उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में छावनी बोर्ड द्वारा 17 सड़कों के नाम बदलने के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगा दी गई है। आगरा कैंटोनमेंट के इस कदम ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। नगीना से निर्वाचित सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस पूरी प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह फैसला लोकतांत्रिक और सामाजिक मूल्यों के विपरीत है।
राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप: सांसद चंद्रशेखर आजाद ने विशेष रूप से यह उल्लेख किया कि इस निर्णय को लेने वाली बैठक में भारतीय जनता पार्टी के नेता मौजूद थे। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के नेताओं की उपस्थिति में लिया गया यह निर्णय कई संदेह पैदा करता है। आजाद का मानना है कि इस नाम परिवर्तन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता का अभाव रहा है।
प्रतिनिधित्व का संकट: आजाद समाज पार्टी के प्रमुख ने अपनी प्रतिक्रिया में इसे प्रतिनिधित्व के अधिकार से जोड़कर देखा है। उनके मुताबिक, प्रशासन ने सड़कों के नए नाम तय करते समय सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को ताक पर रख दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों का नामकरण समाज के व्यापक स्वरूप को प्रतिबिंबित करना चाहिए, जो इस मामले में नहीं दिखा।
स्त्री शक्ति की अनुपस्थिति: चंद्रशेखर आजाद ने सूची का विश्लेषण करते हुए बताया कि इसमें किसी भी महिला समाज सुधारक या वीरांगना का नाम शामिल नहीं है। उन्होंने देश के इतिहास में महान योगदान देने वाली सावित्रीबाई फुले, अहिल्याबाई होल्कर और झलकारी बाई जैसी हस्तियों का नाम लेते हुए कहा कि इन वीरांगनाओं को स्थान न देना यह दर्शाता है कि प्रशासन की दृष्टि में महिलाओं का योगदान गौण है।
स्वतंत्रता सेनानियों की अनदेखी: सड़कों के नामकरण में अल्पसंख्यक और दलित-पिछड़ा वर्ग के महापुरुषों की कथित उपेक्षा पर भी सांसद ने नाराजगी जताई। उन्होंने अशफाक उल्लाह खान, हेमू कालाणी और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे व्यक्तित्वों का स्मरण करते हुए पूछा कि आखिर इन राष्ट्रनिर्माताओं को सूची से बाहर क्यों रखा गया। उनके अनुसार, यह वंचित समाज के नायकों को भुलाने की कोशिश है।
नारी सम्मान पर सवाल: अंत में, चंद्रशेखर आजाद ने केंद्र सरकार के नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 का उल्लेख करते हुए भाजपा की नीतियों पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि बिना समान हिस्सेदारी के ऐसे कानून बेमानी हैं। उन्होंने आगरा के इस फैसले को भाजपा के सामाजिक न्याय और नारी सम्मान के दावों का विरोधाभास बताया और इसे केवल चुनावी दिखावा करार दिया।


































