हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल में चार बार नवरात्रि मनाई जाती है, जिसमें दो गुप्त नवरात्रि होती हैं और दो प्रत्यक्ष नवरात्रि होती हैं, इनमें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है.
प्रत्यक्ष नवरात्रि एक बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन से शुरू होती है और दूसरा शारदीय नवरात्रि (Navratri). वाराणसी के ज्योतिषाचार्य गणेश मिश्र के अनुसार, शारदीय नवरात्रि की शुरुआत आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानि पहली तिथि से शुरू हो जाती है. इस साल शारदीय नवरात्रि 26 सितंबर शुरू हो रही है, जो 05 अक्टूबर को संपन्न होगी.
नवरात्रि में आदिशक्ति जगदंबा के नौ स्वरूपों की अलग-अलग दिन पूजा होती है. इसके लिए पहले दिन भक्त विधि विधान से घटस्थापना करते हैं. भक्त इन 09 दिनों में व्रत-उपवास करते हैं. अगले दिन यानि दशमी के दिन दशहरा (Dussehra) मनाया जाता है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान राम ने दशानन रावण का अंत किया था. इस दिन को विजयादशमी (Vijayadashami) के नाम से भी जानते हैं. क्योंकि दसवें दिन माता दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था. इस नवरात्रि में बंगाल में दुर्गा पूजा (Durga Puja) का उत्सव मनाया जाता है.
शारदीय नवरात्रि 2022 मुहूर्त
अश्विन कृष्ण अमावस्या को पितृ पक्ष संपन्न होगा और उसके अगले दिन यानि 26 सितंबर से शारदीय नवरात्रि शुरू होगी और 5 अक्टूबर को दशहरा के साथ संपन्न होगी. पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा का आरंभ 26 सितंबर को सुबह 03:24 से होगा और यह तिथि 27 सितंबर को सुबह 03:08 बजे संपन्न होगी.
घटस्थापना मुहूर्त 2022
26 सितंबर के दिन सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक अभिजीत मुहूर्त है. इस मुहूर्त में घटस्थापना उत्तम माना जाता है, जबकि घटस्थापना या कलश स्थापना का सुबह का मुहूर्त 06:20 बजे से सुबह 10:19 बजे तक है.
घटस्थापना विधि और पूजन सामग्री
हिंदू धार्मिक ग्रंथों में कलश स्थापना की जो विधि बताई गईं हैं, उनके अनुसार घटस्थापना के लिए मिट्टी का एक पात्र, कसोरा आदि लेकर इसमें शुद्ध मिट्टी रखें और उसमें जौ बो दें. घर में ईशान कोण यानि उत्तर-पूर्व दिशा में साफ-सफाई कर गंगाजल छिड़कें और पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं, इसके बाद मां की मूर्ति स्थापित करें.
इसे भी जानें: नवरात्रि में नौ देवियों के लिए पूजा मंत्र, बीज मंत्र, प्रार्थना एवं स्तुति मंत्र
जल रखने के लिए ताम्र पात्र या मिट्टी का छोटा कलश ले लें. इसमें गंगाजल भरें. गंगाजल न मिले तो इसमें स्वच्छ जल भरकर इसमें सिक्का, अक्षत्, सुपारी, लौंग का जोड़ा, दूर्वा डाल दें. फिर कलश के मुंह पर मौली बांध दें. कलश में आम के पत्ते डालकर एक नारियल पर लाल चुनरी को मौली से बांध कर इसे कलश पर रख दें.
अब जौ वाले पात्र, कसोरा आदि और कलश को मां दुर्गा की मूर्ति को दाईं ओर स्थापित कर दें. कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा की पूजा करें. नवरात्रि के पहले दिन मां शैत्रपुत्री की पूजा करते हैं.
शारदीय नवरात्रि कैलेंडर 2022
तारीख – मां दुर्गा के इस स्वरूप की होगी पूजा
26 सितंबर 2022- मां शैलपुत्री, पहले दिन, तिथि प्रतिपदा
27 सितंबर 2022 – मां ब्रह्मचारिणी, दूसरे दिन, तिथि द्वितीया
28 सितंबर 2022 – मां चंद्रघंटा, तीसरे दिन, तिथि तृतीया
29 सितंबर 2022 – मां कुष्मांडा, चौथे दिन, तिथि चतुर्थी
30 सितंबर 2022 – मां स्कंदमाता, पांचवें दिन, तिथि पंचमी
01 अक्टूबर 2022 – मां कात्यायनी, छठें दिन, तिथि षष्ठी
02 अक्टूबर 2022 – मां कालरात्रि, सातवें दिन, तिथि सप्तमी
03 अक्टूबर 2022 – मां महागौरी, आठवें दिन, तिथि दुर्गा अष्टमी, कन्या पूजन
04 अक्टूबर 2022 – मां सिद्धिदात्री ;नौवें दिन, तिथि महानवमी, व्रत पारण
05 अक्टूबर 2022 – मां दुर्गा मूर्ति विसर्जन, दशहरा, विजयादशमी, दशमी तिथि



































