पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के एक सौ पैंतीसवें एपिसोड में प्रकृति संरक्षण पर अपना खास जोर दिया। उन्होंने अपने इस अहम संबोधन में पूर्वोत्तर राज्य मेघालय के प्रसिद्ध रूट ब्रिज की भी जमकर और खुल कर तारीफ की। उन्होंने देशवासियों को बताया कि रबर के प्राकृतिक पेड़ों से इस अनोखे ब्रिज के बनने में कई दशक का लंबा समय लगता है। इन प्राकृतिक पुलों को बनाने के लिए रबर की मजबूत जड़ों को बहुत ही धीरे-धीरे एक विशेष दिशा में ले जाया जाता है। जड़ों को सही दिशा में मोड़ने के बाद ही यह खूबसूरत और बेहद मजबूत प्राकृतिक पुल अपना असली आकार लेता है।
स्थानीय लोगों की सृजनशीलता: मेघालय के इन अनोखे रूट ब्रिज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि समय बीतने के साथ यह ब्रिज लगातार मजबूत होता जाता है। मेघालय में वहां के जागरूक स्थानीय लोग एक सौ बीस से ज्यादा ऐसे ऐतिहासिक रूट ब्रिज की अपनी पूरी देखरेख कर रहे हैं। इन सभी बेहतरीन और प्राकृतिक ब्रिज के निर्माण में यहां के आम लोगों की अद्भुत सृजनशीलता और निरंतर मेहनत साफ दिखाई देती है। यह प्रकृति और मानव के बीच बेहतर तालमेल बिठाने और हमारे पर्यावरण को बचाने का एक बहुत ही शानदार प्राकृतिक उदाहरण है। पीएम ने इस अनोखी परंपरा को सहेज कर रखने वाले सभी स्थानीय नागरिकों के इन विशेष प्रयासों की दिल खोलकर अपनी सराहना की है।
कचरा निस्तारण का अनोखा तरीका: मन की बात में प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में स्थित ब्यावरा गांव के लोगों की भी बहुत तारीफ की। इस ब्यावरा गांव की मेहनती महिलाओं ने मिलकर कचरे को निपटाने का एक बेहद ही अनोखा और काफी शानदार तरीका अपनाया है। इन महिलाओं ने अपने आसपास के इलाकों से खराब प्लास्टिक का सारा कचरा उठाया और उससे सुंदर कृत्रिम पेड़ बनाने शुरू किए। इन खूबसूरत पेड़ों का इस्तेमाल अब गांव और आसपास की विभिन्न जगहों को बहुत अच्छे से सजाने के लिए किया जाता है। इस बेहतरीन पहल के जरिए गांव की इन महिलाओं ने स्वच्छता और प्राकृतिक सुंदरता का एक बहुत ही शानदार उदाहरण देश के सामने पेश किया है।
पर्यावरण संरक्षण की बेहतरीन पहल: ब्यावरा गांव की महिलाओं की इस अनोखी पहल से हमारे पर्यावरण को बहुत बड़ा और काफी सकारात्मक फायदा पहुंच रहा है। इन महिलाओं के साझा प्रयास से अब तक सैकड़ों किलो खराब और बेकार प्लास्टिक को दोबारा सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया जा चुका है। प्लास्टिक के इस तरह से दोबारा इस्तेमाल होने से इलाके में मौजूद हानिकारक कचरे की मात्रा काफी हद तक कम हो गई है। यह छोटा सा कदम प्रदूषण को कम करने और पूरे पर्यावरण को स्वच्छ बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और अहम प्रयास है। प्रधानमंत्री ने पूरे देश के सभी नागरिकों से ऐसी ही रचनात्मक और पर्यावरण के अनुकूल पहल अपनाने की अपनी खास अपील की है।
स्वदेशी मूर्तियों की अपील: आगामी त्योहारों के सीजन को देखते हुए पीएम मोदी ने गणेश चतुर्थी से पहले लोगों से विशेष रूप से मिट्टी की मूर्तियां बनाने की अपील की है। उन्होंने लोगों से आगामी त्योहारों पर प्लास्टर ऑफ पेरिस और विदेश में बनी हुई मूर्तियों को बिल्कुल भी न खरीदने को कहा है। इसके बजाय उन्होंने हर एक उत्सव के दौरान देशवासियों से केवल स्वदेशी और स्थानीय सामान ही खरीदने की अपनी अहम बात दोहराई। मिट्टी की बनी स्वदेशी मूर्तियों का उपयोग करने से हमारा पर्यावरण सुरक्षित रहता है और कई स्थानीय कारीगरों को रोजगार भी मिलता है। पीएम ने देशवासियों को त्योहारों की खुशियों के साथ-साथ प्राकृतिक पर्यावरण का पूरा ध्यान रखने की भी अपनी सख्त हिदायत दी है।
बारिश का पानी बचाने का आग्रह: कार्यक्रम के बिल्कुल अंतिम हिस्से में उन्होंने देश के सभी लोगों से बारिश का अमूल्य पानी बचाने की अपनी अहम अपील की। पीएम ने कहा कि आसमान से गिरने वाली बारिश की हर एक कीमती बूंद को हमारे भविष्य के लिए जरूर बचाया जाना चाहिए। इस वर्षा जल को सोकपिट या अन्य आधुनिक तरीकों से सुरक्षित रूप से जमीन के नीचे बहुत गहराई में पहुंचाया जाना चाहिए ताकि पानी की कमी न हो। बारिश के पानी को सही से सहेजने पर इलाके का गिरता हुआ भूजल स्तर बढ़ाने में भी बहुत अधिक मदद मिलेगी। जल संरक्षण की यह सामूहिक जिम्मेदारी हर नागरिक को उठानी होगी तभी हम आने वाली युवा पीढ़ी को एक सुरक्षित कल दे पाएंगे।





































