लखनऊ में हुए भयंकर अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कानपुर शहर में भी प्रशासन पूरी तरह से सतर्क नजर आ रहा है। कानपुर विकास प्राधिकरण के प्रवर्तन दस्ते और स्थानीय अग्निशमन अधिकारियों ने मिलकर कोचिंग संस्थानों की सघन जांच का काम सोमवार शाम से ही शुरू कर दिया था। इस संयुक्त टीम का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि छात्रों को पढ़ाने वाले इन संस्थानों में सुरक्षा मानकों का सही ढंग से अनुपालन हो रहा है या नहीं। कानपुर शहर में बड़ी संख्या में छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, इसलिए यहां इस जांच अभियान की अहमियत और भी ज्यादा बढ़ जाती है। अधिकारियों की टीमें शहर के विभिन्न इलाकों में जाकर भवनों की स्थिति और वहां मौजूद आपातकालीन सुविधाओं का बहुत ही बारीकी से निरीक्षण कर रही हैं।
काकादेव में तीस से अधिक संस्थान सील कानपुर शहर में सबसे बड़े शैक्षणिक हब के रूप में पहचाने जाने वाले काकादेव इलाके में प्रशासन ने सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया है। संयुक्त जांच टीमों ने इस क्षेत्र में सघन अभियान चलाते हुए मंगलवार शाम तक तीस से अधिक विभिन्न कोचिंग संस्थानों को पूरी तरह से सील कर दिया। इन सभी कोचिंग सेंटरों को जांच के दौरान बुनियादी सुरक्षा मानकों और सरकारी नियमों के गंभीर उल्लंघन का पूरी तरह से दोषी पाया गया था। प्रशासन की इस ताबड़तोड़ सीलिंग की कार्रवाई से पूरे काकादेव इलाके के कोचिंग संचालकों में भारी दहशत और अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया। अधिकारियों का कहना है कि जब तक ये संस्थान पूरे मानकों को शत-प्रतिशत पूरा नहीं कर लेते, तब तक इन्हें खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
पार्किंग की जगह बना दिए क्लासरूम कानपुर में जांच के दौरान अधिकारियों के सामने नियमों की अनदेखी का एक बेहद ही चौंकाने वाला और गंभीर मामला खुलकर सामने आया। जांच टीमों ने पाया कि कई बहुमंजिला भवनों के बेसमेंट का मूल रूप से आवंटन सिर्फ और सिर्फ वाहनों की पार्किंग के लिए किया गया था। लेकिन लालची कोचिंग संचालकों ने इन पार्किंग वाली जगहों पर अवैध रूप से सैकड़ों बच्चों के एक साथ बैठने के लिए खतरनाक क्लासरूम बना दिए थे। हवा और प्रकाश से वंचित इन बेसमेंट में छात्रों को बैठाना किसी बड़े हादसे को सीधा आमंत्रण देने जैसा था, जिसे प्रशासन ने गंभीरता से लिया। ऐसे सभी अवैध क्लासरूम को तुरंत प्रभाव से बंद करा दिया गया है और भवन मालिकों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
मीरजापुर और वाराणसी में भी ताबड़तोड़ जांच कानपुर की तरह ही प्रदेश के अन्य शहरों मीरजापुर और वाराणसी में भी प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों के खिलाफ कड़ा जांच अभियान छेड़ रखा है। मीरजापुर जिले में जांच अधिकारियों की टीम ने सुरक्षा मानकों पर खरे न उतरने वाले लगभग एक दर्जन कोचिंग संस्थानों को तुरंत सील कर दिया है। वहीं धार्मिक नगरी वाराणसी में विकास प्राधिकरण और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम ने सोमवार से ही कोचिंग संस्थानों और लाइब्रेरियों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। बनारस के विभिन्न इलाकों में चल रहे इन सेंटरों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन किसी भी तरह की कोई लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। इन जिलों में लगातार हो रही इस कार्रवाई से शिक्षा के नाम पर व्यापार करने वाले नियम विरुद्ध संस्थानों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
वाराणसी में सुरक्षा मानकों की भारी कमी वाराणसी में की गई सघन जांच के दौरान अधिकारियों को कई प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों में अग्नि सुरक्षा के बुनियादी मानकों का भारी उल्लंघन मिला है। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए विकास प्राधिकरण ने बनारस में कई छोटे-बड़े कोचिंग संस्थानों को मौके पर ही सील करने की सख्त कार्रवाई की है। वीडीए के उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने इस जांच अभियान के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि कई सेंटर बिना मानचित्र स्वीकृति के चलाए जा रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित भवन मानकों के बिल्कुल विपरीत और अवैध तरीके से संचालित किए जा रहे ऐसे सभी संस्थानों को बिना किसी रियायत के सील किया गया है। वाराणसी प्रशासन का यह अभियान अभी लगातार जारी रहेगा ताकि शहर के सभी कोचिंग संस्थानों में छात्रों की शत-प्रतिशत सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
जौनपुर और चंदौली में भी फैला जांच का दायरा लखनऊ अग्निकांड की गूंज सिर्फ बड़े महानगरों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि प्रदेश के छोटे जिलों में भी इसके बाद सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है। इसी क्रम में पूर्वांचल के जौनपुर और चंदौली जैसे जिलों में भी कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था परखने के लिए जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। इन जिलों में स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें लगातार भ्रमण करके कोचिंग सेंटरों के पंजीकरण और उनकी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की गहन पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों द्वारा कोचिंग संचालकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे तत्काल प्रभाव से सभी आपातकालीन निकास और अग्नि शमन यंत्रों को दुरुस्त कर लें। राज्य सरकार के इस व्यापक अभियान से पूरे उत्तर प्रदेश में कोचिंग संस्थानों के सुरक्षित और व्यवस्थित संचालन की दिशा में एक सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है।





































