दिल्ली से लखनऊ का सफर: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक की हवाई यात्रा के दौरान एक बड़ा व्यवधान सामने आया है। दोनों नेता दिल्ली से उड़ान भरकर इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट के जरिए लखनऊ की ओर आ रहे थे। इसी यात्रा के दौरान गंतव्य शहर के ऊपर पहुंचने पर उड़ान को मौसम की गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ा।
तेज हवाओं ने रोकी लैंडिंग: जब यह इंडिगो फ्लाइट लखनऊ के आसमान पर पहुंची, तो वहां का मौसम उड़ान के लिए बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं था। लखनऊ में तेज हवाएं चल रही थीं और विजिबिलिटी (दृश्यता) काफी खराब थी। इन्हीं खराब परिस्थितियों के कारण पायलट को लखनऊ एयरपोर्ट पर विमान उतारने में भारी समस्या का सामना करना पड़ा और लगातार तीन बार लैंडिंग के प्रयास विफल हो गए।
सुरक्षित स्थान की ओर रुख: लखनऊ में तीन बार के असफल प्रयासों के बाद किसी भी तरह के जोखिम से बचने के लिए तुरंत एक वैकल्पिक फैसला लिया गया। एहतियात के तौर पर फ्लाइट को मध्य प्रदेश की राजधानी की ओर मोड़ दिया गया। इसके बाद इंडिगो का यह विमान भोपाल पहुंचा, जहां दोनों डिप्टी सीएम सहित सभी लोग सुरक्षित रूप से उतर गए।
विमानों में खराबी का मुद्दा: खराब मौसम के अलावा, विमानों की तकनीकी स्थिति और उनकी कार्यप्रणाली का मुद्दा भी हाल ही में सरकार के संज्ञान में रहा है। फरवरी 2026 में संसद सत्र के दौरान सिविल एविएशन मिनिस्टर ने इस बात की आधिकारिक जानकारी दी थी कि देश में संचालित लगभग आधे विमान बार-बार तकनीकी खराबी का शिकार हो रहे हैं, जो एक चिंता का विषय है।
इंडिगो के सबसे ज्यादा विमानों की जांच: नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल द्वारा सदन में दिए गए लिखित जवाब के अनुसार, पिछले साल जनवरी से लेकर 3 फरवरी 2026 तक की अवधि में विमानों का गहन विश्लेषण किया गया। छह एयरलाइनों के 754 विमानों की जांच में सबसे ज्यादा इंडिगो के 405 विमान परखे गए, जिनमें से 148 विमानों में बार-बार होने वाली तकनीकी खराबियां दर्ज की गईं।
विमानन क्षेत्र में लगातार मामले: इंडिगो के अलावा अन्य एयरलाइंस की स्थिति भी इन सरकारी आंकड़ों में स्पष्ट की गई थी। जांच में एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के 267 विमानों में से 191 में खराबियां मिलीं (जिसमें एयर इंडिया के 166 में से 137 शामिल हैं), जबकि स्पाइसजेट के 43 में से 16 विमानों में खराबी सामने आई। इन आंकड़ों के साथ यह भी अहम है कि पिछले कुछ वर्षों में उड़ानों के डायवर्ट होने या रद्द होने के कई मामले सामने आ चुके हैं।



































