भारत के निशानेबाजी इतिहास में इटली के लोनाटो शहर से एक बहुत ही बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। एशियन चैंपियनशिप की पूर्व स्वर्ण पदक विजेता नीरू धांडा ने आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने महिला ट्रैप स्पर्धा में अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाते हुए स्वर्ण पदक जीतकर एक नया इतिहास रच दिया है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही वह इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के ट्रैप इवेंट में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। यह बड़ी उपलब्धि पूरे देश और भारतीय निशानेबाजी खेल के लिए एक अत्यंत गर्व का क्षण लेकर आई है।
फाइनल का शानदार प्रदर्शन छब्बीस वर्षीय युवा निशानेबाज नीरू धांडा ने फाइनल मुकाबले में अपने अचूक निशानों से सभी को हैरान कर दिया। उन्होंने अंतिम दौर के अत्यंत दबाव वाले क्षणों में कुल तीस निशानों में से सत्ताईस सटीक निशाने लगाए। इस बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर उन्होंने स्वर्ण पदक को बहुत ही शान के साथ अपने नाम कर लिया। यह अद्भुत जीत उनके निशानेबाजी करियर का अब तक का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय खिताब बन गया है। इससे पहले वह एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण और इसी साल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीत चुकी हैं।
दिग्गजों को पछाड़ा फाइनल मुकाबले के दौरान इस भारतीय खिलाड़ी ने दुनिया की कई दिग्गज और अनुभवी निशानेबाजों को बहुत पीछे छोड़ दिया। फ्रांस की पूर्व विश्व चैंपियन कैरोल कॉर्मेनियर को इस कड़े मुकाबले में पच्चीस अंकों के साथ रजत पदक से संतोष करना पड़ा। वहीं मेजबान देश इटली की प्रतिभाशाली निशानेबाज एरिका सेसा ने इस अहम स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया। इन दोनों विश्व स्तरीय खिलाड़ियों की मौजूदगी के बावजूद भारतीय निशानेबाज ने अपना आत्मविश्वास बिल्कुल भी कम नहीं होने दिया। उन्होंने अंत तक अपना बेहतरीन खेल जारी रखा और इन सभी प्रमुख प्रतिद्वंदियों को हराकर शीर्ष स्थान प्राप्त किया।
क्वालिफिकेशन में दबदबा इस स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी ने क्वालिफिकेशन राउंड से ही पूरी प्रतियोगिता में अपना जबरदस्त दबदबा कायम रखा था। उन्होंने अपने शुरुआती तीन राउंड के दौरान पचहत्तर में से पचहत्तर का बिल्कुल परफेक्ट और शानदार स्कोर बनाया था। इसके बाद चौथे और पांचवें राउंड में उन्होंने केवल चार निशाने चूके और बेहतरीन सटीकता का प्रदर्शन किया। कुल मिलाकर उन्होंने एक सौ पच्चीस में से एक सौ इक्कीस अंक हासिल किए और शीर्ष स्थान के साथ फाइनल में प्रवेश किया। इस प्रतियोगिता का स्तर इतना कड़ा था कि दो निशानेबाजों ने एक सौ बीस अंक प्राप्त किए और पांच अन्य के बीच शूट-ऑफ हुआ।
अन्य भारतीय खिलाड़ियों का हाल इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में अन्य भारतीय महिला निशानेबाजों ने भी अपना पूरा दमखम दिखाने का प्रयास किया। भारत की दूसरी प्रमुख निशानेबाज मनीषा कीर ने कुल एक सौ पच्चीस में से एक सौ सत्रह अंक हासिल किए। अपने इस स्कोर के साथ मनीषा कीर प्रतियोगिता में दसवें स्थान पर रहीं और फाइनल में अपनी जगह बनाने से चूक गईं। वहीं एक अन्य भारतीय खिलाड़ी आशिमा अहलावत का प्रदर्शन इस कड़े मुकाबले में थोड़ा निराशाजनक देखने को मिला। आशिमा अहलावत कुल एक सौ छह प्रतिभागियों के बीच संयुक्त रूप से अस्सीवें स्थान पर ही अपना सफर खत्म कर सकीं।
जीत की खुशी और संकल्प ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने के बाद इस चैंपियन खिलाड़ी ने कहा कि यह जीत का एहसास बहुत ही शानदार और खास है। उन्होंने इस सफलता को पूरी टीम तथा अपने परिवार के लिए एक बहुत ही विशेष दिन करार दिया और सभी का आभार जताया। उन्होंने बताया कि इससे पहले वह तीन बार फाइनल में जगह बनाने से चूक गई थीं, लेकिन इस बार उन्होंने पक्का इरादा कर लिया था। अपने उस पिछले खराब प्रदर्शन की बाधा को तोड़ते हुए एक नया मुकाम हासिल करने की खुशी उनके चेहरे पर साफ दिख रही थी। खेलते समय उनका पूरा ध्यान केवल वर्तमान पल पर था और वह हर नए शॉट को एक नए मौके के रूप में देख रही थीं।


























































