7 अक्टूबर 2026, बुधवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है। आज चंद्रमा सिंह राशि में रहेंगे और मघा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। द्वादशी तिथि पर दिवंगत परिजनों का श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है। विशेष रूप से संन्यास ग्रहण कर चुके पूर्वजों के श्राद्ध के लिए भी यह दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। आज शुभ योग का संयोग रहेगा। आइए जानते हैं 7 अक्टूबर का पंचांग, शुभ और अशुभ मुहूर्त, चौघड़िया, राहुकाल तथा सूर्योदय और सूर्यास्त का समय।
पंचांग विवरण
वार: बुधवार
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948
संक्रांति: —
मास: आश्विन मास
तिथि: द्वादशी, रात्रि 11:16 बजे तक, इसके बाद त्रयोदशी
नक्षत्र: मघा, रात्रि 09:40 बजे तक, इसके बाद पूर्वाफाल्गुनी
योग: शुभ योग, अगले दिन तड़के 02:52 बजे तक, इसके बाद शुक्ल योग
सूर्य राशि: कन्या राशि
चंद्र राशि: सिंह राशि
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:39 बजे से 05:28 बजे तक
प्रातः संध्या: सुबह 05:18 बजे से 06:30 बजे तक
कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक
रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:32 बजे से 01:19 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:25 बजे से 03:12 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:00 बजे से 06:24 बजे तक
अमृत काल: शाम 07:20 बजे से रात 08:53 बजे तक
नोट: बुधवार होने के कारण आज अभिजित मुहूर्त का अभाव रहेगा।
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल: दोपहर 12:08 बजे से 01:36 बजे तक
यमगण्ड काल: सुबह 07:45 बजे से 09:13 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:09 बजे तक
वर्ज्यम् काल: सुबह 09:58 बजे से 11:31 बजे तक
दिशाशूल: उत्तर दिशा
सूर्योदय, सूर्यास्त, चन्द्रोदय और चन्द्रास्त
सूर्योदय: सुबह 06:17 बजे
सूर्यास्त: शाम 06:00 बजे
चन्द्रोदय: शाम 03:08 बजे
चन्द्रास्त: सुबह 03:52 बजे, 8 अक्टूबर को
दिन की चौघड़िया
लाभ: सुबह 06:17 बजे से 07:45 बजे तक
अमृत: सुबह 07:45 बजे से 09:13 बजे तक
काल: सुबह 09:13 बजे से 10:41 बजे तक
शुभ: सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:09 बजे तक
रोग: दोपहर 12:09 बजे से 01:37 बजे तक
उद्वेग: दोपहर 01:37 बजे से 03:05 बजे तक
चर: दोपहर 03:05 बजे से शाम 04:32 बजे तक
लाभ: शाम 04:32 बजे से 06:00 बजे तक
रात्रि की चौघड़िया
उद्वेग: शाम 06:00 बजे से रात 07:32 बजे तक
शुभ: रात 07:32 बजे से 09:04 बजे तक
अमृत: रात 09:04 बजे से 10:37 बजे तक
चर: रात 10:37 बजे से मध्यरात्रि 12:09 बजे तक
रोग: मध्यरात्रि 12:09 बजे से देर रात 01:41 बजे तक
काल: देर रात 01:41 बजे से तड़के 03:14 बजे तक
लाभ: तड़के 03:14 बजे से सुबह 04:46 बजे तक
उद्वेग: सुबह 04:46 बजे से 06:18 बजे तक
राज्यवार राहुकाल
| क्रमांक | राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | राजधानी/मुख्य शहर | राहुकाल का समय |
|---|---|---|---|
| 1 | उत्तर प्रदेश | लखनऊ | दोपहर 11:53 बजे से 01:21 बजे तक |
| 2 | दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी) | नई दिल्ली | दोपहर 12:08 बजे से 01:36 बजे तक |
| 3 | जम्मू और कश्मीर | श्रीनगर | दोपहर 12:14 बजे से 01:40 बजे तक |
| 4 | आंध्र प्रदेश | अमरावती | दोपहर 11:51 बजे से 01:21 बजे तक |
| 5 | अरुणाचल प्रदेश | ईटानगर | सुबह 10:52 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक |
| 6 | असम | दिसपुर | सुबह 11:00 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक |
| 7 | बिहार | पटना | सुबह 11:34 बजे से दोपहर 01:02 बजे तक |
| 8 | छत्तीसगढ़ | रायपुर | दोपहर 11:49 बजे से 01:18 बजे तक |
| 9 | गोवा | पणजी | दोपहर 12:16 बजे से 01:46 बजे तक |
| 10 | गुजरात | गांधीनगर | दोपहर 12:28 बजे से 01:57 बजे तक |
| 11 | हरियाणा | चंडीगढ़ | दोपहर 12:10 बजे से 01:38 बजे तक |
| 12 | हिमाचल प्रदेश | शिमला | दोपहर 12:09 बजे से 01:37 बजे तक |
| 13 | झारखंड | रांची | सुबह 11:39 बजे से दोपहर 01:07 बजे तक |
| 14 | कर्नाटक | बंगलुरु | दोपहर 12:06 बजे से 01:36 बजे तक |
| 15 | केरल | तिरुवनंतपुरम | दोपहर 12:07 बजे से 01:37 बजे तक |
| 16 | मध्य प्रदेश | भोपाल | दोपहर 12:09 बजे से 01:38 बजे तक |
| 17 | महाराष्ट्र | मुंबई | दोपहर 12:26 बजे से 01:55 बजे तक |
| 18 | मणिपुर | इम्फाल | सुबह 10:52 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक |
| 19 | मेघालय | शिलांग | सुबह 11:02 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक |
| 20 | मिजोरम | आइजोल | सुबह 10:54 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक |
| 21 | नागालैंड | कोहिमा | सुबह 10:50 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक |
| 22 | ओडिशा | भुवनेश्वर | सुबह 11:37 बजे से दोपहर 01:06 बजे तक |
| 23 | पंजाब | चंडीगढ़ | दोपहर 12:10 बजे से 01:38 बजे तक |
| 24 | राजस्थान | जयपुर | दोपहर 12:18 बजे से 01:46 बजे तक |
| 25 | सिक्किम | गंगटोक | सुबह 11:18 बजे से दोपहर 12:46 बजे तक |
| 26 | तमिलनाडु | चेन्नई | दोपहर 11:56 बजे से 01:26 बजे तक |
| 27 | तेलंगाना | हैदराबाद | सुबह 11:57 बजे से दोपहर 01:27 बजे तक |
| 28 | त्रिपुरा | अगरतला | सुबह 10:59 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक |
| 29 | उत्तराखंड | देहरादून | दोपहर 12:06 बजे से 01:34 बजे तक |
| 30 | पश्चिम बंगाल | कोलकाता | सुबह 11:24 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक |
द्वादशी तिथि पर श्राद्ध का धार्मिक महत्व
आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को पितरों के श्राद्ध और तर्पण के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधिपूर्वक पिंडदान और तर्पण करने से दिवंगत पूर्वजों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। द्वादशी तिथि का एक विशेष महत्व यह भी है कि इस दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है जिन्होंने जीवन में संन्यास ग्रहण किया था। मान्यता है कि इस अवसर पर पितृ मंत्रों का जाप और पितृ स्तोत्र का पाठ करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा उनकी आत्मा को शांति मिलती है। श्राद्ध और तर्पण की धार्मिक परंपरा को परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और पितरों की कृपा से भी जोड़ा जाता है।
















































