आज का दिन: सोमवार, 21 सितंबर 2026 को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के साथ दिन की शुरुआत होगी और रात 08:00 बजे के बाद एकादशी तिथि लग जाएगी। आज सोमवार होने के कारण भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक और सोमवार व्रत का विशेष महत्व रहेगा। दिनभर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा और शाम 04:06 बजे तक शोभन योग रहेगा, इसके बाद अतिगण्ड योग शुरू होगा। रवि योग का संयोग पूरे दिन बना रहेगा।
सोमवार व्रत का महत्व: धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर शिवलिंग पर जल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने से मन को शांति और सकारात्मकता प्राप्त होती है। सोमवार का संबंध चंद्रमा से भी माना जाता है और भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान होने के कारण शिव आराधना को चंद्रमा से जुड़े ज्योतिषीय उपायों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। शिवजी के इसी स्वरूप के कारण उन्हें चंद्रशेखर नाम से भी जाना जाता है।
आज की शिव पूजा विधि: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए सोमवार व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवालय में जाकर शिवलिंग पर सबसे पहले स्वच्छ जल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, शहद आदि से अभिषेक किया जा सकता है। अभिषेक के बाद साफ जल चढ़ाकर बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें। पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। अंत में भगवान शिव की आरती करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें। सुबह के समय के साथ प्रदोष काल में शिव आराधना करना भी शुभ माना जाता है।
चंद्रमा और सोमवार का संबंध: ज्योतिषीय मान्यता में चंद्रमा को मन और माता का कारक ग्रह माना गया है। सोमवार का व्रत और भगवान शिव की आराधना चंद्रमा से जुड़े दोषों को शांत करने के उपायों में शामिल मानी जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार चंद्रमा ने भगवान शिव की आराधना की थी, जिसके बाद शिवजी ने उन्हें अपने मस्तक पर धारण किया। इसी कारण शिवजी का एक नाम चंद्रशेखर भी है।
आज के सूर्य और चंद्रमा: आज सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे, जबकि चंद्रमा धनु राशि से आगे बढ़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इससे दिन के दौरान विचारों, निर्णयों और मानसिक स्थिति में बदलाव का प्रभाव देखने को मिल सकता है।
सूर्य का नक्षत्र: आज सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेंगे। उत्तराफाल्गुनी आकाश मंडल का 12वां नक्षत्र माना जाता है और इसका विस्तार सिंह राशि के 26 डिग्री 40 मिनट से कन्या राशि के 10 डिग्री तक बताया जाता है। इसके स्वामी सूर्य देव हैं और इसके अधिदेव अर्यमा माने जाते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस नक्षत्र से जुड़े जातकों में तेज, महत्वाकांक्षा, परोपकार की भावना और नेतृत्व क्षमता जैसे गुण देखे जाते हैं।
पंचांग विवरण — 21 सितंबर 2026, सोमवार
दिन (वार): सोमवार
शक संवत: 1948, परभाव
विक्रम संवत: 2083, सिद्धार्थी
मास: भाद्रपद
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: दशमी रात 08:00 बजे तक, इसके बाद एकादशी तिथि का आरंभ
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा, पूर्ण रात्रि तक
योग: शोभन शाम 04:06 बजे तक, इसके बाद अतिगण्ड योग
करण: तैतिल सुबह 06:58 बजे तक, इसके बाद गर रात 08:00 बजे तक, फिर वणिज करण
ऋतु: शरद ऋतु
अयन: दक्षिणायन
चंद्र राशि: धनु, इसके बाद मकर
सूर्य राशि: कन्या
दिशाशूल: पूर्व दिशा
रवि योग: पूरे दिन
आज के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:35 बजे से 05:22 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:16 बजे से 03:05 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:20 बजे से 06:44 बजे तक
अमृत काल: रात 12:02 बजे से 01:48 बजे तक, 22 सितंबर
निशिता मुहूर्त: रात 11:51 बजे से 12:39 बजे तक, 22 सितंबर
रवि योग: पूरे दिन
आज के अशुभ मुहूर्त
राहुकाल: सुबह 07:41 बजे से 09:12 बजे तक
यमगण्ड: सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 01:46 बजे से 03:17 बजे तक
विडाल योग: सुबह 06:10 बजे से रात 12:31 बजे तक, 22 सितंबर
दुर्मुहूर्त: दोपहर 12:39 बजे से 01:28 बजे तक
वर्ज्य: दोपहर 01:25 बजे से 03:11 बजे तक
दिशाशूल: पूर्व दिशा
सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्रोदय-चंद्रास्त
सूर्योदय: सुबह 06:10 बजे
सूर्यास्त: शाम 06:20 बजे
चंद्रोदय: दोपहर 03:16 बजे
चंद्रास्त: रात 01:40 बजे, 22 सितंबर
सोमवार का दिन का चौघड़िया
अमृत: सुबह 06:08 बजे से 07:40 बजे तक
काल: सुबह 07:40 बजे से 09:11 बजे तक
शुभ: सुबह 09:11 बजे से 10:42 बजे तक
रोग: सुबह 10:42 बजे से दोपहर 12:14 बजे तक
उद्वेग: दोपहर 12:14 बजे से 01:45 बजे तक
चर: दोपहर 01:45 बजे से 03:16 बजे तक
लाभ: दोपहर 03:16 बजे से 04:47 बजे तक
अमृत: शाम 04:47 बजे से 06:19 बजे तक
सोमवार का रात का चौघड़िया
चर: शाम 06:19 बजे से 07:48 बजे तक
रोग: शाम 07:48 बजे से रात 09:16 बजे तक
काल: रात 09:16 बजे से 10:45 बजे तक
लाभ: रात 10:45 बजे से 12:14 बजे तक
उद्वेग: रात 12:14 बजे से 01:43 बजे तक
शुभ: रात 01:43 बजे से 03:11 बजे तक
अमृत: रात 03:11 बजे से 04:40 बजे तक
चर: सुबह 04:40 बजे से 06:09 बजे तक
भारत के राज्यों की राजधानियों और जम्मू-कश्मीर में राहुकाल
महत्वपूर्ण: राहुकाल का वास्तविक समय स्थान के सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है। नीचे दिए गए समय आपके उपलब्ध विवरण के अनुसार रखे गए हैं और उत्तर प्रदेश को सबसे ऊपर रखा गया है।
| राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | राजधानी / मुख्य शहर | राहुकाल — 21 सितंबर 2026 |
|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | लखनऊ | सुबह 07:25 से 08:56 बजे तक |
| जम्मू और कश्मीर | श्रीनगर | सुबह 07:48 से 09:20 बजे तक |
| आंध्र प्रदेश | अमरावती | सुबह 07:32 से 09:03 बजे तक |
| अरुणाचल प्रदेश | ईटानगर | सुबह 06:21 से 07:51 बजे तक |
| असम | दिसपुर / गुवाहाटी | सुबह 06:33 से 08:03 बजे तक |
| बिहार | पटना | सुबह 07:03 से 08:34 बजे तक |
| छत्तीसगढ़ | रायपुर | सुबह 07:26 से 08:56 बजे तक |
| गोवा | पणजी | सुबह 08:01 से 09:32 बजे तक |
| गुजरात | गांधीनगर / अहमदाबाद | सुबह 07:59 से 09:30 बजे तक |
| हरियाणा | चंडीगढ़ | सुबह 07:42 से 09:13 बजे तक |
| हिमाचल प्रदेश | शिमला | सुबह 07:40 से 09:11 बजे तक |
| झारखंड | रांची | सुबह 07:07 से 08:38 बजे तक |
| कर्नाटक | बंगलुरु | सुबह 07:44 से 09:15 बजे तक |
| केरल | तिरुवनंतपुरम | सुबह 07:50 से 09:20 बजे तक |
| मध्य प्रदेश | भोपाल | सुबह 07:42 से 09:13 बजे तक |
| महाराष्ट्र | मुंबई | सुबह 07:58 से 09:30 बजे तक |
| मणिपुर | इम्फाल | सुबह 06:22 से 07:52 बजे तक |
| मेघालय | शिलांग | सुबह 06:34 से 08:04 बजे तक |
| मिजोरम | आइजोल | सुबह 06:26 से 07:56 बजे तक |
| नागालैंड | कोहिमा | सुबह 06:22 से 07:52 बजे तक |
| ओडिशा | भुवनेश्वर | सुबह 07:04 से 08:35 बजे तक |
| पंजाब | चंडीगढ़ | सुबह 07:42 से 09:13 बजे तक |
| राजस्थान | जयपुर | सुबह 07:48 से 09:19 बजे तक |
| सिक्किम | गंगटोक | सुबह 06:48 से 08:18 बजे तक |
| तमिलनाडु | चेन्नई | सुबह 07:29 से 09:00 बजे तक |
| तेलंगाना | हैदराबाद | सुबह 07:37 से 09:08 बजे तक |
| त्रिपुरा | अगरतला | सुबह 06:32 से 08:02 बजे तक |
| उत्तराखंड | देहरादून | सुबह 07:39 से 09:10 बजे तक |
| पश्चिम बंगाल | कोलकाता | सुबह 06:56 से 08:27 बजे तक |
बुध का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश
बुध का नक्षत्र परिवर्तन: 21 सितंबर की रात बुध ग्रह चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष में बुध को युवराज की संज्ञा दी गई है और इसे बुद्धि, वाणी, तर्क, गणना, व्यापार तथा संचार का कारक ग्रह माना जाता है। बुध के नक्षत्र परिवर्तन का प्रभाव अलग-अलग राशियों पर अलग प्रकार से पड़ सकता है। कुछ राशियों के लिए यह परिवर्तन आर्थिक और व्यावसायिक अवसरों से जुड़ा हो सकता है, जबकि कुछ जातकों को बातचीत, निर्णय और लेन-देन में अतिरिक्त सावधानी रखने की आवश्यकता पड़ सकती है।
चित्रा नक्षत्र का प्रभाव: बुध का संबंध बुद्धि और कारोबार से होने के कारण चित्रा नक्षत्र में प्रवेश को व्यापार, संचार, लेखन, शिक्षा, गणना और बौद्धिक गतिविधियों से जोड़कर देखा जाता है। इस दौरान किसी भी महत्वपूर्ण आर्थिक या व्यावसायिक निर्णय में जल्दबाजी के बजाय तथ्यों और दस्तावेजों की जांच करना उपयोगी रहेगा।










































