हिंदू धर्म में हर त्योहार से जुड़ी कोई न कोई कथा और परंपरा जुड़ी होती है। ऐसी ही एक कथा और परंपरा गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2022) पर्व से भी जुड़ी है।
श्रीमद्भागवत के अनुसार, गणेश चतुर्थी की रात चांद के दर्शन करने से ही भगवान श्रीकृष्ण को स्यमंतक मणि चुराने का झूठा आरोप लगा था, जिससे मुक्ति पाने के लिए उन्होंने भी गणेश चतुर्थी का व्रत किया था। अगर कोई ऐसा गलती से कर ले तो इसका उपाय भी धर्म ग्रंथों में बताया गया है। आगे जानिए क्या है ये मान्यता और कथा…
जब चंद्रमा ने उड़ाया श्रीगणेश का मजाक
धर्म ग्रंथों के अनुसार, जब भगवान श्रीगणेश को हाथी का मुख लगाया गया तो वे गजानन कहलाए। सभी देवताओं ने उनकी स्तुति की कुछ न कुछ उपहार भी दिए पर चंद्रमा मंद-मंद मुस्कुराते रहें क्योंकि उन्हें अपने सौंदर्य पर अभिमान था। गणेशजी समझ गए कि चंद्रमा उनके इस रूप का उपहास कर रहे हैं। बहुत देर तक श्रीगणेश चंद्रमा के उपहास को अनेदखा करते रहे।
जब आया श्रीगणेश को क्रोध
जब लगातार चंद्रमा उपहास करते रहे तो श्रीगणेश को क्रोध आ गया और उन्होंने चंद्रमा को श्राप दे दिया कि “आज से तुम काले हो जाओगे।” श्रीगणेश के श्राप से चंद्रमा का चमक फीकी पड़ गई और वे काले हो गए। इसके बाद चंद्रमा को अपनी भूल का एहसास हुआ। क्षमा मांगने पर गणेशजी ने कहा कि “सूर्य के प्रकाश से तुम भी जगमगाओगे।”
इसलिए गणेश चतुर्थी पर नहीं करते चंद्रमा के दर्शन
चंद्रमा को क्षमा करने के बाद भगवान श्रीगणेश ने कहा कि “तुम्हारी गलती से ओरों को भी सबक मिले, इसके लिए चतुर्थी का यह दिन तुम्हें दण्ड देने के लिए हमेशा याद किया जाएगा। इस दिन को याद कर कोई अन्य व्यक्ति अपने सौंदर्य पर अभिमान नहीं करेगा। जो कोई व्यक्ति भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन तुम्हारे दर्शन करेगा, उस पर चोरी का झूठा आरोप लगेगा।”
गलती से चंद्रमा के दर्शन हो जाएं तो क्या करें?
धर्म ग्रंथों के अनुसार, यदि गणेश चतुर्थी की रात गलती से चंद्र दर्शन हो जाएं तो इस मंत्र का जाप करना चाहिए-
सिंह: प्रसेन मण्वधीत्सिंहो जाम्बवता हत:।
सुकुमार मा रोदीस्तव ह्येष: स्यमन्तक:।।



































