घटक ही मिलावटी हो, तो दवा का प्रभाव समाप्त हो जाता है और वह उल्टा शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डालने लगती है। यह जानकारी सामने आने के बाद आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
जहरीले शहद से होने वाले शारीरिक नुकसान स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस मिलावटी शहद को एक ‘धीमा जहर’ करार दिया है। राइस सिरप के अत्यधिक उपयोग वाला यह शहद शरीर के मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ सकता है और लिवर व किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। जहाँ प्राकृतिक शहद शरीर को ऊर्जा और एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करता है, वहीं यह मिलावटी शहद शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों के लिए इसका सेवन विशेष रूप से घातक हो सकता है, क्योंकि यह रक्तचाप और शर्करा के स्तर को अचानक अस्थिर कर सकता है, जिससे आपातकालीन स्वास्थ्य स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
दोषियों पर कड़े दंडात्मक प्रावधानों के तहत एक्शन जांच रिपोर्ट आने के बाद जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग अब दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्यवाही करने की प्रक्रिया में है। सहायक आयुक्त सुनील कुमार ने स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (FSSAI) के कड़े प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। दोषियों पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ उनके व्यापारिक लाइसेंस रद्द करने और जेल भेजने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य भविष्य में ऐसी किसी भी मिलावटखोरी पर पूर्ण विराम लगाना है, ताकि आम नागरिक बिना किसी डर के शुद्ध खाद्य पदार्थों का लाभ उठा सकें और उनकी सेहत सुरक्षित रहे।



































