संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा पारित किया गया नया प्रस्ताव दुनिया भर की सरकारों और वैश्विक संस्थानों को ‘इक्वल अर्थ’ प्रोजेक्शन का उपयोग करने के लिए प्रेरित करता है। टोगो द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव को अफ्रीकी संघ का पूरा समर्थन मिला और मतदान में 164 देशों ने इसके पक्ष में अपनी सहमति दर्ज कराई। हालांकि, अमेरिका ने इस प्रस्ताव के खिलाफ अकेले विरोध में अपना वोट डाला, जबकि छह अन्य देश मतदान से पूरी तरह दूर रहे। यह फैसला उन तमाम संगठनों और अफ्रीकी देशों की एक बड़ी वैचारिक और भौगोलिक जीत माना जा रहा है, जो लंबे समय से वैश्विक मानचित्र में सुधार की मांग उठा रहे थे।
पुराने मर्केटर नक्शे पर नहीं लगा है कोई प्रतिबंध संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस प्रस्ताव को लेकर स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट कर दी है कि शुक्रवार को पारित प्रस्ताव पुराने मर्केटर प्रोजेक्शन पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं लगाता है। यूएन ने यह भी साफ किया है कि यह फैसला दुनिया के किसी भी देश या संस्थान को अनिवार्य रूप से नक्शा बदलने का कोई आदेश नहीं देता है। इस प्रस्ताव का मूल मकसद सिर्फ सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को ‘इक्वल अर्थ’ जैसे अधिक सटीक नक्शे के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करना है। इसका अर्थ यह है कि भविष्य में भी लोग अपनी-अपनी अलग जरूरतों के हिसाब से अन्य पारंपरिक नक्शों का इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र रहेंगे।
अफ्रीका के वास्तविक आकार को मिली वैश्विक मान्यता लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे मर्केटर नक्शे में अफ्रीका महाद्वीप को उसकी वास्तविक भौगोलिक स्थिति और क्षेत्रफल की तुलना में काफी छोटा दिखाया जाता रहा है। पुराने नक्शे में ग्रीनलैंड को अफ्रीका के बराबर आकार का दिखाया जाता है, जबकि हकीकत में अफ्रीका ग्रीनलैंड की तुलना में लगभग 14 गुना बड़ा है। ‘इक्वल अर्थ’ प्रोजेक्शन में इस ऐतिहासिक और तकनीकी त्रुटि को सुधारते हुए अफ्रीका को उसके असली और सही अनुपात में दर्शाया गया है। टोगो और अफ्रीकी संघ के सदस्य देश लंबे समय से दुनिया के सामने अपने महाद्वीप का सही और वास्तविक आकार प्रस्तुत करने के लिए यह अभियान चला रहे थे।
टोगो और फ्रांस के नेताओं के विचार प्रस्ताव पेश करने वाले देश टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसी ने कहा कि नक्शे केवल भूगोल का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे दुनिया को देखने और समझने का तरीका तय करते हैं। उन्होंने कहा कि नक्शे हमारी शिक्षा, कल्पना और सामूहिक वैश्विक सोच को गहराई से प्रभावित करने का काम करते हैं। वहीं, मतदान के बाद फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि केवल नक्शा बदलने से दुनिया नहीं बदल जाती। लेकिन दुनिया को गलत तरीके से दिखाने वाली पुरानी प्रस्तुति को ठीक करना सच्चाई की ओर एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण कदम है।
मर्केटर प्रोजेक्शन का नाविक इतिहास और विसंगतियां मर्केटर प्रोजेक्शन का निर्माण फ्लेमिश मानचित्रकार गेरार्डस मर्केटर ने 16वीं शताब्दी में यूरोपीय समुद्री यात्रियों और नाविकों की नेविगेशन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया था। लेकिन पृथ्वी की गोल सतह को एक समतल कागज पर खींचने की वजह से इसमें ध्रुवीय क्षेत्रों का आकार वास्तविक क्षेत्रफल से बहुत ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगा। इसके परिणामस्वरूप उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ग्रीनलैंड नक्शे पर वास्तविक आकार से काफी बड़े दिखने लगे, जबकि भूमध्य रेखा के आसपास स्थित अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे महाद्वीप अपने असली आकार की तुलना में काफी छोटे नजर आने लगे।
अभियान चलाने वाले संगठनों की बड़ी ऐतिहासिक जीत संयुक्त राष्ट्र संघ के इस नए कदम को दुनिया भर में नक्शों के सुधार के लिए अभियान चला रहे शोधकर्ताओं, भूगोलवेत्ताओं और अफ्रीकी संगठनों की बड़ी सफलता माना जा रहा है। ये संगठन पिछले कई दशकों से दुनिया भर के स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में मर्केटर नक्शे की जगह अधिक सटीक नक्शों का उपयोग करने की मांग कर रहे थे। ‘इक्वल अर्थ’ प्रोजेक्शन को अपनाने से आने वाली पीढ़ियों को पृथ्वी के महाद्वीपों और देशों के वास्तविक आनुपातिक आकार का सही ज्ञान मिल सकेगा। इस फैसले के बाद दुनिया भर के कई देशों के शिक्षा मंत्रालयों द्वारा अपने स्कूल पाठ्यक्रमों में नए नक्शों को शामिल करने की उम्मीद जताई जा रही है।













































