छोटी परेशानी में छिपे बड़े संकेत: हमारा शरीर कई बार स्वास्थ्य में होने वाले बदलावों का संकेत छोटे-छोटे लक्षणों के जरिए देता है। कई बार ये संकेत इतने सामान्य दिखाई देते हैं कि लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लगातार बने रहने वाली ऐसी समस्याओं पर ध्यान देना जरूरी है। 17 सितंबर को इंस्टाग्राम पर कैलिफोर्निया के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने ऐसे लक्षणों के बारे में बताया, जिन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। दिए गए विवरण में शरीर से जुड़े कई ऐसे बदलाव शामिल हैं जो पोषण की कमी से लेकर पाचन तंत्र और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि किसी एक लक्षण के आधार पर किसी बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, लेकिन अगर कोई समस्या लगातार बनी रहती है तो उसकी वजह जानने के लिए चिकित्सकीय जांच कराना महत्वपूर्ण हो सकता है। खासकर ऐसे लक्षण जो बार-बार दिखाई दें या समय के साथ बढ़ते जाएं, उन्हें केवल सामान्य परेशानी समझकर छोड़ना उचित नहीं है।
बर्फ खाने की इच्छा और नाखूनों में बदलाव: लगातार बर्फ खाने की इच्छा होना देखने में मामूली आदत लग सकती है, लेकिन डॉ. सेठी के अनुसार यह शरीर में आयरन की कमी से जुड़ा संकेत हो सकता है। यह ऐसा शुरुआती संकेत भी हो सकता है जो थकान जैसे लक्षण सामने आने से पहले दिखाई दे। ऐसी स्थिति में ब्लड काउंट और फेरिटिन की जांच कराने की बात कही गई है। इसी तरह नाखूनों का अंदर की ओर मुड़कर चम्मच के आकार का दिखाई देना भी कभी-कभी आयरन की कमी से संबंधित हो सकता है। ऐसे बदलाव दिखाई देने पर बिना जांच के सीधे सप्लीमेंट लेना उचित नहीं बताया गया है। पहले यह पता लगाना जरूरी है कि शरीर में वास्तव में आयरन की कमी है या नहीं। रात में सोते समय पैरों को लगातार हिलाने की इच्छा या पैरों में बेचैनी भी आयरन की कमी से संबंधित हो सकती है। यदि पैरों की यह बेचैनी इतनी अधिक हो कि बार-बार नींद टूटे या सोने में परेशानी हो, तो इस समस्या के बारे में डॉक्टर को जानकारी देना जरूरी है।
त्वचा और नसों से जुड़े संकेत: गर्दन या बगल के आसपास काली और मखमली त्वचा दिखाई देना भी शरीर में होने वाले एक बदलाव का संकेत हो सकता है। दिए गए विवरण के अनुसार ऐसा बदलाव इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ा हो सकता है। ऐसी त्वचा को बार-बार रगड़कर साफ करने की कोशिश करने के बजाय ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दी गई है, ताकि समस्या की वजह का पता लगाया जा सके। इसके अलावा हाथों या पैरों में लगातार झुनझुनी होना भी ध्यान देने योग्य लक्षण है। इसके संभावित कारणों में विटामिन बी12 की कमी शामिल हो सकती है। इसी तरह जीभ में लगातार दर्द या लालिमा को भी केवल तीखा भोजन खाने का परिणाम मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉ. सेठी के अनुसार आयरन, विटामिन बी12 या फोलेट की कमी भी जीभ में इस तरह की परेशानी से जुड़ी हो सकती है। इसलिए जब ऐसे लक्षण लगातार बने रहें तो उनके पीछे संभावित पोषण संबंधी कमी की जांच कराने पर चिकित्सकीय सलाह ली जा सकती है।
मल में बदलाव को समझना जरूरी: पाचन से जुड़े बदलाव भी शरीर की स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं। यदि मल लगातार चिकना और बहुत बदबूदार हो तथा उसे फ्लश करने में भी परेशानी हो, तो यह इस बात से जुड़ा हो सकता है कि शरीर वसा को ठीक से अवशोषित नहीं कर पा रहा है। दिए गए विवरण में ऐसी स्थिति में अग्न्याशय की जांच कराने की बात कही गई है। दूसरी ओर काला और तारकोल जैसा मल पाचन तंत्र में रक्तस्राव का संकेत हो सकता है। हालांकि आयरन और कुछ दवाओं के कारण भी मल काला दिखाई दे सकता है, लेकिन तारकोल जैसे मल को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और इसकी तत्काल जांच की आवश्यकता हो सकती है। यदि इसके साथ चक्कर आने या बेहोशी जैसी स्थिति हो, तो आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी गई है। इस तरह मल के रंग, बनावट और प्रकृति में लगातार होने वाले असामान्य बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है, खासकर जब उनके साथ दूसरे लक्षण भी मौजूद हों।
आंखों का पीला पड़ना भी अहम संकेत: आंखों के सफेद हिस्से का पीला पड़ना एक ऐसा बदलाव है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। डॉ. सेठी के अनुसार यह पीलिया का संकेत हो सकता है। इसके साथ कभी-कभी पेशाब का रंग गहरा और मल का रंग हल्का भी दिखाई दे सकता है। आंखों में इस तरह का बदलाव नजर आने पर तुरंत जांच कराने की सलाह दी गई है। शरीर में दिखाई देने वाले अलग-अलग संकेतों का अर्थ अलग हो सकता है और केवल बाहरी लक्षण देखकर किसी निश्चित बीमारी की पहचान नहीं की जा सकती। फिर भी जब आंखों का रंग बदलने, लगातार झुनझुनी, जीभ में दर्द, असामान्य मल या त्वचा में बदलाव जैसी समस्या बनी रहती है, तो उसे सामान्य मानकर लंबे समय तक टालना ठीक नहीं है। समय पर जांच कराने से समस्या की वजह समझने और आवश्यक चिकित्सकीय सलाह लेने में मदद मिल सकती है।
लक्षणों को लेकर क्या सावधानी रखें: शरीर में दिखाई देने वाला हर बदलाव किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो, यह जरूरी नहीं है और दिए गए किसी भी लक्षण को देखकर स्वयं बीमारी तय नहीं करनी चाहिए। लेकिन लगातार या असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय उनकी वजह जानने के लिए चिकित्सकीय सलाह लेना अधिक उचित है। खासकर काला तारकोल जैसा मल और आंखों के सफेद हिस्से का पीला पड़ना जैसे संकेतों में तुरंत जांच की जरूरत बताई गई है, जबकि आयरन, बी12 या फोलेट की कमी से जुड़े संभावित संकेतों में आवश्यक जांच के बाद ही सप्लीमेंट या अन्य उपायों पर निर्णय लेना चाहिए। गर्दन और बगल की काली-मखमली त्वचा को रगड़कर ठीक करने के बजाय संभावित इंसुलिन रेजिस्टेंस की जांच कराने की बात कही गई है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि इस लेख में बताए गए उपाय और जानकारी सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी फिटनेस कार्यक्रम को शुरू करने, डाइट में बदलाव करने, सप्लीमेंट लेने या किसी बीमारी से संबंधित उपचार अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।













































