Uttar Pradesh के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को राज्य के नागरिकों के लिए एक पाती जारी कर अपना महत्वपूर्ण संदेश दिया है। इस संदेश में उन्होंने आगामी 4 सितम्बर 2026 को मनाई जाने वाली श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की अग्रिम हार्दिक बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता से आह्वान किया है कि वे राज्य के विकास और विरासत के संरक्षण के लिए अपना संकल्प मजबूत करें। उन्होंने कहा कि राज्य को विकसित बनाने के लिए श्रीकृष्ण के बताए मार्ग पर चलना बेहद आवश्यक है। युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए आगे आना चाहिए।
सत्य और धर्म का प्रस्फुटन: मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा कि Mathura के कारागार में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की अर्धरात्रि को भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ था। उनके प्राकट्य के साथ ही समाज में फैले असत्य और अन्याय के गहरे अंधकार का नाश हुआ तथा सत्य और धर्म का प्रकाश चारों ओर फैल गया। भगवान की बाल लीलाओं का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि ये लीलाएं मानव मन को शांति और आनंद प्रदान करती हैं। श्रीकृष्ण ने अपनी बाल लीलाओं के माध्यम से पूरी मानव जाति को प्रेम, समरसता और अधर्म पर धर्म की अंततः विजय होने का अमर संदेश दिया है।
प्रकृति और कृषि संरक्षण: भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की घटना को याद करते हुए सीएम योगी ने इसे सामूहिक सहकारिता का सबसे बड़ा उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस लीला के जरिए उन्होंने प्रकृति, पशुधन और कृषि पर आधारित ग्रामीण जीवन व्यवस्था के संरक्षण का संदेश दिया था। उन्होंने समाज को सिखाया कि जब पूरा समाज एक साथ मिलकर प्रयास करता है तो बड़े से बड़े संकट को भी टाला जा सकता है। Vrindavan, Barsana, Goverdhan और Gokul जैसे पावन क्षेत्र आज भी उस दिव्य और पवित्र चेतना को अपने भीतर समेटे हुए हैं।
सुदामा संग मित्रता का उदाहरण: सीएम योगी ने कहा कि श्रीकृष्ण किसी वर्ग विशेष या कुलीनता के नहीं, बल्कि संपूर्ण सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। उन्होंने Sandipani Rishi के आश्रम में शिक्षा ग्रहण की और सुदामा जैसे निर्धन मित्र को अपने बराबर का स्थान दिया। उनकी मित्रता यह दर्शाती है कि सच्चे रिश्तों की बुनियाद धन, पद या सामाजिक प्रतिष्ठा पर नहीं, बल्कि केवल सच्चे प्रेम और आत्मीयता पर टिकी होती है। आज के दौर में जब समाज में विषमताएं बढ़ रही हैं, तब श्रीकृष्ण का यह समरसता का संदेश अत्यधिक प्रासंगिक और व्यावहारिक हो जाता है।
अंतिम व्यक्ति तक कल्याणकारी योजनाएं: राज्य सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए सीएम योगी ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन दर्शन ही उनके शासन का मुख्य आधार है। सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश को गरीबी से मुक्त करने के साथ-साथ युवाओं को उनकी प्रतिभा के अनुसार रोजगार देने का काम किया जा रहा है। अन्नदाता किसानों को आर्थिक संबल प्रदान किया जा रहा है और बेटियों को बेटों के समान आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। लोककल्याण की इसी भावना को धरातल पर उतारने का निरंतर प्रयास जारी है।
सनातन चेतना के जीवंत केंद्र: गीता के उपदेशों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण द्वारा दिखाया गया कर्म और ज्ञान का मार्ग हर युग में प्रासंगिक रहेगा। निष्काम कर्म का सिद्धांत मनुष्य को अपनी दैनिक चुनौतियों का सामना करने और कर्तव्यों का पालन करने की शक्ति देता है। उत्तर प्रदेश की यह पवित्र भूमि श्रीकृष्ण के संदेशों और उनकी अलौकिक लीलाओं से सदैव धन्य रही है। Nandgaon और Mathura जैसे स्थान सनातन संस्कृति की आत्मा हैं, जो पूरे विश्व को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं और हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं।













































