सनातन धर्म में पंचांग का अपना एक विशिष्ट स्थान और महत्व है। यह न केवल हमारे पर्व-त्योहारों को निर्धारित करता है, बल्कि दैनिक जीवन के कार्यों को शुभ और मंगलमय बनाने के लिए एक दिशा-निर्देश के रूप में भी कार्य करता है। आज 23 मई 2026, शनिवार का दिन एक विशेष आध्यात्मिक अवसर लेकर आया है। आज मासिक दुर्गाष्टमी है, जिस दिन शक्ति स्वरूपा माता दुर्गा की आराधना का विशेष विधान बताया गया है। इस शुभ अवसर पर अभिजीत मुहूर्त और रवि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है, जो भक्तों के लिए कल्याणकारी है। हालाँकि, आज के दिन पंचांग के अनुसार भद्रा की छाया भी बनी रहेगी, जिसके प्रति सावधानी बरतना आवश्यक है।
तिथि, सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र स्थिति का विवरण
आज शनिवार को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है, जिसका प्रभाव देर रात 4 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इसके पश्चात नवमी तिथि का आरम्भ होगा। आज सूर्योदय सुबह 5 बजकर 26 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 10 मिनट पर होगा। यदि हम चंद्र स्थिति पर दृष्टि डालें, तो चन्द्रोदय का समय दोपहर 12 बजकर 4 मिनट है, जबकि चन्द्रास्त 24 मई की तड़के सुबह 1 बजकर 5 मिनट पर होगा। अष्टमी तिथि के इस पूरे विस्तार में माता की भक्ति का विशेष महत्व है।
नक्षत्र, योग और करण की गणना
पंचांग के अनुसार, आज का नक्षत्र मघा है, जो पूरे दिन और रात व्याप्त रहेगा। यह नक्षत्र 24 मई की दोपहर 2 बजकर 9 मिनट तक प्रभावी रहेगा, जिसके बाद पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का प्रवेश होगा। योग की बात करें तो ध्रुव योग सुबह 6 बजकर 14 मिनट तक था, जिसके बाद व्याघात योग का प्रभाव बना हुआ है। करण के संदर्भ में, आज विष्टि करण शाम 4 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में इन सभी स्थितियों का आकलन शुभ और अशुभ कार्यों को तय करने में किया जाता है।
शुभ मुहूर्त: ब्रह्म, अभिजीत और विजय का महासंयोग
मासिक दुर्गाष्टमी के इस पावन पर्व पर पूजा-अर्चना के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। ब्रह्म मुहूर्त, जो साधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है, सुबह 4 बजकर 4 मिनट से 4 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त, दोपहर में अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा, जो किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ है। विजय मुहूर्त का समय दोपहर 2 बजकर 35 मिनट से 3 बजकर 30 मिनट तक निर्धारित है, जिसमें विजय प्राप्ति हेतु विशेष कार्य किए जा सकते हैं।
अन्य शुभ मुहूर्त: गोधूलि, अमृत काल और निशिता
दिन के अन्य शुभ समय की बात करें तो गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 8 मिनट से 7 बजकर 29 मिनट तक रहेगा, जो संध्या वंदन के लिए उपयुक्त है। रात्रि काल में अमृत काल रात 11 बजकर 45 मिनट से शुरू होकर 24 मई की सुबह 1 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। साथ ही, माता की विशेष आराधना के लिए निशिता मुहूर्त रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 38 मिनट तक है। रवि योग का विशेष लाभ 24 मई की सुबह 2 बजकर 9 मिनट से सूर्योदय तक मिलेगा।
अशुभ समय और भद्रा काल के प्रति सावधानियां
पंचांग में शुभ समय के साथ-साथ अशुभ समय का ज्ञान होना भी अनिवार्य है ताकि अनिष्ट से बचा जा सके। आज राहुकाल सुबह 8 बजकर 52 मिनट से 10 बजकर 35 मिनट तक रहेगा, जिसमें शुभ कार्य वर्जित हैं। इसी प्रकार यमगण्ड दोपहर 2 बजकर 1 मिनट से 3 बजकर 44 मिनट तक, गुलिक काल सुबह 5 बजकर 26 मिनट से 7 बजकर 9 मिनट तक और दुर्मुहूर्त सुबह 5 बजकर 26 मिनट से 7 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त, आज भद्रा काल सुबह 5 बजकर 26 मिनट से शाम 4 बजकर 40 मिनट तक प्रभावी है, अतः इस अवधि में किसी भी महत्वपूर्ण मांगलिक कार्य को करने से बचना चाहिए।





































