उत्तरी सीरिया के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अबू दुहूर एयरबेस पर इजरायल द्वारा की गई एयरस्ट्राइक ने हलचल मचा दी है। इस पूरे मामले में सीरिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत टॉम बराक का एक बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने खुलासा किया कि इजरायल ने मंगलवार को किए गए इस हमले से पहले अपने करीबी सहयोगी अमेरिका को भी सूचित नहीं किया था। बिना किसी पूर्व सूचना के किए गए इस हमले से इजरायल और नाटो के प्रमुख सदस्य देश तुर्की के बीच सीधा सैन्य संघर्ष छिड़ने का जोखिम उत्पन्न हो गया था। इस एयरस्ट्राइक में सीरियाई एयरबेस के ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है, यद्यपि कोई जनहानि दर्ज नहीं हुई है। अमेरिकी राजदूत ने इसे तुर्की को भड़काने की एक खतरनाक कोशिश करार दिया है।
इजरायल का अपना दावा इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दफ्तर ने अपनी त्वरित सैन्य कार्रवाई पर सफाई पेश की है। उनके अनुसार सीरिया क्षेत्रीय शांति समझौते का सीधा उल्लंघन करने की दिशा में आगे बढ़ रहा था। इजरायली खुफिया एजेंसियों को अंदेशा था कि दमिश्क प्रशासन इस एयरबेस पर तुर्की के सैनिकों की तैनाती को औपचारिक मंजूरी देने वाला था। अमेरिका के राजदूत टॉम बराक ने भी स्वीकार किया कि इजरायल के पास ऐसी कोई सूचना हो सकती है। उन्होंने कहा कि मुमकिन है कि मैदान में तैनात किसी इजरायली सैन्य कमांडर ने अपने स्तर पर इसे रोकने का फैसला ले लिया हो। लेकिन सबसे गलत बात यह रही कि इजरायल ने अपने इस बड़े सैन्य कदम के बारे में न तो वाशिंगटन को बताया और न ही अंकारा को कोई चेतावनी दी।
सैन्य टकराव की आशंका अबू दुहूर एयरबेस की भौगोलिक स्थिति तुर्की की सीमा से महज 80 किलोमीटर की दूरी पर है। इतने नजदीक बने एयरबेस पर बमबारी होने से दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं। टॉम बराक ने स्थिति की संवेदनशीलता समझाते हुए कहा कि जब तुर्की की वायुसेना अपनी सीमा के पास अज्ञात फाइटर जेट्स को देखती है, तो उनके लड़ाकू विमान भी एक्टिव हो जाते हैं। अगर तुर्की को जेट्स के इरादे का पता न हो तो सीधे हवाई युद्ध छिड़ सकता है। उन्होंने 2015 की ऐतिहासिक घटना की याद दिलाई जब तुर्की ने अपनी सीमा में घुसे एक रूसी लड़ाकू विमान को मार गिराया था। ऐसी ही किसी गलतफहमी के कारण इस बार भी इजरायल और तुर्की के बीच बहुत बड़ा सैन्य संकट पैदा हो सकता था।
तुर्की प्रतिनिधिमंडल का दौरा सीरियाई सेना के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर इस घटना से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण तथ्य उजागर किया है। उन्होंने बताया कि इस इजरायली हवाई हमले से ठीक एक दिन पहले तुर्की का एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल वहां आया था। प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर-पश्चिमी सीरिया के इदलिब प्रांत में स्थित इस एयरबेस पर चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया था। अमेरिकी दूत टॉम बराक ने कहा कि इजरायल ने वहां तुर्की की मौजूदगी पर आपत्ति जताई थी। हालांकि अमेरिका ने अपनी तरफ से स्वतंत्र जांच करके यह साफ कर दिया था कि एयरबेस पर कोई सैन्य गतिविधियां नहीं चल रही थीं। अमेरिका का मानना है कि ऐसी अनचाही गलतियों का नतीजा बेहद भयावह हो सकता है।
तुर्की-सीरिया सैन्य गठबंधन तुर्की लगातार सीरियाई सशस्त्र बलों के पुनर्गठन और उन्हें आधुनिक बनाने के काम में जुटा हुआ है। तुर्की सीरियाई सैनिकों को विशेष प्रशिक्षण देने के साथ-साथ सैन्य साजो-सामान और आवश्यक रसद भी मुहैया करा रहा है। बीते वर्ष दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक सैन्य समझौते पर हस्ताक्षर करके अपनी रक्षा साझेदारी को कानूनी रूप दिया था। तुर्की के शीर्ष रणनीतिकारों का मानना है कि सीरिया की सुरक्षा तुर्की की अपनी सीमाओं की सुरक्षा से सीधी जुड़ी हुई है। इसी वजह से सीरिया के भीतर तुर्की के बढ़ते सैन्य आधार को इजरायल अपने अस्तित्व और रणनीतिक हितों के लिए एक बड़े खतरे के रूप में देख रहा है। यही अविश्वास दोनों देशों के बीच तनाव को लगातार बढ़ा रहा है।
क्षेत्रीय शांति पर खतरा 2024 के अंत में बशर अल-असद की सत्ता समाप्त होने के बाद से ही इजरायल सीरिया की नई सरकार पर भरोसा नहीं कर रहा है। यद्यपि दमिश्क के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने स्पष्ट कहा है कि वे इजरायल के साथ कोई युद्ध नहीं चाहते, फिर भी इजरायली हमले जारी हैं। इजरायल ने सीरियाई क्षेत्र में सैकड़ों सर्जिकल स्ट्राइक की हैं और संयुक्त राष्ट्र के बफर जोन पर अब भी कब्जा जमा रखा है। दूसरी ओर, हाल ही में पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते करने वाले तुर्की ने इस हमले पर कोई तत्काल सैन्य जवाबी कार्रवाई तो नहीं की है, लेकिन दोनों देशों के कूटनीतिक संबंध बेहद निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। बिना बताए किए गए हमलों से मिडिल ईस्ट में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।













































