देश के अलग-अलग हिस्सों में चीनी के बढ़ते दामों की खबरों के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने Lucknow स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में बड़ा बयान दिया है। एक नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य की जनता को आश्वस्त किया कि उत्तर प्रदेश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। सीएम ने कहा कि हमारे पास अगले सात महीने की जरूरतों को पूरा करने लायक चीनी का स्टॉक मौजूद है। इसलिए प्रदेश में चीनी की कमी को लेकर किसी भी तरह की चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
हुदहुद तूफान और मुआवजे का जिक्र: कार्यक्रम के मंच से मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी की सरकार पर सीधा हमला बोला और कहा कि उनके एजेंडे में किसान कभी शामिल ही नहीं थे। सीएम ने बताया कि वर्ष 2014-15 में आए हुदहुद तूफान के कारण हुए नुकसान के लिए तत्कालीन सरकार ने मुआवजे का केवल ऐलान किया था। लेकिन किसानों को वह राहत राशि नहीं मिली और साल 2017 में हमारी सरकार बनने के बाद ही किसानों को मुआवजा दिया गया। उन्होंने कहा कि अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभाना ही असली देशभक्ति और जनसेवा है।
24 घंटे के भीतर क्षतिपूर्ति: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए बताया कि अतिवृष्टि और अनावृष्टि से होने वाले नुकसान का आकलन कर किसानों को 24 घंटे के भीतर मुआवजा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने कभी किसान या युवा के हित में काम नहीं किया। प्रशासनिक व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो यह सोचे कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए और कौन से बेहतर उपाय किए जा सकते हैं। हमारी सरकार ने इसी सोच के साथ काम करते हुए प्रदेश के किसानों को कृषि संकट से बाहर निकाला है।
गन्ना किसानों की स्थिति में सुधार: सीएम योगी ने कहा कि हमारी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के किसानों को पहली बार उनकी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मिला है। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश का गन्ना किसान बर्बादी के कगार पर था और 2009 से उनका भुगतान बकाया पड़ा हुआ था। पूर्व की बसपा और सपा सरकारों ने कई चीनी मिलों को कौड़ियों के भाव बेचकर बंद करा दिया था। Gorakhpur की एक चीनी मिल को सिर्फ तीन करोड़ में बेच दिया गया था, जबकि उसकी जमीन और कबाड़ का मूल्य ही उससे कहीं अधिक था।
त्वरित परीक्षा और परिणाम प्रणाली: युवाओं को रोजगार देने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अब पूरी पारदर्शी प्रक्रिया के साथ परीक्षाएं आयोजित कराई जा रही हैं। जिस परीक्षा में पहले 6 महीने का समय बर्बाद होता था, उसे अब केवल एक महीने में संपन्न कराया जाता है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण UP Board की परीक्षाएं हैं, जहाँ 56 लाख बच्चे शामिल होते हैं। इस परीक्षा को महज 14 दिनों के भीतर करा लिया जाता है और अगले 14 दिनों के अंदर ही उसका परीक्षा परिणाम भी घोषित कर दिया जाता है।
पारदर्शिता और विकास की राह: मुख्यमंत्री ने कहा कि पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से युवाओं का भरोसा प्रशासनिक व्यवस्था पर मजबूत हुआ है। सरकार न केवल युवाओं को समयबद्ध तरीके से रोजगार दे रही है, बल्कि राज्य के किसानों के हितों की रक्षा के लिए भी पूरी तरह संकल्पबद्ध है। गन्ना मूल्य का समय पर भुगतान, चीनी मिलों का सुचारू संचालन और समय पर प्राकृतिक आपदाओं का मुआवजा देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इन सभी ठोस कदमों के जरिए उत्तर प्रदेश को विकास के नए शिखर पर ले जाने का कार्य निरंतर जारी है।














































