नेपाल में आई भीषण बाढ़ के कारण मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है और अब तक 1 हजार से अधिक मौतों की पुष्टि हुई है। इस भयानक त्रासदी के बाद से 5 हजार से ज्यादा लोग अभी भी पूरी तरह से लापता हैं, जिनका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा। आपदा में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए 20 हजार जवान और 20 से ज्यादा हेलीकॉप्टर निरंतर ऑपरेशन चला रहे हैं। नेपाल के सुरक्षा बलों के साथ Indian Army के जवान भी रात-दिन राहत कार्यों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मलबे और दलदल में दबे लोगों को खोजने के लिए लगातार रेस्क्यू अभियान को तेज किया जा रहा है।
रेस्क्यू में जुटीं सभी एजेंसियां: नेपाल प्रशासन ने अपने सभी राष्ट्रीय संसाधनों को आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के लिए काम पर लगा दिया है। देश की आर्मी, पुलिस और सशस्त्र बल के जवानों को संयुक्त रूप से इस सबसे बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन में तैनात किया गया है। इस कठिन परिस्थिति में भारतीय सेना भी पूरी मुस्तैदी के साथ नेपाल की मदद में आगे आई है और हर संभव सहायता दे रही है। नेपाल के विभिन्न इलाकों में फंसे लोगों तक भोजन, पानी और मेडिकल मदद पहुंचाने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि लगातार खराब हो रहे मौसम और मलबे के कारण राहत अभियान में काफी बाधाएं आ रही हैं।
भारतीय सेना की मदद और टनल ऑपरेशन: Indian Army नेपाल में टनल रेस्क्यू ऑपरेशन को संचालित कर रही है और प्रभावित क्षेत्रों के लिए बेली ब्रिज भी उपलब्ध करा रही है। भारत ने 4 खेपों के माध्यम से अब तक 68.5 टन से अधिक की आपातकालीन सहायता सामग्री नेपाल को भेजी है। Kathmandu स्थित प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री के अनुसार, टनल रेस्क्यू के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकी दक्षता का सहारा लिया जा रहा है। Chilime और Langtang की हाइड्रोपावर साइटों पर 24 सदस्यीय भारतीय टनल रेस्क्यू टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रही है। यह भारतीय दल दो शिफ्टों या यूनिट्स में बंटकर सुरंगों के अंदर फंसी जिंदगियों को सुरक्षित निकालने में लगा है।
फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और फ्रीजर यूनिट्स की मदद: नेपाल में भीषण तबाही के बाद बड़े पैमाने पर शवों को सुरक्षित रखने के लिए ‘फ्रीजर यूनिट्स’ की गंभीर कमी पैदा हो गई है। इसके साथ ही वहां त्वरित ‘डीएनए टेस्टिंग किट्स’ का भी अभाव है, जिससे शवों की पहचान करने में काफी देरी हो रही है। भारत सरकार ने नेपाल की इस आवश्यकता को समझते हुए डॉक्टरों और विशेषज्ञों की टीम को मौके पर भेजा है। डीएनए प्रोफाइलिंग के कार्य को अंजाम देने के लिए 18-19 फॉरेंसिक विशेषज्ञों और मेडिकल डॉक्टरों की टीम नेपाल पहुंच चुकी है। यह टीम वहां स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर शवों की पहचान और अन्य चिकित्सकीय प्रक्रियाओं को पूरा करा रही है।
भौगोलिक बाधाएं और सुरंगों का हाल: नेपाल के पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में वहां की कठिन और दुर्गम जियोग्राफी सबसे बड़ी रुकावट बनकर सामने आ रही है। हिमालयन रेंज का हिस्सा होने के कारण नेपाल चारों तरफ से ऊंची-ऊंची पहाड़ियों और गहरी संकरी घाटियों से घिरा हुआ है। ड्रोन कैमरों की मदद से इलाकों का सर्वेक्षण कर रहे विशेषज्ञों ने बताया कि वहां सुरंगों में मिट्टी बेहद घनी भरी हुई है। मिट्टी का जमाव ऐसा है जैसे किसी ट्यूब के अंदर टूथपेस्ट पूरी तरह से दबाकर भर दिया गया हो। ऐसी परिस्थितियों में टनल के भीतर प्रवेश करना और मलबा हटाकर रास्ता बनाना रेस्क्यू टीमों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
खतरनाक लैंडिंग और रस्सियों का सहारा: Rasuwa और Nuwakot जैसे प्रभावित जिले Trishuli और Bhote Koshi नदियों की बेहद संकरी और खतरनाक घाटियों में स्थित हैं। लगातार हो रहे लैंडस्लाइड और 10 से 15 फीट गहरे जमा कीचड़ के कारण हेलीकॉप्टर लैंड कराने के लिए समतल जगह नहीं मिल पा रही। पूरा बाढ़ प्रभावित इलाका No Landing Zone बन चुका है, जिससे पायलटों को हेलीकॉप्टर हवा में ही स्थिर रखने पड़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में जवानों को रस्सियों के सहारे नीचे उतरना पड़ रहा है, जो कि एक बेहद जोखिम भरा कार्य है। राहत कार्यों की गति बढ़ाने के लिए अब कम से कम 16 से 20 हेलीकॉप्टरों को रेस्क्यू मिशन में लगाया गया है।













































