युद्ध की विभीषिका अब कंक्रीट के विशाल ढांचों को राख में बदल रही है। ईरान के B1 Bridge पर हुए हमले ने न केवल जान-माल का नुकसान किया है, बल्कि कूटनीतिक बातचीत के दरवाजों पर भी ताला लगा दिया है।
हमले के बाद की स्थिति:
- ईरान का रुख: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दो-टूक कहा है कि नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमले ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर नहीं कर पाएंगे। उन्होंने इसे “दुश्मन की हताशा” करार दिया है।
- क्षेत्रीय अस्थिरता: ईरान की जवाबी सूची में शामिल पुल (जैसे यूएई का Sheikh Zayed Bridge और जॉर्डन के पुल) वैश्विक व्यापार और आवाजाही के लिए जीवन रेखा हैं। अगर इन पर हमला होता है, तो पूरा खाड़ी क्षेत्र युद्ध की आग में झुलस सकता है।
- मनोवैज्ञानिक युद्ध: ट्रंप द्वारा जारी किए गए फुटेज और “समझौता करो या तबाही झेलो” का संदेश एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति है, जिसे ईरान अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है।
अंतिम शब्द: पुलों का गिरना केवल ईंट-पत्थर का नुकसान नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के देशों के बीच बचे-खुचे भरोसे के ढहने का प्रतीक है। आने वाले दिन वैश्विक सुरक्षा के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।
ईरान की ‘Hit List’ में शामिल प्रमुख पुल:
| देश | पुल का नाम (Key Bridges) |
| कुवैत | शेख जाबेर अल-अहमद अल-सबाह ब्रिज |
| UAE | शेख जायद, अल मक़ता और शेख खलीफ़ा ब्रिज |
| सऊदी-बहरीन | किंग फहद कॉज़वे |
| जॉर्डन | किंग हुसैन, दामिया और अब्दौन ब्रिज |



































