चीन ने रविवार को एक बेहद चौंकाने वाला फैसला लेते हुए अपने बेहद महत्वाकांक्षी Chang’e-7 चंद्र मिशन को अचानक टाल दिया है। चीन जैसे शक्तिशाली देश का इस तरह एक कदम पीछे खींचना बहुत बड़ी बात मानी जा रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। चीन की सरकारी एजेंसी Xinhua के अनुसार यह मिशन अंतरिक्ष के क्षेत्र में तकनीकी महारत हासिल करने और देश की वैज्ञानिक क्षमता को साबित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया था।
वेनचांग लॉन्च पैड और खोज योजना: तय योजना के मुताबिक यान को चीन के प्रसिद्ध द्वीप Hainan में स्थित Wenchang अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र से चांद की ओर उड़ान भरनी थी। इस मिशन का प्राथमिक लक्ष्य चंद्रमा पर मौजूद बर्फ की खोज करना और वहां की भौगोलिक स्थितियों की वैज्ञानिक जांच-पड़ताल करना था। लेकिन प्रक्षेपण से ठीक पहले आई इस रुकावट के बाद फिलहाल इस पूरे प्रोजेक्ट पर ब्रेक लग गया है और मिशन की आगे की राह रुक गई है।
सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसला: स्पेस एजेंसी द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि वर्तमान समय में इस मिशन को लॉन्च करने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि ‘व्यापक आकलन’ के बाद ही यह कड़ा कदम उठाया गया है, ताकि ‘सावधानी, विश्वसनीयता और मिशन की पूर्ण सफलता’ सुनिश्चित की जा सके। इसी कारण इस साल निर्धारित समय सीमा के भीतर इस स्पेस प्रोजेक्ट को शुरू नहीं किया जा सकेगा।
पौराणिक नाम और छठा मिशन: चीन के इस महत्वाकांक्षी चांग ई-7 मिशन का नाम चीन की पौराणिक संस्कृति में चंद्रमा की देवी मानी जाने वाली चांग ई के नाम पर रखा गया है। यह चंद्रमा का अध्ययन करने के लिए चीन की ओर से तैयार किया गया सातवां बड़ा मिशन था। इससे पहले साल 2024 में चीन का Chang’e-6 मिशन सफलतापूर्वक चंद्रमा पर उतरा था और वहां से मिट्टी व पत्थरों के अमूल्य नमूने लेकर सुरक्षित धरती पर वापस आया था।
दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ की तलाश: इस चांग ई-7 मिशन को खासतौर पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जमी हुई बर्फ यानी पानी का पता लगाने के लिए निर्मित किया गया था। चंद्रमा का यह रहस्यमयी हिस्सा America के लिए भी वैज्ञानिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि अभी यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है कि चीन इस मिशन को दोबारा कब लॉन्च करने की कोशिश करेगा, क्योंकि इस देरी के पीछे के सटीक कारणों का खुलासा नहीं हुआ है।
चांद पर बस्तियां बसाने का मुकाबला: अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में इस समय America और चीन के बीच चांद के दक्षिणी ध्रुव पर इंसानी बस्तियां स्थापित करने की जबरदस्त प्रतिस्पर्धा चल रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि चांद के इस क्षेत्र के अंधेरे गड्ढों में बड़ी मात्रा में जमा हुआ पानी उपलब्ध है। यदि Chang’e-7 लॉन्च होता तो यह पहला ऐसा मिशन बनता जो चंद्रमा की सतह पर सीधे पानी का विश्लेषण करता, लेकिन इसके टलने से यह खोज फिलहाल लटक गई है।













































