उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिए गए तीन महीने के भीतर चुनाव कराने के निर्देश के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस पार्टी ने अदालत के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया है और इसके साथ ही सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कई बड़े आरोप लगाए हैं।
सरकार डरी हुई थी, इसलिए समय पर नहीं कराए चुनाव: आराधना मिश्रा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार भीतर से डरी हुई थी, जिसके कारण उसने समय अवधि के भीतर पंचायत चुनाव नहीं करवाए। उन्होंने सीधा सवाल किया कि आखिर सरकार को समय रहते चुनाव कराने से किसने रोका और उसे किस बात का डर सता रहा था? उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी खुद चुनाव करवाने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं थी, क्योंकि उनके पास जनता के सामने जाने के लिए कोई ठोस उपलब्धि नहीं है।
जनता बेरोजगारी, महंगाई और पेपर लीक से परेशान
आराधना मिश्रा ने कहा कि आज प्रदेश की जनता बेरोजगारी, कमर तोड़ महंगाई और लगातार हो रहे पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों से त्रस्त है। यदि सरकार चुनाव करवाती, तो वह जनता को क्या जवाब देती और किस मुद्दे पर वोट मांगती? उन्होंने यह भी जोड़ा कि गांव-गांव तक चंदा चोरी और भ्रष्टाचार के मुद्दों से आम लोग पूरी तरह वाकिफ हो चुके हैं, और तहसील स्तर तक भ्रष्टाचार फैला हुआ है। सरकार के पास जनता से वोट मांगने का कोई आधार नहीं बचा था, इसीलिए वह लगातार पंचायत चुनावों को टालने के षड्यंत्र में लगी हुई थी।
पंचायतें लोकतंत्र की नींव, अदालत का फैसला संविधान की जीत
पंचायत चुनाव के महत्व को रेखांकित करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पंचायतें किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की मूल नींव होती हैं और यह हमारी संवैधानिक व्यवस्था का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि संविधान का सम्मान करते हुए हाईकोर्ट ने जो तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का ऐतिहासिक आदेश दिया है, वह सच्चे अर्थों में लोकतंत्र और संविधान की जीत है।
क्या है इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्देश?
गौरतलब है कि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई की थी। करीब तीन घंटे चली लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बेंच ने अपने फैसले में राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि आगामी तीन महीने के भीतर हर हाल में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संपन्न कराए जाएं, तब तक निवर्तमान ग्राम प्रधान ही प्रशासक के रूप में अपनी जिम्मेदारियां संभालते रहेंगे।










































