पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाली नोटों के बैंकिंग व्यवस्था में पहुंचने से जुड़ा एक और मामला सामने आया है। Saharanpur में Punjab National Bank की करेंसी चेस्ट में करोड़ों रुपये की नकली करेंसी मिलने के बाद अब Meerut के मंगलपांडे नगर स्थित Axis Bank की करेंसी चेस्ट में 4 लाख 63 हजार 650 रुपये मूल्य के जाली नोट पाए गए हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इस मामले ने इसलिए भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं क्योंकि नकदी को शाखाओं से करेंसी चेस्ट तक भेजने के बाद वहां जांच और मिलान की प्रक्रिया होती है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में नकली नोटों का यहां तक पहुंचना जांच का प्रमुख विषय बन गया है।
1323 नकली नोटों का पता चला: बैंक की जांच में कुल 1323 जाली नोट सामने आए हैं। इनमें 500 रुपये के 805 नोट, 200 रुपये के 142 नोट, 100 रुपये के 279 नोट और 50 रुपये के 97 नोट शामिल हैं। इन सभी नोटों का कुल मूल्य 4 लाख 63 हजार 650 रुपये बताया गया है। जांच के दौरान कुछ पुराने जाली नोट भी मिले हैं। इसके अलावा कुछ नोट दो हिस्सों में पाए गए, जिन्हें दोबारा चिपकाया गया था। अलग-अलग मूल्यवर्ग के इन नोटों के सामने आने से मामला केवल एक-दो संदिग्ध नोटों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बैंक की करेंसी चेस्ट में जमा हुई नकदी की पूरी प्रक्रिया की जांच जरूरी हो गई है।
186 शाखाओं की नकदी होती है यहां जमा: मंगलपांडे नगर स्थित Axis Bank की करेंसी चेस्ट से करीब 186 शाखाएं जुड़ी हुई हैं। इन शाखाओं में ग्राहकों और अन्य माध्यमों से जमा होने वाली नकदी को जांच और मिलान के लिए करेंसी चेस्ट भेजा जाता है। ऐसे में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि बरामद जाली नोट इन शाखाओं में से किस शाखा की नकदी में शामिल थे। जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित शाखाओं में नकदी जमा होने से लेकर करेंसी चेस्ट तक पहुंचने के बीच किन-किन स्तरों पर उसकी जांच हुई थी। इसी प्रक्रिया के रिकॉर्ड से जाली नोटों के स्रोत तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दिसंबर 2024 से दिसंबर 2025 तक की रकम खंगाली: मामले में करेंसी चेस्ट प्रबंधक सरताज सिंह की शिकायत महत्वपूर्ण आधार बनी है। हिसार, हरियाणा निवासी सरताज सिंह ने एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति को शिकायत देकर जाली नोट मिलने की जानकारी दी। इसके बाद बैंक की ओर से लंबी अवधि की नकदी की जांच की गई। 1 दिसंबर 2024 से 31 दिसंबर 2025 तक यानी करीब 13 महीने के दौरान जमा हुई रकम को खंगाला गया। इसी जांच के दौरान अलग-अलग मूल्यवर्ग के नकली नोटों की पहचान हुई। अब पुलिस इसी अवधि से जुड़े नकदी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि जाली नोट किस चरण में बैंकिंग व्यवस्था में शामिल हुए।
जांच में कर्मचारियों की भूमिका भी अहम: इतनी बड़ी संख्या में नकली नोटों का करेंसी चेस्ट तक पहुंचना बैंक की नकदी जांच व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि जिन शाखाओं से रकम आई, वहां नकदी की जांच कैसे हुई और जाली नोट उस स्तर पर क्यों नहीं पकड़े गए। जांच में बैंक कर्मचारियों की संभावित भूमिका को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही यह संभावना भी देखी जा रही है कि कहीं यह मामला कर्मचारियों की लापरवाही से जुड़ा है या नकली नोटों को बैंकिंग चैनल तक पहुंचाने के पीछे कोई अन्य व्यवस्था काम कर रही थी। संबंधित शाखाओं से नकदी जमा होने के रिकॉर्ड और दूसरे दस्तावेज लिए जा रहे हैं।
कहां से आए जाली नोट, इसी सवाल का जवाब तलाश रही पुलिस: फिलहाल जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा जाली नोटों के स्रोत और उनके करेंसी चेस्ट तक पहुंचने के रास्ते का पता लगाना है। यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि 1323 नकली नोट किसी एक शाखा से आए या अलग-अलग शाखाओं की नकदी में शामिल होकर यहां पहुंचे। इसी के साथ यह भी पता लगाना जरूरी है कि नकदी की जांच के दौरान इन नोटों की पहचान क्यों नहीं हो सकी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाली करेंसी से जुड़े पहले के मामले के बाद सामने आए इस नए प्रकरण ने नकली नोटों के बैंकिंग तंत्र तक पहुंचने को लेकर चिंता बढ़ाई है। हालांकि इस समय किसी संगठित गिरोह या बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पुलिस की जांच और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में जाली नोटों का स्रोत क्या था और करेंसी चेस्ट तक पहुंचने में किस स्तर पर चूक हुई।














































