अयोध्या स्थित प्रसिद्ध राम मंदिर में चढ़ावे के गबन के आरोप सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूर्णकालिक सीईओ की नियुक्ति करने का अहम निर्णय लिया गया था। इस बड़े फैसले के बाद से ही नए पद हेतु योग्य उम्मीदवारों से आवेदन मंगाने की प्रक्रिया बहुत तेजी के साथ शुरू कर दी गई थी। श्रीराम जन्मभूमि न्यास को इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद के लिए देश भर से करीब 5,200 आवेदन प्राप्त हुए थे। इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदनों की गहन समीक्षा करने के बाद न्यास ने अपनी चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
18 उम्मीदवारों का चयन: प्राप्त सभी आवेदनों में से राम जन्मभूमि न्यास ने बारीकी से छंटनी करते हुए कुल 18 योग्य उम्मीदवारों को अंतिम चरण के लिए शॉर्टलिस्ट किया है। इन छांटे गए 18 प्रमुख उम्मीदवारों में दक्षिण भारत के बड़े और प्रसिद्ध मंदिरों से जुड़े कई पूर्व वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। इन अनुभवी अधिकारियों के मंदिर प्रबंधन के पुराने अनुभवों को ध्यान में रखते हुए उन्हें इस सूची में शामिल किया गया है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर सीईओ नियुक्त करने की इस नई योजना को लेकर अयोध्या के कुछ स्थानीय संतों और धार्मिक गुरुओं की ओर से विरोध की आवाजें भी उठी हैं।
नए सचिव पद का प्रस्ताव: प्रशासनिक फेरबदल के इसी दौर के बीच राम जन्मभूमि न्यास ने एक और बड़ा निर्णय लेते हुए जगदीश आफले को अपना पहला सचिव नियुक्त करने का प्रस्ताव पेश किया है। इस नए प्रशासनिक प्रस्ताव पर आने वाले दो सितंबर को आयोजित होने वाली न्यास की अगली महत्वपूर्ण बैठक में आधिकारिक पुष्टि होने की पूरी संभावना है। दो सितंबर की बैठक के बाद न्यास के नए सचिव के रूप में जगदीश आफले के नाम पर अंतिम मुहर लग जाएगी। इसके साथ ही मंदिर के दैनिक कामकाज और वित्तीय प्रबंधन में नए नियम लागू किए जाने की योजना है।
चंपत राय का प्रशासनिक इतिहास: गौरतलब है कि साल 2019 में देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने के बाद चंपत राय को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का महासचिव बनाया गया था। कुल 15 सदस्यों वाले इस शक्तिशाली ट्रस्ट में अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और निर्मोही अखाड़े के महंत दीनेन्द्र दास जैसे प्रमुख व्यक्ति शामिल थे। इसके अलावा अयोध्या के राजा कहे जाने वाले विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र (जिन्हें अब स्वर्गवास हो चुका है) और अयोध्या के जिलाधिकारी पदेन सदस्य के रूप में इसमें शामिल रहे हैं।
प्रबंधन में चंपत राय की भूमिका: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की स्थापना के समय से ही इसके महासचिव चंपत राय ही मंदिर निर्माण और चढ़ावे से जुड़े सभी छोटे-बड़े कामकाज की प्रत्यक्ष रूप से देखरेख करते थे। वहीं इस दौरान डॉ. अनिल मिश्रा भी पूरे वक्त चंपत राय के साथ रहकर मंदिर प्रबंधन के कार्यों में सहयोग करते थे। लेकिन चढ़ावा चोरी विवाद में नाम आने के बाद जब एसआईटी की जांच शुरू हुई तो दोनों वरिष्ठ नेताओं ने तत्काल प्रभाव से अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था और चंपत राय चार महीने के चातुर्मास साधना के लिए चले गए थे।
SIT की विस्तृत रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश शासन को हाल ही में सौंपी गई एसआईटी की अंतिम विस्तृत जांच रिपोर्ट को अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आगे की कार्रवाई हेतु सौंप दिया गया है। इस एसआईटी रिपोर्ट में पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को क्लीन चिट देते हुए पूर्णतः निर्दोष पाया गया है। जबकि इस गबन मामले में गिरफ्तार किए गए आठ अन्य आरोपियों—अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू को ही गबन का दोषी ठहराया गया है।
















































