प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में पहुंचकर विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में करीब सात से आठ मिनट तक विशेष अनुष्ठान संपन्न किया और मां गंगा को श्रद्धापूर्वक प्रणाम किया। 18 जून 2024 के बाद यह पहला अवसर था जब प्रधानमंत्री ने इस पावन धाम में दर्शन और पूजन किया है।
मंदिर परिसर में भ्रमण: प्रधानमंत्री मोदी मंदिर परिसर में कुल 55 मिनट तक रहे, जिस दौरान उन्होंने विभिन्न धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया। उन्होंने माता अन्नपूर्णा, भारत माता और शंकराचार्य की प्रतिमाओं के समक्ष शीश नवाया और उनका आशीर्वाद लिया। पूजा के पश्चात प्रधानमंत्री गंगा द्वार तक गए, जहां उन्होंने वहां की व्यवस्थाओं को बारीकी से देखा।
आधुनिक सुविधाओं का अवलोकन: काशी विश्वनाथ धाम के भ्रमण के दौरान प्रधानमंत्री ने वहां स्थापित नई तकनीक, वैदिक घड़ी का विशेष रूप से अवलोकन किया। इसके साथ ही उन्होंने घाट पर लगे एयर प्यूरीफायर सिस्टम का भी निरीक्षण किया। यह आधुनिक सिस्टम मणिकर्णिका घाट की वायु को शुद्ध करने के लिए लगाया गया है, जिसके कार्य संचालन के बारे में पीएम ने विस्तार से जानकारी ली।
भव्य रोड शो का आयोजन: मंदिर पहुंचने से पहले बुधवार की सुबह प्रधानमंत्री ने वाराणसी की सड़कों पर एक विशाल रोड शो किया। यह रोड शो बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW) से शुरू होकर लहरतारा, कचहरी, आंबेडकर चौराहा, चौकाघाट, तेलियाबाग, लहुराबीर और मैदागिन जैसे प्रमुख इलाकों से गुजरते हुए काशी विश्वनाथ धाम पर संपन्न हुआ। इस दौरान सड़क के दोनों ओर प्रशंसकों की भारी भीड़ उमड़ी।
मंदिर प्रशासन का उपहार: दर्शन के उपरांत काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन की ओर से प्रधानमंत्री को विशेष स्मृति चिह्न भेंट किए गए। उन्हें गुलाबी मीनाकारी से बना काशी विश्वनाथ मंदिर का एक सुंदर मॉडल दिया गया। साथ ही उन्हें ‘जय विश्वनाथ’ लिखा हुआ एक शाल, जिसमें रुद्राक्ष की मालाएं लगी थीं, भगवान शिव का प्रतीक त्रिशूल और डमरू भी उपहार स्वरूप भेंट किया गया।
भक्तों का अभिवादन: जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अपनी पूजा पूरी कर मंदिर परिसर से बाहर निकले, वहां मौजूद भक्तों ने ‘हर हर महादेव’ के जयकारों से आकाश गुंजा दिया। प्रधानमंत्री ने भी हाथ जोड़कर और हाथ हिलाकर जनता का विनम्रतापूर्वक अभिवादन स्वीकार किया। वाराणसी की इस यात्रा ने आध्यात्मिक और आधुनिक विकास के संगम को एक बार फिर रेखांकित किया है।


































