पितृपक्ष चल रहा है और इसमें पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनका श्राद्ध किया जाता है. इसमें दान धर्म के कार्य बहुत फलदायी माने जाते हैं. ऐसा कहते हैं कि श्राद्धपक्ष में तर्पण और पिंडदान करने से पितरों को स्वर्ग प्राप्त होता है.
गरुड़ पुराण के अनुसार, यदि किसी मरते हुए इंसान के पास चार चीजें हों तो स्वर्ग जाने के लिए श्राद्धकर्मों की आवश्यकता नहीं रहती है. मरते वक्त ये चीजें पास हों तो इंसान सीधे स्वर्ग लोक जाता है.
तुलसी– ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, घर में रखा तुलसी का पौधा तीर्थरूपी होता है. ऐसा कहते हैं कि जो इंसान तुलसी की मंजरी से युक्त होकर प्राण त्यागता है, वो कभी यमलोक नहीं जाता है. यदि मरने वाले को तुलसी के पास लेटा दिया जाए, उसके मुंह और माथे पर तुलसी के पत्ते और मंजरियों को रख दिया जाए तो इंसान सीधी परलोक सिधारता है.
गंगाजल– गरुड़ पुराण के अनुसार, जब इंसान की मृत्यु का समय नजदीक आ जाए तो उसके मुंह में थोड़ा सा गंगाजल डाल देना चाहिए. विष्णु जी के कमल चरणों से निकली गंगा पापों का नाश करती है और पापों का नाश होते ही इंसान को बैकुण्ठ प्राप्त करने का अधिकार मिल जाता है. इसीलिए गंगा में अस्थियों को विसर्जित किया जाता है. जब तक ये अस्थियां गंगा में रहती हैं, इंसान तब तक स्वर्ग का सुख भोगता है.
तिल– श्राद्धपक्ष में तिल का विशेष महत्व बताया गया है. तिल भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न होने के कारण पवित्र होता है. इसलिए जब भी किसी इंसान की मृत्यु का समय निकट आ जाए तो उसके हाथ से तिल का दान जरूर करवा देना चाहिए. तिल का दान बहुत बड़ा दान माना जाता है. यह दान करने पर असुर, दैत्य और दानव दूर ही रहते हैं. मरने वाले के सिरहाने हमेशा काले तिल रखने चाहिए.
कुश– सनातन धर्म में कुश का विशेष महत्व बताया गया है. कुश एक प्रकार की घास होती है. इसके बिना ईश्वर की पूजा भी अधूरी है. शास्त्रों के अनुसार, कुश भगवान विष्णु के रोम से उत्पन्न हुई है. मृत्यु के समय उस इंसान को कुश का आसन बिछाकर लेटा देना चाहिए. इसके बाद उसके माथे पर तुलसी का पत्ता रख दें. ऐसा कहते हैं कि यदि किसी इंसान के मरने से पहले ये उपाय कर लिए जाएं तो श्राद्धकर्म के बिना ही उसे स्वर्ग में स्थान मिल जाता है.



































