ग्रहों की वर्तमान स्थिति और आगामी परिवर्तन: 21 सितंबर 2026 को वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य कन्या राशि में गोचर कर रहे हैं और उत्तराफाल्गुनी से हस्त नक्षत्र क्षेत्र में स्थित हैं। सूर्य आगामी 17 अक्टूबर को तुला राशि में प्रवेश करेंगे। चंद्रमा आज सुबह 11 बजकर 16 मिनट तक धनु राशि में रहने के बाद मकर राशि में प्रवेश कर चुके हैं और 23 सितंबर को दोपहर बाद कुंभ राशि में जाएंगे। मंगल इस समय कर्क राशि में नीच स्थिति में हैं और पुनर्वसु तथा पुष्य नक्षत्र के प्रभाव में हैं। मंगल 12 नवंबर को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। बुध कन्या राशि में उच्च स्थिति में हैं और आज रात 10 बजकर 45 मिनट से चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। बुध 26 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर तुला राशि में पहुंचेंगे। देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में उच्च स्थिति में हैं और पुष्य नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं। गुरु 31 अक्टूबर को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। शुक्र तुला राशि में अपनी स्वराशि में हैं और स्वाति नक्षत्र में स्थित हैं; 26 सितंबर को वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। वक्री शनि मीन राशि में रेवती नक्षत्र के प्रभाव में हैं और वर्ष 2026 में इसी राशि में रहेंगे। राहु कुंभ राशि के पूर्वभाद्रपद नक्षत्र में तथा केतु सिंह राशि के उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं। राहु-केतु का 2026 में राशि परिवर्तन नहीं होगा और दोनों इसी राशि में बने रहेंगे।
ग्रह स्थिति एवं नक्षत्र चार्ट (21.09.2026)
| क्र.सं. | ग्रह | वर्तमान राशि | वर्तमान नक्षत्र | आगामी राशि परिवर्तन का समय / विवरण |
|---|---|---|---|---|
| 1 | सूर्य | कन्या | उत्तराफाल्गुनी / हस्त | 17 अक्टूबर 2026: तुला राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 2 | चंद्रमा | धनु (सुबह 11:16 तक) ➔ मकर | उत्तराषाढ़ा | 23 सितंबर 2026: दोपहर बाद कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 3 | मंगल | कर्क (नीच राशि) | पुनर्वसु / पुष्य | 12 नवंबर 2026: सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 4 | बुध | कन्या (उच्च राशि) | चित्रा (आज रात 10:45 से) | 26 सितंबर 2026: दोपहर 12:31 बजे तुला राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 5 | बृहस्पति (गुरु) | कर्क (उच्च राशि) | पुष्य | 31 अक्टूबर 2026: सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 6 | शुक्र | तुला (स्वराशि) | स्वाति | 26 सितंबर 2026: वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। |
| 7 | शनि (वक्री) | मीन | रेवती | वर्ष 2026 में इसी राशि में रहेंगे (चाल वक्री है)। |
| 8 | राहु | कुंभ | पूर्वभाद्रपद | राहु-केतु का राशि परिवर्तन वर्ष 2026 में नहीं है, ये इसी राशि में बने रहेंगे। |
| 9 | केतु | सिंह | उत्तराफाल्गुनी | यह पूरे वर्ष सिंह राशि में ही गोचर करेंगे। |
मुख्य खगोलीय व ज्योतिषीय विश्लेषण:
21 सितंबर को चंद्रमा का राशि परिवर्तन: चंद्रमा को वैदिक ज्योतिष में मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का कारक माना जाता है। चंद्रमा लगभग ढाई दिन में राशि बदलते हैं, इसलिए उनके गोचर का प्रभाव अपेक्षाकृत जल्दी दिखाई देने वाला माना जाता है। आज सुबह 11 बजकर 15-16 मिनट के आसपास चंद्रमा धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश कर चुके हैं। मकर राशि पर शनि का स्वामित्व है और चंद्रमा यहां 23 सितंबर की रात 9 बजकर 57 मिनट तक रहेंगे। इसके बाद चंद्रमा कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। मकर राशि में चंद्रमा का यह गोचर कुछ राशियों के लिए मानसिक दबाव, कामकाज में तनाव, अचानक खर्च, अनिश्चित परिस्थितियों और विरोधियों से जुड़ी चुनौतियां बढ़ाने वाला माना जा रहा है। इसलिए इस अवधि में जल्दबाजी के बजाय योजनाबद्ध तरीके से काम करना और आर्थिक तथा व्यक्तिगत मामलों में सावधानी बरतना उपयोगी रहेगा।
मिथुन राशि पर प्रभाव: मिथुन राशि से मकर राशि आठवें भाव में आती है। ज्योतिष में आठवां भाव अचानक होने वाले बदलाव, गोपनीय विषयों, अनिश्चितताओं और अप्रत्याशित परिस्थितियों से संबंधित माना जाता है। चंद्रमा के इस गोचर के दौरान मिथुन राशि के जातकों को कामकाज से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए। अपनी निजी योजनाओं, महत्वपूर्ण जानकारियों या गोपनीय बातों को हर व्यक्ति के साथ साझा करने से बचना बेहतर रहेगा। अचानक कोई खर्च सामने आ सकता है, इसलिए बजट को ध्यान में रखकर आर्थिक फैसले लेना जरूरी होगा। खान-पान में लापरवाही से भी बचना चाहिए। मानसिक बेचैनी या तनाव महसूस होने पर भगवान शिव का ध्यान और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप मन को स्थिर रखने में सहायक माना गया है।
सिंह राशि पर प्रभाव: सिंह राशि के लिए मकर राशि छठे भाव में आती है। वैदिक ज्योतिष में छठे भाव का संबंध रोग, ऋण, प्रतिस्पर्धा और शत्रुओं से माना जाता है। ऐसे में चंद्रमा के मकर राशि में रहने की अवधि में सिंह राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों से सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। किसी विवाद को अनावश्यक रूप से बढ़ाने के बजाय अपनी जिम्मेदारियों और निर्धारित कार्यों पर ध्यान देना बेहतर रहेगा। नौकरी या व्यवसाय से जुड़े मामलों में भावनात्मक प्रतिक्रिया देने से बचना उपयोगी हो सकता है। स्वास्थ्य को लेकर भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। नियमित दिनचर्या, पर्याप्त आराम और संतुलित खान-पान इस दौरान विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहेंगे।
कुंभ राशि पर प्रभाव: कुंभ राशि के लिए मकर राशि बारहवें भाव में आती है। बारहवें भाव को ज्योतिष में खर्च, विदेश, एकांत और अतिरिक्त व्यय से संबंधित माना जाता है। चंद्रमा के इस भाव में गोचर के दौरान कुंभ राशि के जातकों के सामने अनावश्यक खर्च बढ़ने की स्थिति बन सकती है। इसलिए बिना आवश्यकता खर्च करने से बचना और अपने बजट पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। कोई बड़ा आर्थिक फैसला लेने से पहले उसके सभी पहलुओं पर विचार करना बेहतर रहेगा। मानसिक रूप से किसी बात को लेकर अत्यधिक चिंता करने के बजाय जरूरी कामों को प्राथमिकता देकर एक-एक करके पूरा करना अधिक उपयोगी रहेगा। विदेश, यात्रा या दूरस्थ स्थानों से जुड़े मामलों में भी योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ना बेहतर होगा।
बुध का नक्षत्र परिवर्तन और विशेष प्रभाव: 21 सितंबर की रात 10 बजकर 45 मिनट पर बुध मंगल के चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। बुध कन्या राशि में उच्च स्थिति में हैं और उनका यह नक्षत्र परिवर्तन ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क, गणना, व्यापार, संचार और निर्णय क्षमता का कारक ग्रह माना जाता है। चित्रा नक्षत्र में बुध का प्रवेश इन क्षेत्रों से जुड़े मामलों में सक्रियता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। इसी क्रम में 26 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर बुध तुला राशि में प्रवेश करेंगे। इस बदलाव के बाद बुध की स्थिति में होने वाला परिवर्तन कई राशियों के कार्य, व्यापार, शिक्षा और आर्थिक मामलों पर प्रभाव डाल सकता है।
बुधादित्य योग और नीचभंग राजयोग: वर्तमान ग्रह स्थिति में कर्क राशि में उच्च के बृहस्पति और नीच के मंगल एक साथ स्थित हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इनकी स्थिति से नीचभंग राजयोग का निर्माण माना जा रहा है। वहीं कन्या राशि में सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग बना हुआ है। सूर्य और बुध की यह स्थिति बुद्धि, प्रशासनिक क्षमता, निर्णय, संचार और कार्यक्षेत्र से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। दूसरी ओर कर्क राशि में गुरु और मंगल की स्थिति को परिस्थितियों में बदलाव और पहले से कमजोर माने जा रहे प्रभावों में सुधार से जोड़कर देखा जाता है। आने वाले दिनों में बुध, शुक्र, गुरु और सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ग्रहों की यह तस्वीर लगातार बदलती रहेगी।
आगे होने वाले प्रमुख राशि परिवर्तन: आने वाले समय में सबसे पहले 23 सितंबर को चंद्रमा कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद 26 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर बुध तुला राशि में जाएंगे और इसी दिन शुक्र तुला से वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। 17 अक्टूबर को सूर्य तुला राशि में पहुंचेंगे। इसके बाद 31 अक्टूबर को बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करेंगे, जबकि मंगल 12 नवंबर को कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में पहुंचेंगे। शनि वर्ष 2026 में मीन राशि में ही वक्री अवस्था में रहेंगे और राहु कुंभ तथा केतु सिंह राशि में पूरे वर्ष गोचर करेंगे। इस तरह सितंबर से नवंबर के बीच होने वाले ये ग्रह परिवर्तन विभिन्न राशियों के लिए कार्य, धन, संबंध, स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति से जुड़े ज्योतिषीय प्रभावों में बदलाव का आधार बनेंगे।













































