तीनों नेताओं को रिहाई के बजाय एहतियाती गिरफ्तारी: कॉकरोच जनता पार्टी के तीन प्रमुख नेताओं सौरव दास, आशुतोष और अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने एहतियातन गिरफ्तार कर लिया है। तीनों शनिवार को मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे और विमान से उतरने के तुरंत बाद हवाई अड्डे पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। पहले उम्मीद की जा रही थी कि शाम तक उन्हें छोड़ दिया जाएगा, लेकिन पार्टी की ओर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा के बाद पुलिस ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की। तीनों नेताओं को दिल्ली कैंट थाने में कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने की जानकारी दी गई है। पुलिस की कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद पार्टी के समर्थकों ने निर्धारित स्थल तक पहुंचने की कोशिश की थी।
धारा 126 और 170 के तहत दर्ज की गई कार्रवाई: तीनों नेताओं के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 170 के तहत कदम उठाया गया है। धारा 126 शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा या बंधपत्र की प्रक्रिया से जुड़ी है, जबकि धारा 170 संभावित संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए एहतियाती गिरफ्तारी का प्रावधान करती है। पुलिस के अनुसार, ऐसे मामलों में उद्देश्य किसी संभावित घटना या शांति भंग होने की स्थिति को रोकना होता है। गिरफ्तारी के बाद संबंधित व्यक्ति को कानून में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाता है। तीनों नेताओं की पेशी भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा बताई जा रही है। आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि मजिस्ट्रेट के समक्ष क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है और शांति बनाए रखने के लिए किस तरह की शर्तें निर्धारित होती हैं।
24 घंटे की समयसीमा और बंधपत्र की प्रक्रिया अहम: एहतियाती गिरफ्तारी के मामलों में पुलिस की शक्तियों के साथ समयसीमा का पालन भी जरूरी होता है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 170 के तहत की गई गिरफ्तारी में किसी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। निर्धारित अवधि के भीतर उसे कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है। इसके बाद धारा 126 के तहत शांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र भरवाने या सुरक्षा संबंधी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इसी कारण पुलिस ने तीनों नेताओं को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने की तैयारी की है। इस कानूनी प्रक्रिया के दौरान उनकी हिरासत और रिहाई से संबंधित अगला कदम तय होगा। मामले में अब मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी महत्वपूर्ण पड़ाव है।
प्रदर्शन की अनुमति से इनकार के बावजूद समर्थकों ने पहुंचने की कोशिश की: कॉकरोच जनता पार्टी ने शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का कार्यक्रम घोषित किया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में कानून-व्यवस्था की मौजूदा स्थिति और निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद कई प्रदर्शनकारी प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़ने लगे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें अलग-अलग जगहों पर हिरासत में लिया। तीनों नेता भी इसी कार्यक्रम में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। उनके हवाई अड्डे पर हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस की कार्रवाई चर्चा में आई। शनिवार को दिनभर जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस तथा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की टीमें तैनात रहीं और प्रदर्शनकारियों को स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए सुरक्षा घेरा बनाया गया।
करीब तीन हजार लोगों को हिरासत में लेने के दौरान छह पुलिसकर्मी घायल: प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए चलाए गए अभियान में करीब तीन हजार लोगों को हिरासत में लिया गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस दौरान दिल्ली पुलिस के छह कर्मियों को चोटें आईं। घायलों में पुलिस की गुलाबी वर्दी वाली इकाई की एक महिला कर्मी भी शामिल थीं। सभी घायल सुरक्षाकर्मियों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया। पुलिस उनकी चोटों से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रही है। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के दौरान जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी। पुलिस ने किसी को भी प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए व्यापक बंदोबस्त किए थे, जबकि प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर लगातार नजर रखी जा रही थी।
अब मजिस्ट्रेट के सामने पेशी और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर: तीनों नेताओं की गिरफ्तारी के बाद अब कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष उनकी पेशी और शांति बनाए रखने से संबंधित प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित है। पुलिस ने कार्रवाई के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 170 का सहारा लिया है। वहीं, प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने और इसके बावजूद समर्थकों के जुटने की कोशिश के चलते शनिवार को दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था व्यापक स्तर पर लागू रही। पुलिसकर्मियों के घायल होने और हजारों लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी के बाद कार्रवाई का दायरा भी स्पष्ट हुआ है। नेताओं के मामले में आगे का कदम कानूनी प्रक्रिया के अनुसार तय होगा, जबकि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर पुलिस की पाबंदियों और सुरक्षा इंतजामों का असर आगे की स्थिति पर पड़ सकता है।














































