पुलिस सेवा से बर्खास्त किया गया आरोपी सिपाही सुनील कुमार शुक्ला मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के गौरीगंज इलाके का स्थायी निवासी है। साल 2015 बैच में भर्ती हुआ यह सिपाही वर्तमान में राजधानी के लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइन में तैनात था। पुलिस विभाग में रहते हुए उसने अपनी ड्यूटी के दौरान कुछ ऐसी गतिविधियां कीं जो सीधे तौर पर विभागीय अनुशासन के सख्त नियमों के खिलाफ थीं। इसी सिपाही ने कुछ समय पहले पुलिस महकमे में हड़कंप मचाने वाले चार विवादित वीडियो सार्वजनिक मंच पर जारी करके सबको हैरान कर दिया था। अपने पद और वर्दी की गरिमा को भूलकर उसने अपने ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ खुलेआम और निराधार मोर्चा खोल दिया था।
सोशल मीडिया का दुरुपयोग आरोपी सिपाही ने अपनी बात रखने के लिए लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक का सहारा लिया और वहां अपने कई वीडियो अपलोड कर दिए। इन विवादित वीडियो के माध्यम से उसने पुलिस विभाग के भीतर व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार फैले होने के बेहद गंभीर और बड़े आरोप लगाए थे। सिपाही ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया था कि रिजर्व पुलिस लाइन में अधिकारियों द्वारा खुलेआम अवैध वसूली का बड़ा रैकेट चलाया जा रहा है। उसने इन वीडियो को वायरल करने की कोशिश की ताकि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर बाहरी दबाव बनाया जा सके और उसकी बेजा मांगें मानी जाएं। बिना किसी सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के फेसबुक पर इस तरह की संवेदनशील विभागीय बातें साझा करना उसकी सेवा शर्तों का सीधा और खुला उल्लंघन था।
वसूली के गंभीर आरोप सिपाही ने अपने विवादित वीडियो में साफ तौर पर यह दावा किया था कि पुलिस लाइन में ड्यूटी बदलने के नाम पर भारी रिश्वतखोरी चल रही है। उसका यह बड़ा आरोप था कि ड्यूटी बदलने के एवज में हर महीने प्रत्येक सिपाही से दो हजार रुपये की तय रकम जबरन वसूली जाती है। उसने कहा था कि जो सिपाही यह निश्चित रकम नहीं देता, उसे परेशान किया जाता है और उसकी ड्यूटी मनचाही जगह पर नहीं लगाई जाती। अपने इन दावों को पुख्ता दिखाने के लिए उसने वीडियो में आरोप लगाए, लेकिन जांच के दौरान वह इन पैसों के लेन-देन का कोई भी सबूत नहीं दे सका। बिना किसी वित्तीय साक्ष्य या गवाह के लगाए गए इन मनगढ़ंत आरोपों को जांच समिति ने सिरे से खारिज करते हुए इसे केवल एक भ्रामक प्रचार माना।
अधिकारियों पर निशाना सिपाही ने केवल छोटे कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों तक को अपने इन झूठे आरोपों के घेरे में ले लिया था। उसका दावा था कि अवैध वसूली का यह बड़ा रैकेट रिजर्व पुलिस लाइन के आरआई, गणना प्रभारी और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों तक पूरी तरह फैला हुआ है। उसने यह तक कह दिया था कि नीचे से वसूला गया यह सारा पैसा ऊपर बैठे आईपीएस रैंक के बड़े अधिकारियों तक नियमित रूप से पहुंचाया जाता है। अपने वीडियो में उसने पुलिस विभाग के अधिकारियों को ‘काले अंग्रेज’ कहकर संबोधित किया और उन पर मनमानी करने का आरोप लगाया। सिपाही ने पुलिस की कार्यप्रणाली को ‘जमींदारी प्रथा’ चलाने वाला बताकर पूरे पुलिस बल के मनोबल को गिराने का बहुत ही निंदनीय प्रयास किया था।
महिला कांस्टेबल पर कार्रवाई सिपाही द्वारा लगाए गए इन आरोपों और उसके द्वारा जारी किए गए वीडियो के मामले में पुलिस विभाग ने एक व्यापक जांच अभियान शुरू किया था। इस पूरी विभागीय जांच के दायरे में केवल आरोपी सिपाही ही नहीं आया, बल्कि विभाग के कुछ अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी बारीकी से पड़ताल की गई। जांच प्रक्रिया के दौरान सामने आए कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों के आधार पर एक महिला हेड कांस्टेबल नीतू सिंह के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की गई। महिला हेड कांस्टेबल पर हुई इस प्रशासनिक कार्रवाई को इसी प्रकरण से जुड़ी हुई अहम कड़ियों के रूप में स्पष्ट तौर पर देखा जा रहा है। विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि अनुशासनहीनता या नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी पुलिसकर्मी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
गणना कार्यालय में फेरबदल जब तक इस पूरे विवादित प्रकरण की विभागीय जांच चलती रही, तब तक पुलिस प्रशासन ने कई एहतियाती कदम उठाते हुए बड़े प्रशासनिक बदलाव किए। आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए गणना कार्यालय के कामकाज को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से कई पुलिसकर्मियों को उनके पद से हटाया गया। जांच के दौरान एक दारोगा समेत कुल 12 पुलिसकर्मियों को गणना कार्यालय से तत्काल प्रभाव से हटाकर अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया था। यह बड़ा कदम इसलिए उठाया गया ताकि जांच समिति बिना किसी आंतरिक दबाव या हस्तक्षेप के अपना काम कर सके और पूरी सच्चाई सामने आ सके। अंततः जब आरोपी सिपाही सुनील कुमार शुक्ला के सभी दावे झूठे साबित हुए, तो प्रशासन ने उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया और विभाग में पुनः अनुशासन स्थापित किया।





































