पूरे देश में इस पवित्र पर्व को धूमधाम से मनाया जा रहा है। कल बहुत धूम -धाम से पंडालों और घरों में गणपति जी स्थापना की गयी। आज गणेश उत्सव का दूसरा दिन है। भाद्रपद माह के शुक्ल की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है ,जो अनंत चतुर्दशी (10 दिन ) तक मनाया जाता है। इस बार गणेश चतुर्थी 27 अगस्त से शुरू होकर 6 सितंबर को विसर्जन किया जाएगा। भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए उनका प्रिय भोग मोदक अर्पित किया जाता है। अनंत चतुर्दशी को परंपरा के अनुसार, गणेश उत्सव के बाद विघ्नहर्ता को सम्मान के साथ विदा किया जाता है। गणपति विसर्जन के साथ ही उत्सव की समाप्ति भी होती है। आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र से शुरू हुई गणपति विसर्जन परंपरा लोकमान्य तिलक ने 1893 में सार्वजनिक रूप से शुरू की थी ।
लेकिन, क्या आपके मन में भी ये सवाल रहता है कि आखिर गणेश उत्सव के बाद विसर्जन क्यों किया जाता है? अगर उत्सव के बाद विसर्जन न करें तो क्या होगा? आपके इस सवाल का जवाब उन्नाव के ज्योतिषाचार्य ऋषिकांत मिश्र बताते हैं। मान्यता के अनुसार गणेश उत्सव और विसर्जन की परंपरा की शुरुआत महाराष्ट्र में हुई थी, क्योंकि उत्तर भारत से भगवान गणेश अपने भाई कार्तिकेय से मिलने महाराष्ट्र गए थे। वहां वे 10 दिन रुके थे। इसके बाद उनकी सम्मान के साथ वहां से विदाई हुई थी। इसी दिन के बाद से गणपति विसर्जन की शुरुआत हो गई। इसके अलावा विसर्जन के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि गणेश भगवान सभी विघ्नों को समाप्त करके अपने लोक में वापस चले जाते हैं।





























