जाने-माने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक अठाईस जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के बड़े आंदोलन में शामिल हुए थे। उन्होंने पेपर लीक जैसे गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे पर अपना कड़ा विरोध जताने के लिए यह कठिन अनशन शुरू किया था। उन्होंने बिना कुछ भी खाए पूरे छब्बीस दिनों तक जंतर-मंतर पर यह अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पूरी मजबूती से जारी रखी। उनके इस शांतिपूर्ण लेकिन बेहद कड़े आंदोलन ने पूरे देश और सरकार का ध्यान पेपर लीक के मुद्दे पर खींचा। इस दौरान उन्होंने लगातार शांतिपूर्ण तरीके से अपनी सारी मांगें सरकार के सामने बहुत ही स्पष्ट रूप से रखीं।
पुलिस की बड़ी कार्रवाई: अनशन के दौरान सोनम वांगचुक के मामले में प्रशासन काफी ज्यादा हरकत में आ गया था। इसी को देखते हुए अठारह जुलाई को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से उन्हें उठाकर सीधा अस्पताल ले जाने की बड़ी कार्रवाई की। पुलिस ने उन्हें वहां से हटाकर तुरंत दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के लिए जबरन भर्ती करवा दिया था। इस पूरी पुलिसिया कार्रवाई के बावजूद वांगचुक का यह शांतिपूर्ण आंदोलन और भूख हड़ताल बिना रुके लगातार चलता ही रहा। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी उन्होंने अपने इस आंदोलन को किसी भी प्रकार से कमजोर नहीं होने दिया।
हाई कोर्ट का अहम आदेश: सफदरजंग अस्पताल में चल रहे इलाज को लेकर बाद में एक बहुत बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया था। इस मामले को लेकर जब अदालत में सुनवाई हुई तो दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना एक बहुत ही अहम आदेश सुनाया। दिल्ली हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बाद सोनम वांगचुक को तुरंत गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मेदांता अस्पताल में उचित इलाज मिलने के बाद आखिरकार चौबीस जुलाई को उन्होंने अपना यह लंबा अनशन तोड़ा। सरकार के साथ कई अहम शर्तों पर लंबी और विस्तृत बातचीत होने के बाद ही उन्होंने अपना यह कड़ा फैसला लिया था।
शांति के लिए तोड़ा अनशन: सोनम वांगचुक ने अपना छब्बीस दिन लंबा अनशन तोड़ने के पीछे कुछ बहुत ही बड़े और अहम कारण सभी को बताए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने उनकी सभी मुख्य मांगों को पूरी तरह से मान लिया है। इसके साथ ही उन्होंने देश के भीतर संभावित हिंसा को ध्यान में रखते हुए भी अपना अनशन तोड़ने का फैसला लिया। वे नहीं चाहते थे कि उनके इस शांतिपूर्ण आंदोलन के कारण देश में कहीं भी किसी तरह की हिंसा या अशांति फैले। इसीलिए शांतिपूर्ण तरीके से अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के हाथों उन्होंने अपना अनशन खोलकर इस आंदोलन को विराम दिया।
विरोध प्रदर्शन का समापन: सोनम वांगचुक के अनशन के साथ-साथ कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में चल रहा एक अन्य बड़ा आंदोलन भी अब खत्म हो गया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पूरे छत्तीस दिनों तक चला यह विशाल विरोध प्रदर्शन बीते शनिवार को आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी का यह कड़ा विरोध प्रदर्शन बीस जून को छात्रों के समर्थन में बहुत ही जोर-शोर से शुरू हुआ था। इस लंबे प्रदर्शन ने पेपर लीक के मुद्दे पर शिक्षा व्यवस्था की खामियों को पूरे देश के सामने प्रमुखता से उजागर किया। सरकार द्वारा मांगें माने जाने के बाद शनिवार को इस लंबी लड़ाई का आखिरकार एक बहुत ही शांतिपूर्ण अंत हो गया है।
लोकतंत्र की बड़ी जीत: इस पूरे व्यापक आंदोलन का सबसे बड़ा परिणाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के रूप में सामने आया है। इस भारी दबाव के कारण शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया है। इस बड़ी घटना पर सोनम वांगचुक ने खुशी जताते हुए अपने एक ट्वीट में लिखा कि यह लोकतंत्र की जीत है। उन्होंने इसे सीधी लोकतंत्र की जीत बताया जो सीधे तौर पर सड़कों पर किए गए संघर्ष से आई है। उन्होंने इसे शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत बताते हुए CJP और देश की Gen Z को बधाई दी है।











































